CG Board Exam: शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर कठघरे में है। ताजा मामला अभनपुर और धरसींवा विकासखंड से जुड़ा है, जहां विभाग की गंभीर चूक के चलते धरसींवा के छात्र-छात्राओं को अभनपुर विकासखंड का प्रश्नपत्र थमा दिया गया। धरसींवा के बच्चों को अभनपुर विकासखंड का प्रश्न पत्र दे दिया गया। हैरानी की बात यह है कि यह गड़बड़ी परीक्षा केंद्रों पर खुलेआम होती रही, लेकिन जिम्मेदारों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
जानकारी के मुताबिक, प्रश्नपत्रों में प्रत्येक विकासखंड के अनुसार अलग-अलग कोड और क्रमांक अंकित होता है, जिसके आधार पर संबंधित क्षेत्र के विद्यार्थियों को पेपर वितरित किया जाता है। इसके बावजूद इस व्यवस्था का पालन नहीं हुआ और परीक्षा की प्रक्रिया पूरी भी हो गई। इसमें सबसे बड़ी वजह प्रश्नपत्र की कमी को बताया जा रहा है।
सप्लाई व वितरण में तय प्रोटोकॉल का पालन नहीं
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह महज एक मानवीय त्रुटि नहीं, बल्कि सिस्टम फेलियर का स्पष्ट उदाहरण है। यदि प्रश्नपत्रों की सप्लाई और वितरण में तय प्रोटोकॉल का पालन किया जाता, तो ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होती।
इससे पहले भी परीक्षा से जुड़े मामलों में विभाग की लापरवाही सामने आती रही है, कभी प्रश्नपत्रों में त्रुटियां, कभी सिलेबस के बाहर के सवाल, तो कभी जवाब लिखने के लिए जगह ही नहीं। लेकिन अब तक किसी पर भी कार्रवाई नहीं की गई है।
सवाल पूछा, लेकिन जवाब लिखने की जगह नहीं दी
हाल ही में 8 वीं बोर्ड परीक्षा में लापरवाही उजागर हुई थी। प्रश्नपत्रों में कई ऐसे सवाल शामिल थे, जिनके उत्तर लिखने के लिए स्थान ही निर्धारित नहीं किया गया था। इस चूक ने परीक्षा केंद्रों में छात्रों को असमंजस और परेशानी में डाल दिया। शिक्षकों के अनुसार, प्रश्नपत्र के प्रश्न क्रमांक 17 में 10 अंकों का प्रश्न ‘अथवा’ विकल्प के साथ दिया गया था, लेकिन दोनों ही विकल्पों के उत्तर के लिए कोई स्थान उपलब्ध नहीं था।
ऐसे में छात्रों को या तो सीमित जगह में ही उत्तर समेटना पड़ा, जिससे परीक्षा का प्रवाह भी प्रभावित हुआ। यह पहली बार नहीं है जब परीक्षा प्रबंधन में ऐसी खामियां सामने आई हों। पूरे परीक्षा सत्र के दौरान विभागीय स्तर पर लगातार गड़बड़ियां देखने को मिली हैं। परीक्षा शुरू होने के साथ ही प्रश्नपत्रों में त्रुटियां, कटे-फटे पेपर और सिलेबस से बाहर के प्रश्न पूछे जाने जैसे मामले सामने आए थे।


