CG Crime: लोकेशन से बचने चोरों का नया हथकंडा, मोबाइल नहीं वाकी टॉकी का कर रहें इस्तेमाल, अंतरराज्यीय गिरोह से हुआ खुलासा

CG Crime: लोकेशन से बचने चोरों का नया हथकंडा, मोबाइल नहीं वाकी टॉकी का कर रहें इस्तेमाल, अंतरराज्यीय गिरोह से हुआ खुलासा

CG Crime: डिजिटल दौर में जहां पुलिस अपराध पर लगाम लगाने के लिए तकनीक का सहारा ले रही है, वहीं अपराधी भी लगातार अपने तौर-तरीके बदल रहे हैं। हाल ही में बस्तर पुलिस द्वारा पकड़े गए भिलाई के अंतरराज्यीय चोर गिरोह से हुए खुलासे ने यह साफ कर दिया है कि अब अपराधी मोबाइल फोन की जगह वाकी-टॉकी का इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग से बचा जा सके।

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह का एक सदस्य घर के अंदर घुसकर ताले तोड़ता था, जबकि दूसरा सदस्य बाहर खड़े होकर वाकी-टॉकी के माध्यम से निगरानी करता और अंदर मौजूद चोर को लगातार दिशा-निर्देश देता था। जैसे ही किसी संदिग्ध गतिविधि की आहट मिलती, तुरंत सूचना देकर अंदर मौजूद साथी को सतर्क कर दिया जाता था। बस्तर में लगातार हो रही चोरी की वारदातों से यह स्पष्ट हो गया है कि अब यह क्षेत्र अंतरराज्यीय चोर गिरोहों के लिए सॉफ्ट टारगेट बनता जा रहा है। बीते वर्ष बस्तर जिले में 256 चोरी के मामले दर्ज किए गए हैं।

इन वारदातों में ओडिशा, बंगाल, तेलंगाना, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के संगठित गिरोह शामिल पाए गए हैं। किराए के वाहनों से बदलते हैं शहरअंतरराज्यीय चोर गिरोह निजी वाहनों की बजाय किराए की कार और बाइक का इस्तेमाल करते हैं। इससे पहचान छिपाने में आसानी होती है और जरूरत पड़ने पर वाहन तुरंत बदल लिया जाता है। पुलिस के मुताबिक वारदात के बाद आरोपी शहर में रुकते नहीं, बल्कि तुरंत दूसरे जिले या राज्य की ओर निकल जाते हैं।

बस्तर बना चोर गिरोहों का सॉफ्ट टारगेटसूत्रों के अनुसार पिछले तीन महीनों में ही बस्तर जिले में दो दर्जन से अधिक स्थानों पर चोरी की घटनाएं सामने आई हैं। इनमें सबसे अधिक मामले बस्तर थाना क्षेत्र में दर्ज हुए हैं, जबकि कोतवाली दूसरे स्थान पर है। गिरोह के सदस्य पहले शहर में रुककर सूने मकानों की रेकी करते हैं, लोगों की दिनचर्या और पुलिस गश्त का समय नोट करते हैं।

त्योहारों, शादी-ब्याह और पारिवारिक यात्राओं के दौरान खाली घरों को विशेष रूप से निशाना बनाया जाता है। वारदात के पहले ही तय होती हैं सदस्यों की भूमिकापुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि गिरोह में हर सदस्य की भूमिका पहले से तय रहती हैकोई रेकी करता है, कोई निगरानी संभालता है और कोई वारदात को अंजाम देता है। चोरी का समय और भागने के रास्ते भी पहले से चिन्हित कर लिए जाते हैं।

तीन महीने में थाना क्षेत्रवार चोरी की घटनाएंथाना बस्तर – 16थाना कोतवाली – 13थाना परपा – 12केस नं 1वाकी -टॉकी से देता रहा जानकारी…कोतवाली थाना क्षेत्र के सनसिटी में रात 10 बजे यश मेठानी के सूने घर में प्रवेश कर लगभग 10 लाख रूपए के सोने चांदी के आभूषण व 1.50 लाख रूपए नकद ले उड़े। इस वारदात में आरोपियों ने बकायदा वाकी टाॅकी का इस्तेमाल किया जिसमें एक आरोपी घर के भीतर घुसे चोर को बाहर की जानकारी दे रहा था।केस नं 2किराए की वाहन का प्रयोगदूसरे केस में वृदावन कॉलोनी निवासी सुभाष गंजीर के घर में रात 9 बजे प्रवेश कर चांदी की दो मूर्ति और 20 हजार रूपए नकद ले उड़े।

इस वारदात में भी आरोपियों ने वाकी टॉकी के साथ शहर बदलने किराए की गाड़ी का प्रयोग किया“वाकी-टॉकी में न सिम होता है और न ही कॉल रिकॉर्ड, जिससे तकनीकी साक्ष्य जुटाना कठिन हो जाता है। अपराधी इसी का फायदा उठा रहे हैं। ऐसे में पुलिस अब इंटर-स्टेट समन्वय, तकनीकी निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष ध्यान दे रही है।”— गीतिका साहूअतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं साइबर प्रभारी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *