गोपालगंज में मानसिक तनाव के केस बढ़े:रोजाना 35-40 मरीज पहुंच रहे अस्पताल, एक महीने में 600 हुए

गोपालगंज में मानसिक तनाव के केस बढ़े:रोजाना 35-40 मरीज पहुंच रहे अस्पताल, एक महीने में 600 हुए

गोपालगंज जिले में मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर चुनौती बन गया है। अस्पताल की रिपोर्टों के अनुसार, जिले में चिंता और अवसाद के मरीजों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। मानसिक सुकून की तलाश में बड़ी संख्या में लोग अब चिकित्सकीय परामर्श के लिए सदर अस्पताल पहुंच रहे हैं। मॉडल अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 30 से अधिक मानसिक रोगी आ रहे हैं। कई बार यह संख्या 40 के पार चली जाती है। एक महीने के भीतर यह संख्या बढ़कर लगभग 600 हो गई है। इनमें 20 से 30 वर्ष की महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है। लोग अब मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग हो रहे अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में बढ़ती भीड़ दर्शाती है कि लोग अब मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग हो रहे हैं। हालांकि, मरीजों की बढ़ती संख्या प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इस समस्या की चपेट में सबसे अधिक 20 से 30 साल के युवा आ रहे हैं। इस आयु वर्ग में चिंता और अवसाद के लक्षण तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अकेलापन, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, पढ़ाई और नौकरी को लेकर अनिश्चितता इसके प्रमुख कारण हैं। घंटों अकेले स्क्रीन पर समय बिताने से युवाओं में अकेलापन बढ़ रहा सोशल मीडिया पर दूसरों से तुलना, साइबर जगत की चकाचौंध और घंटों अकेले स्क्रीन पर समय बिताने से युवाओं में अकेलापन बढ़ रहा है, जो तनाव का कारण बन रहा है। भागदौड़ भरी जीवनशैली और पारिवारिक अपेक्षाओं का बोझ भी युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। मॉडल अस्पताल में तैनात डॉक्टर मरीजों की काउंसलिंग और दवाइयों के जरिए उपचार कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि सही समय पर लक्षणों की पहचान कर ली जाए, तो अवसाद से पूरी तरह मुक्ति संभव है। सामाजिक कलंक को कम करना भी बेहद जरूरी समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर फैले सामाजिक कलंक को कम करना भी बेहद जरूरी है ताकि लोग बिना डरे अपनी समस्या साझा कर सकें। ओपीडी में आने वाले इन मरीजों में अनिद्रा, घबराहट, चिड़चिड़ापन और भविष्य को लेकर अत्यधिक चिंता जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लोग अब धीरे-धीरे मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूक हो रहे हैं, यही वजह है कि वे इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि इस स्थिति से बचने के लिए युवाओं को अपनी जीवनशैली में बदलाव करना चाहिए। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और परिवार के साथ समय बिताना इसमें कारगर साबित हो सकता है। साथ ही, समाज में मानसिक बीमारी को ‘कलंक’ के बजाय एक सामान्य बीमारी के रूप में देखने की जरूरत है ताकि पीड़ित समय पर मदद ले सकें। इस संदर्भ में मॉडल अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में तैनात डॉ फिरोज खान ने बताया कि आजकल सबसे ज्यादा जो मानसिक समस्या है उनमें एंजायटी और माइग्रेनहम है। महिलाओं में समस्या ज्यादा देखने को मिल रहा महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रहा है। महिलाओं में यह समस्या ज्यादा होने का कारण है एक तो जीवन शैली ज्यादा तनाव। महिलाएं पूरा परिवार का देखरेख करती है लेकिन कहीं ना कहीं वह अपना ध्यान नहीं रख पाती, घर की चिंता बच्चों की चिंता तो यह सबसे बड़ा कारण निकल कर आ रहा है और ये चीज 25 से 30 साल के उम्र की महिलाओं में देखा जाता है। सोशल मीडिया ,मोबाइल इसका भी उपयोग ज्यादा करने की वजह से भी यह समस्याएं हो रही है। उन्होंने कहा कि लोगो को चाहिए कि अधिक से अधिक अपने परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताइए और अपने को इंगेज रखकर खुश रखिए कोई तनाव चिंता है तो घर की लोगों से शेयर करें। पुरुषों की अपेक्षा मार्च महीने में 500 करीब मरीज आए प्रतिदिन जो मानसिक रोगियो की संख्या लगभग 35 से 40 है जिनमें सबसे ज्यादा जो मरीज आते हैं वह है एंजाइटी के और डिप्रेशन के इनमें माइग्रेन जिनमें महिलाओं का संख्या ज्यादा है पुरुषों की अपेक्षा मार्च महीने में 500 करीब मरीज आए है। जिसमें 450 के करीब महिलाएं हैं। वह भी एंजायटी और माइग्रेन के पेशेंट हैं। हमारे यहां दवा के साथ-साथ पेशेंट को काउंसलिंग भी की जाती है। उनको 10 दिन में फ्लो पर बुलाया जाता है। जिनमें उनका फीडबैक दिया जाता है कि दवा का कितना उनको फायदा हुआ है और क्या उनके जीवन शैली में क्या-क्या बदलाव आ रहा है।
