CG Farming News: बदलते बस्तर की नई तस्वीर, ‘ब्लैक गोल्ड’ की हुई शुरुआत, आदिवासी किसानों के लिए नई राह

CG Farming News: बदलते बस्तर की नई तस्वीर, ‘ब्लैक गोल्ड’ की हुई शुरुआत, आदिवासी किसानों के लिए नई राह

CG Farming News: इलाके के आदिवासी किसानों के बीच आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी जा रही है। जिले के युवा आदिवासी किसान रसन लाल कोर्राम ने हाल ही में अपनी पहली काली मिर्च की फसल लेकर यह साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शन और स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव है।

CG Farming News: पहली उपज लगभग 7 किलोग्राम काली मिर्च

कुछ वर्ष पूर्व ‘मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म एवं रिसर्च सेंटर’ द्वारा विकसित उच्च उत्पादक किस्म ‘‘मां दंतेश्वरी काली मिर्च-16’’ के पौधे उन्हें निशुल्क उपलब्ध कराए गए थे। इन पौधों को उनके घर के पीछे स्थित बाड़ी में पहले से मौजूद साल (सरगी) के पेड़ों के तनों के पास लगाया गया।

प्रारंभ में पर्याप्त ध्यान न देने के कारण कुछ पौधे नष्ट हो गए, किन्तु शेष पौधों ने धीरे-धीरे विकास करते हुए अब फल देना शुरू कर दिया है। हाल ही में रसन लाल कोंडागांव आकर काली मिर्च की उन्नत एवं संग्रहण तकनीक को समझकर गए थे। इसके बाद उन्होंने अपनी पहली उपज लगभग 7 किलोग्राम काली मिर्च ‘मां दंतेश्वरी हर्बल समूह’ को सौंपी।

समूह पौधे तैयार कर करता है वितरण

ज्ञात हो कि डॉ राजाराम त्रिपाठी द्वारा लगभग तीन दशक पूर्व स्थापित गैर सरकारी समाजसेवी संस्था द्वारा पिछले लगभग एक दशक से ‘मिशन ब्लैक गोल्ड मिशन’ के तहत बस्तर अंचल के छोटे और सीमांत आदिवासी किसानों को काली मिर्च की उन्नत किस्म के पौधे पूरी तरह निशुल्क वितरित किए जा रहे हैं। न केवल पौधे दिए जाते हैं, बल्कि किसानों के घरों के समीप स्थित बाडिय़ों में पहले से मौजूद आम, महुआ, इमली एवं साल जैसे पेड़ों के तनों के पास इन्हें लगवाकर, बेल को पेड़ों पर चढ़ाने तक का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

CG Farming News: अच्छी पैदावार संभव हो रही

कोंडागांव और आसपास के बस्तर अंचल में काली मिर्च जैसी नकदी फसलों की खेती अब एक उभरते हुए वैकल्पिक कृषि मॉडल के रूप में सामने आ रही है। पारंपरिक रूप से धान और लघु वनोपज पर निर्भर रहने वाले आदिवासी किसान अब बहुफसली और उच्च मूल्य वाली खेती की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे उनकी आय के स्रोत विविध हो रहे हैं।

इस बदलाव के पीछे स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल विकसित की गई प्रजातियां और कम लागत वाली खेती तकनीक अहम भूमिका निभा रही हैं। “मां दंतेश्वरी काली मिर्च-16” जैसी किस्में बस्तर के मौसम और वन क्षेत्र की जैव विविधता के अनुरूप तैयार की गई हैं, जिससे कम देखरेख में भी अच्छी पैदावार संभव हो रही है। पेड़ों पर चढ़ने वाली बेल आधारित खेती (एग्रोफॉरेस्ट्री मॉडल) के कारण किसानों को अलग से खेत तैयार करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

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