-शिक्षा को बाजार नहीं, सार्वजनिक आधार बनाना जरूरी
केंद्र सरकार Central Government ने राज्यों से परामर्श किए बिना नई शिक्षा नीति National Education Policy (एनइपी) 2020 को लागू किया, जिससे शिक्षा का पूर्ण केंद्रीकरण हो रहा है। भारतीय ज्ञान प्रणाली Indian knowledge system के नाम पर अवैज्ञानिक पाठ्यक्रम बनाए जा रहे हैं।
ये बातें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सुखदेव थोराट Sukhadeo Thorat ने कही। वे शनिवार को रमय्या इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में आयोजित पीपुल्स पार्लियामेंट के उद्घाटन के बाद संबोधित कर रहे थे।
22 प्रतिशत ड्रॉपआउट रेट
उन्होंने कहा कि 1990 के दशक में निजीकरण की लहर के बाद से, शिक्षा में असमानता बढ़ रही है। लगभग 67 प्रतिशत उच्च शिक्षण संस्थान स्व-वित्तपोषित और निजी हो गए हैं। बढ़ती फीस के कारण, आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों में 22 प्रतिशत ड्रॉपआउट रेट देखा गया है। पूर्व सांसद जवाहर सरकार ने एनइपी को केंद्रीकरण, कॉरपोरेटाइजेशन, सांप्रदायिकरण और निजीकरण का औजार बताया तथा संसद और न्यायपालिका में चुनौती देने का आह्वान किया।
विषय हटाने की आलोचना
आइआइटी IIT बॉम्बे के सेवानिवृत्त प्रोफेसर राम पुनियानी ने वैज्ञानिक सोच पर हो रहे हमलों पर चिंता जताई और पाठ्यक्रम से विकासवाद जैसे विषय हटाने की आलोचना की। यह आयोजन एनइपी 2020 के विकल्प के रूप में पीपुल्स एजुकेशन पॉलिसी तैयार करने के उद्देश्य से किया गया। देशभर से लगभग 1,000 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। समापन सत्र में पीपुल्स एजुकेशन पॉलिसी के अंतिम मसौदे को मंजूरी दी जाएगी। अखिल भारतीय शिक्षा बचाओ समिति के अध्यक्ष प्रकाश एन. शाह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।