कुछ फोन चलाने की वजह से भी ऐसा हालात था क्योंकि सोशल मीडिया पर हम जैसा सोचते हैं। वैसे ही आता है कभी-कभी ऐसा भी होता है कि ज्यादा रिलेशन को लेकर या फिर समाज को लेकर ओवर थिंकिंग वीडियो भी उसमें आता है। जो देखने के बाद और ज्यादा ओवर थिंकिंग होने लगता है। इससे अच्छा है कि हम सोशल मीडिया से भी ज्यादातर दूर रहे हैं सिर्फ जरूरी काम के लिए यूज करें।…. ज्योति सिंह मरीज गोपालगंज जिले में मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर चुनौती बन गया है। अस्पताल की रिपोर्टों के अनुसार, जिले में चिंता और अवसाद के मरीजों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। मानसिक सुकून की तलाश में बड़ी संख्या में लोग अब चिकित्सकीय परामर्श के लिए सदर अस्पताल पहुंच रहे हैं। मॉडल अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 30 से अधिक मानसिक रोगी आ रहे हैं। कई बार यह संख्या 40 के पार चली जाती है। एक महीने के भीतर यह संख्या बढ़कर लगभग 600 हो गई है। इनमें 20 से 30 वर्ष की महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है। लोग अब मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग हो रहे अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में बढ़ती भीड़ दर्शाती है कि लोग अब मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग हो रहे हैं। हालांकि, मरीजों की बढ़ती संख्या प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इस समस्या की चपेट में सबसे अधिक 20 से 30 साल के युवा आ रहे हैं। इस आयु वर्ग में चिंता और अवसाद के लक्षण तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अकेलापन, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, पढ़ाई और नौकरी को लेकर अनिश्चितता इसके प्रमुख कारण हैं। घंटों अकेले स्क्रीन पर समय बिताने से युवाओं में अकेलापन बढ़ रहा सोशल मीडिया पर दूसरों से तुलना, साइबर जगत की चकाचौंध और घंटों अकेले स्क्रीन पर समय बिताने से युवाओं में अकेलापन बढ़ रहा है, जो तनाव का कारण बन रहा है। भागदौड़ भरी जीवनशैली और पारिवारिक अपेक्षाओं का बोझ भी युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। मॉडल अस्पताल में तैनात डॉक्टर मरीजों की काउंसलिंग और दवाइयों के जरिए उपचार कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि सही समय पर लक्षणों की पहचान कर ली जाए, तो अवसाद से पूरी तरह मुक्ति संभव है। सामाजिक कलंक को कम करना भी बेहद जरूरी समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर फैले सामाजिक कलंक को कम करना भी बेहद जरूरी है ताकि लोग बिना डरे अपनी समस्या साझा कर सकें। ओपीडी में आने वाले इन मरीजों में अनिद्रा, घबराहट, चिड़चिड़ापन और भविष्य को लेकर अत्यधिक चिंता जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लोग अब धीरे-धीरे मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूक हो रहे हैं, यही वजह है कि वे इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि इस स्थिति से बचने के लिए युवाओं को अपनी जीवनशैली में बदलाव करना चाहिए। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और परिवार के साथ समय बिताना इसमें कारगर साबित हो सकता है। साथ ही, समाज में मानसिक बीमारी को ‘कलंक’ के बजाय एक सामान्य बीमारी के रूप में देखने की जरूरत है ताकि पीड़ित समय पर मदद ले सकें। इस संदर्भ में मॉडल अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में तैनात डॉ फिरोज खान ने बताया कि आजकल सबसे ज्यादा जो मानसिक समस्या है उनमें एंजायटी और माइग्रेनहम है। महिलाओं में समस्या ज्यादा देखने को मिल रहा महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रहा है। महिलाओं में यह समस्या ज्यादा होने का कारण है एक तो जीवन शैली ज्यादा तनाव। महिलाएं पूरा परिवार का देखरेख करती है लेकिन कहीं ना कहीं वह अपना ध्यान नहीं रख पाती, घर की चिंता बच्चों की चिंता तो यह सबसे बड़ा कारण निकल कर आ रहा है और ये चीज 25 से 30 साल के उम्र की महिलाओं में देखा जाता है। सोशल मीडिया ,मोबाइल इसका भी उपयोग ज्यादा करने की वजह से भी यह समस्याएं हो रही है। उन्होंने कहा कि लोगो को चाहिए कि अधिक से अधिक अपने परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताइए और अपने को इंगेज रखकर खुश रखिए कोई तनाव चिंता है तो घर की लोगों से शेयर करें। पुरुषों की अपेक्षा मार्च महीने में 500 करीब मरीज आए प्रतिदिन जो मानसिक रोगियो की संख्या लगभग 35 से 40 है जिनमें सबसे ज्यादा जो मरीज आते हैं वह है एंजाइटी के और डिप्रेशन के इनमें माइग्रेन जिनमें महिलाओं का संख्या ज्यादा है पुरुषों की अपेक्षा मार्च महीने में 500 करीब मरीज आए है। जिसमें 450 के करीब महिलाएं हैं। वह भी एंजायटी और माइग्रेन के पेशेंट हैं। हमारे यहां दवा के साथ-साथ पेशेंट को काउंसलिंग भी की जाती है। उनको 10 दिन में फ्लो पर बुलाया जाता है। जिनमें उनका फीडबैक दिया जाता है कि दवा का कितना उनको फायदा हुआ है और क्या उनके जीवन शैली में क्या-क्या बदलाव आ रहा है।
कुछ फोन चलाने की वजह से भी ऐसा हालात था क्योंकि सोशल मीडिया पर हम जैसा सोचते हैं। वैसे ही आता है कभी-कभी ऐसा भी होता है कि ज्यादा रिलेशन को लेकर या फिर समाज को लेकर ओवर थिंकिंग वीडियो भी उसमें आता है। जो देखने के बाद और ज्यादा ओवर थिंकिंग होने लगता है। इससे अच्छा है कि हम सोशल मीडिया से भी ज्यादातर दूर रहे हैं सिर्फ जरूरी काम के लिए यूज करें।…. ज्योति सिंह मरीज  

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