लहर-लहर:ज़िंदगी से दु:ख कभी गायब नहीं हुआ, फिर गीतों की परंपरा से क्यों हो गया?
मुझे कभी-कभी लगता है कि आज की फिल्मों में जैसे दु:ख का कोई वजूद ही नहीं रह गया है। एक जमाना था जब लगभग हर फिल्म में एक-दो ऐसे गीत जरूर होते थे जो बिछड़ने, तन्हाई, इंतजार, टूटे हुए दिल या ज़िंदगी की शिकस्त की कहानी कहते थे। आज फिल्मी गानों को सुनकर तो ऐसा…

