जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती मनाई:मुजफ्फरपुर में राजद जिलाध्यक्ष की अध्यक्षता में कार्यक्रम, कहा- ​​​​​​​गरीब बच्चों की स्कूल फीस माफ किया था

जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती मनाई:मुजफ्फरपुर में राजद जिलाध्यक्ष की अध्यक्षता में कार्यक्रम, कहा- ​​​​​​​गरीब बच्चों की स्कूल फीस माफ किया था

मुजफ्फरपुर के बीबीगंज स्थित राज लक्ष्मी विवाह भवन में पूर्व मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती मनाई गई। राजद जिलाध्यक्ष रमेश गुप्ता की अध्यक्षता में उनके तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके योगदानों को याद किया गया। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष रमेश गुप्ता ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर एक जननायक नेता थे। उन्होंने बिहार में पिछड़े और ओबीसी वर्गों के लिए आरक्षण लागू किया। उनका जीवन हमेशा कमजोर वर्ग के लोगों के प्रति समर्पित रहा। रमेश गुप्ता ने बताया कि 1967 में पहली बार उपमुख्यमंत्री बनने पर कर्पूरी ठाकुर ने अंग्रेजी की अनिवार्यता को समाप्त किया। इस निर्णय के लिए उनकी आलोचना भी हुई, लेकिन इसका उद्देश्य शिक्षा को आम लोगों तक पहुंचाना था। उस दौर में अंग्रेजी में फेल होने वाले मैट्रिक पास छात्रों का मजाक ‘कर्पूरी डिवीजन से पास’ कहकर उड़ाया जाता था। गरीब बच्चों की स्कूल फीस माफ किया उन्होंने आर्थिक रूप से गरीब बच्चों की स्कूल फीस माफ करने का भी काम किया। वह देश के पहले मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने अपने राज्य में मैट्रिक तक मुफ्त पढ़ाई की घोषणा की थी। उन्होंने राज्य में उर्दू को दूसरी राजकीय भाषा का दर्जा भी दिया। मंच पर उपस्थित अन्य वक्ताओं ने जननायक कर्पूरी ठाकुर के योगदानों को याद करते हुए कहा कि 1971 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने किसानों को बड़ी राहत दी। उन्होंने गैर-लाभकारी जमीन पर मालगुजारी टैक्स बंद कर दिया और पांच एकड़ तक की जमीन पर मालगुजारी खत्म कर दी। वह ऐसे नेता थे जिन्होंने निजी और सार्वजनिक जीवन में उच्च आचरण के मानदंड स्थापित किए। वक्ताओं ने आगे बताया कि बिहार के मुख्यमंत्री सचिवालय की इमारत में चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों के लिए लिफ्ट का उपयोग प्रतिबंधित था, लेकिन मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि चतुर्थवर्गीय कर्मचारी भी लिफ्ट का इस्तेमाल कर सकें। उन्होंने उत्पीड़न और प्रताड़ना सहते हुए भी सत्य के लिए अडिग रहकर संघर्ष किया। मौके पर मुख्य रूप से उपस्थित- एमएलसी मो. कारी सोएब, पूर्व विधायक निरंजन राय, मुन्ना यादव,लालबाबू राम, पूर्व प्रत्याशी पृथ्वीनाथ राय सहित सभी प्रखंड अध्यक्ष और सम्मानित कार्यकर्ता उपस्थित थे। मुजफ्फरपुर के बीबीगंज स्थित राज लक्ष्मी विवाह भवन में पूर्व मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती मनाई गई। राजद जिलाध्यक्ष रमेश गुप्ता की अध्यक्षता में उनके तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके योगदानों को याद किया गया। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष रमेश गुप्ता ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर एक जननायक नेता थे। उन्होंने बिहार में पिछड़े और ओबीसी वर्गों के लिए आरक्षण लागू किया। उनका जीवन हमेशा कमजोर वर्ग के लोगों के प्रति समर्पित रहा। रमेश गुप्ता ने बताया कि 1967 में पहली बार उपमुख्यमंत्री बनने पर कर्पूरी ठाकुर ने अंग्रेजी की अनिवार्यता को समाप्त किया। इस निर्णय के लिए उनकी आलोचना भी हुई, लेकिन इसका उद्देश्य शिक्षा को आम लोगों तक पहुंचाना था। उस दौर में अंग्रेजी में फेल होने वाले मैट्रिक पास छात्रों का मजाक ‘कर्पूरी डिवीजन से पास’ कहकर उड़ाया जाता था। गरीब बच्चों की स्कूल फीस माफ किया उन्होंने आर्थिक रूप से गरीब बच्चों की स्कूल फीस माफ करने का भी काम किया। वह देश के पहले मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने अपने राज्य में मैट्रिक तक मुफ्त पढ़ाई की घोषणा की थी। उन्होंने राज्य में उर्दू को दूसरी राजकीय भाषा का दर्जा भी दिया। मंच पर उपस्थित अन्य वक्ताओं ने जननायक कर्पूरी ठाकुर के योगदानों को याद करते हुए कहा कि 1971 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने किसानों को बड़ी राहत दी। उन्होंने गैर-लाभकारी जमीन पर मालगुजारी टैक्स बंद कर दिया और पांच एकड़ तक की जमीन पर मालगुजारी खत्म कर दी। वह ऐसे नेता थे जिन्होंने निजी और सार्वजनिक जीवन में उच्च आचरण के मानदंड स्थापित किए। वक्ताओं ने आगे बताया कि बिहार के मुख्यमंत्री सचिवालय की इमारत में चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों के लिए लिफ्ट का उपयोग प्रतिबंधित था, लेकिन मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि चतुर्थवर्गीय कर्मचारी भी लिफ्ट का इस्तेमाल कर सकें। उन्होंने उत्पीड़न और प्रताड़ना सहते हुए भी सत्य के लिए अडिग रहकर संघर्ष किया। मौके पर मुख्य रूप से उपस्थित- एमएलसी मो. कारी सोएब, पूर्व विधायक निरंजन राय, मुन्ना यादव,लालबाबू राम, पूर्व प्रत्याशी पृथ्वीनाथ राय सहित सभी प्रखंड अध्यक्ष और सम्मानित कार्यकर्ता उपस्थित थे।  

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