CG News: बैंक में जमा हो रही पेंशन, फिर भी भीख मांगने को मजबूर दृष्टिबाधित जयराम… आखिर क्या है वजह? जानें

CG News: बैंक में जमा हो रही पेंशन, फिर भी भीख मांगने को मजबूर दृष्टिबाधित जयराम… आखिर क्या है वजह? जानें

CG News: गरियाबंद जिले के विकासखंड मुख्यालय मैनपुर के राजापड़ाव क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कोकड़ी के आश्रित ग्राम बरगांव में रहने वाले दृष्टिबाधित दिव्यांग जयराम मंडावी (55) इन दिनों गंभीर आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं। दोनों आंखों से दृष्टिबाधित होने के कारण उनका आधार कार्ड नहीं बन पाया, जिसके चलते बैंक में पेंशन की राशि जमा होने के बावजूद वे उसे निकाल नहीं पा रहे है। आधार लिंक और ई.केवाईसी न होने से उनकी पेंशन अटकी हुई है।

भीख मांगकर चला रहे परिवार

जयराम मंडावी भूमिहीन हैं और अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ रहते हैं। परिवार के भरण.पोषण के लिए उन्हें साप्ताहिक बाजारों में भीख मांगने तक मजबूर होना पड़ रहा है। पत्नी के नाम से बने राशन कार्ड के माध्यम से उन्हें हर महीने 35 किलो चावल, चना, नमक और शक्कर मिल जाती है, लेकिन अन्य जरूरतों के लिए कोई स्थायी आय का साधन नहीं है।

जल्द बनेगा आधार कार्ड

इस मामले में पंचायत इंस्पेक्टर राजकुमार धुरवा ने बताया कि पहले आधार कार्ड बनाने में आंख की स्कैनिंग अनिवार्य थी, लेकिन अब अंगूठे के निशान का विकल्प भी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक पहचान दस्तावेज उपलब्ध हो जाएं तो मैनपुर के चॉइस सेंटर में जयराम मंडावी का आधार कार्ड बनवाने और जल्द पेंशन दिलाने के लिए प्रयास किया जाएगा।

आधार कार्ड न बनने से बढ़ी परेशानी

जयराम मंडावी ने बताया कि पहले उन्हें ग्राम पंचायत के माध्यम से हाथों-हाथ पेंशन मिल जाती थी। लेकिन बैंकिंग व्यवस्था लागू होने के बाद आधार लिंक और केवाईसी अनिवार्य कर दिया गया। उन्होंने पंचायत से लेकर विकासखंड और जिला मुख्यालय तक कई बार आधार कार्ड बनवाने की कोशिश की, लेकिन पूरी तरह दृष्टिबाधित होने के कारण उनका आवेदन निरस्त हो गया। जयराम का कहना है कि बैंक में पेंशन की राशि जमा हो रही है, लेकिन आधार लिंक और केवाईसी के अभाव में वे उसे निकाल नहीं पा रहे हैं।

प्रशासन से मदद की गुहार

जयराम मंडावी ने कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें पेंशन दिलाने के लिए जल्द पहल की जाए, ताकि उन्हें दृष्टिबाधित होने के बावजूद सरकारी सहायता से वंचित न रहना पड़े।

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