एयरफोर्स कर्मी के खिलाफ गलत तथ्यों पर ससुर ने रिपोर्ट तो दर्ज कराई, साथ पुलिस ने भी उसे गुंडा बताने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। सपने में जीजा के छेड़ने वाले केस को आधार बनाते हुए नौबस्ता थाना इंस्पेक्टर आशीष कुमार शुक्ला ने एयरफोर्स कर्मी पर गुंडा एक्ट पर मुहर लगा दी, हालांकि एडीएम सिटी की कोर्ट से पीड़ित को राहत मिली। इसके बाद भ्रूण हत्या का केस भी दर्ज कराया गया, जिसमें आरोप सही न मिलने पर फाइनल रिपोर्ट लगाई गई। इन 7 वर्षों में एयरफोर्स कर्मी का सुकून और प्रमोशन सपने में छेड़छाड़ की भेंट चढ़ गया। 2015 में एयरफोर्स में मिली थी नौकरी बिठूर निवासी एयरफोर्स कर्मी ने बताया कि वर्ष 2015 में ही उन्हें नौकरी मिली गई थी। नौकरी के दौरान वह देश के अलग-अलग कई हिस्सों में तैनात रहे। 10 फरवरी 2019 को उनकी शादी हुई, जिसके बाद पहला मुकदमा नौबस्ता थाने में साली से छेड़छाड़ का दर्ज किया गया था। इस मामले में उन्हें 19 दिन जेल में रहना पड़ा। हालांकि कोर्ट ने सपने में छेड़छाड़ के आरोप को सही नहीं माना और एयरफोर्स कर्मी को बरी कर दिया। एयरफोर्स कर्मी ने बताया कि इसी दौरान 10 फरवरी 2020 को उनके खिलाफ नौबस्ता पुलिस ने गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की। पुलिस ने लिखा आरोपी अभ्यस्थ अपराधी है, जिसकी सामाजिक ख्याति एक गुंडा प्रवृत्ति की है। उसके विरुद्ध दुस्साहसिक आपराधिक कृत्यों से जनमानस भयभीत है और इसके विरुद्ध सूचनाएं देने से डरते हैं। एयरफोर्स कर्मी ने बताया कि उस दौरान वह पुणे एयरफोर्स में तैनात थे। पुलिस की इस कार्रवाई से उनकी सामाजिक क्षति हुई जिससे उन्हें खाडे़पुर का अपना मकान भी औने पौने दाम पर बेचना पड़ा था। अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को एयरफोर्स कर्मी ने एडीएम सिटी की कोर्ट में चुनौती दी। महज एक मुकदमे के आधार पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई को तत्कालीन एडीएम सिटी अतुल कुमार की कोर्ट ने गलत पाया और खारिज कर दिया। भ्रूण हत्या के केस में लगी अंतिम रिपोर्ट उन्होंने बताया कि पत्नी ने उनके खिलाफ बिधनू थाने में 27 अगस्त 2020 को अपने ही भ्रूण हत्या का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था। पुलिस ने इस मामले में विवेचना के बाद आरोप गलत पाते हुए फाइनल रिपोर्ट लगाकर मामला बंद कर दिया था। एयरफोर्स कर्मी ने बताया कि वर्ष 2015 में उनकी ज्वाइनिंग लीडिंग एयर क्राफ्ट मैन के पद पर हुई थी। वर्ष 2020 में उन्हें कारपोरल के पद पर प्रमोशन मिलना था लेकिन जेल जाने के कारण प्रमोशन रोक दिया गया। छह साल बाद कोर्ट से बेकसूर साबित होने के बाद अब उन्हें कारपोरल के पद पर प्रमोशन मिलेगा। वर्ष 2028 में सार्जेंट के पद पर प्रमोशन मिलना है। मुकदमे के कारण वह अपने साथ काम करने वाले साथियों से पद और प्रमोशन में कई साल पीछे रह गए।।


