देवरिया जिले के महुआडीह थाना क्षेत्र स्थित हेतिमपुर टोल प्लाजा की टोल वसूली डीड में 2.79 करोड़ रुपये की स्टाम्प चोरी का मामला सामने आया है। टोल वसूली करने वाली इंदौर की फर्म और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के बीच हुए अनुबंध में यह अनियमितता पकड़ी गई है। सहायक महानिरीक्षक (निबंधन) अजय धर्मराज सिंह ने इस संबंध में जिलाधिकारी न्यायालय में मुकदमा दाखिल किया है। यह टोल प्लाजा गोरखपुर-मुजफ्फरपुर नेशनल हाईवे-28 पर स्थित है। टोल वसूली के लिए मेसर्स हाईवे इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, इंदौर और एनएचएआई के बीच 10 सितंबर 2025 को एक वर्ष का अनुबंध हुआ था। यह अनुबंध 18 अक्टूबर 2025 से 18 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। अनुबंध के अनुसार, कंपनी को एक वर्ष में एनएचएआई को 59 करोड़ 77 लाख 77 हजार रुपये का शुल्क अदा करना है। जांच में खुलासा हुआ कि लगभग 60 करोड़ रुपये के इस अनुबंध की डीड मात्र 100 रुपये के स्टाम्प पर तैयार की गई थी। जबकि निबंधन विभाग के नियमानुसार, इसका विधिवत पंजीकरण कराने पर 2 करोड़ 79 लाख 11 हजार रुपये का स्टाम्प शुल्क देय था। आरोप है कि कंपनी ने दो प्रतिशत स्टाम्प शुल्क और दो प्रतिशत विकास शुल्क का भुगतान नहीं किया। इस मामले में अनुबंध से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सहायक महानिरीक्षक (निबंधन) अजय धर्मराज सिंह ने बताया कि प्रवर्तन कार्रवाई के दौरान यह अनियमितता सामने आई। उन्होंने यह भी बताया कि डीड के अभिलेख प्राप्त करने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। कुल 2.79 करोड़ रुपये की स्टाम्प चोरी का यह मुकदमा जिलाधिकारी के समक्ष दाखिल किया गया है। गौरतलब है कि वर्ष 2014 में भी इसी टोल प्लाजा से संबंधित एक अन्य अनुबंध में 1.96 करोड़ रुपये की स्टाम्प चोरी का मामला पकड़ा गया था। वहीं, एनएचएआई गोरखपुर के परियोजना निदेशक ललित प्रताप पाल ने इस संबंध में कहा कि टोल वसूली से संबंधित डीड दिल्ली स्थित कार्यालय में निष्पादित होती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि स्टाम्प शुल्क में कोई कमी पाई गई है, तो संबंधित विभाग अपने नियमों के अनुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।


