पत्रकार की मौत के मामले में बिजली विभाग के मुख्य अभियंता समेत चार अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

पत्रकार की मौत के मामले में बिजली विभाग के मुख्य अभियंता समेत चार अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

गोंडा जिले में लापरवाही की एक दर्दनाक घटना सामने आई। जहां वर्षों से झूल रहा हाईटेंशन बिजली तार आखिरकार जानलेवा साबित हुआ। 35 वर्षीय पत्रकार रंजीत तिवारी की करंट लगने से मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया। बल्कि बिजली विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में बिजली विभाग के मुख्य अभियंता समेत चार के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है।

गोंडा जिले के नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित पोर्टरगंज पथवलिया गांव में शुक्रवार सुबह एक हृदयविदारक हादसा हो गया। यहां रहने वाले 35 वर्षीय रंजीत तिवारी, जो पेशे से पत्रकार थे। एक लंबे समय से चले आ रहे खतरे का शिकार बन गए। उनके घर के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन कई वर्षों से झूल रही थी। लगातार हादसे का डर बना हुआ था। परिजनों के मुताबिक, रंजीत तिवारी पिछले करीब 10 सालों से इस समस्या को लेकर बिजली विभाग के अधिकारियों के पास जाते रहे। उन्होंने कई बार लिखित शिकायतें भी दीं। और तार को हटाने या ठीक कराने की मांग की। लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। समस्या जस की तस बनी रही।

संभलने तक के लिए मौका नहीं मिला, घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत

शुक्रवार सुबह हालात और ज्यादा खराब हो गए थे। बिजली का तार घर की छत के बेहद करीब आ गया था। रंजीत ने खतरे को देखते हुए आसपास के लोगों को सतर्क भी किया। वह पड़ोसियों को समझा ही रहे थे कि अचानक तेज आवाज के साथ हाईटेंशन तार टूटकर उनके ऊपर गिर गया। तार में दौड़ रहे तेज करंट ने उन्हें संभलने का मौका तक नहीं दिया और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मौके पर पहुंचे लोगों ने देखा कि रंजीत तिवारी जमीन पर पड़े हैं। और उनकी हालत बेहद गंभीर है। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। परिवार में कोहराम मच गया। रंजीत अपने पीछे पत्नी और तीन छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। जिनका रो-रोकर बुरा हाल है।

पुलिस ने बिजली विभाग के चार अधिकारियों के खिलाफ दर्ज किया मुकदमा

घटना के बाद रंजीत के भाई अमरजीत तिवारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए बिजली विभाग के अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, उपखंड अधिकारी और अवर अभियंता के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या शिकायतों के बावजूद भी समय पर कार्रवाई न होना आम लोगों की जान के साथ खिलवाड़ नहीं है।

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