बांदा में ब्लॉक प्रमुख दीपशिखा सिंह, तत्कालीन सदर तहसीलदार राधेश्याम सिंह समेत नौ लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई तिंदवारी के जौहरपुर गांव निवासी रामजीत सिंह की शिकायत पर कोर्ट के आदेश के बाद की गई है। इन सभी पर जमीन हड़पने का आरोप है। रामजीत सिंह ने कोर्ट में दायर वाद में बताया था कि 1981 में रामशरण सिंह, इंद्रपाल सिंह और अर्जुन सिंह सहित अन्य लोगों ने उनके पिता जागेश्वर सिंह, जगनंदन सिंह, रामभरोसा सिंह और दलगंजन सिंह (पुत्रगण गया प्रसाद) के नाम साढ़े तीन बीघा जमीन का बैनामा किया था। तब से इस जमीन पर उनके परिवार का कब्जा चला आ रहा है। शिकायत के अनुसार, यह जमीन आकार पत्र 23, सीएच खाता और सीएच-11 खाते में दर्ज थी। उस समय जौहरपुर गांव में चकबंदी प्रक्रिया चल रही थी। 2013 में चकबंदी पूरी होने और धारा छह का प्रकाशन होने के बाद चकबंदी के कागजात मुहाफिस खाना में जमा हो गए। आरोप है कि इस दौरान जमीन बेचने वाले मूल मालिकों बहोरन, शेरा, अरविंद और कलावती आदि के नाम यह जमीन दोबारा दर्ज हो गई, जिसमें रामजीत के पिता द्वारा खरीदी गई जमीन भी शामिल थी। आरोप है कि बहोरन और अन्य ने इस स्थिति का फायदा उठाकर आठ अप्रैल 2024 को यह जमीन ब्लॉक प्रमुख दीपशिखा सिंह पत्नी अजय प्रताप सिंह, निवासी शांति नगर को बेच दी। दीपशिखा सिंह ने इस जमीन के नामांतरण के लिए सदर तहसील में आवेदन किया था। रामजीत सिंह का आरोप है कि मुकदमा चलने के बावजूद तत्कालीन तहसीलदार राधेश्याम सिंह ने 21 फरवरी 2025 को बिना सुनवाई किए ही इस भूमि को दीपशिखा सिंह के नाम दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया। रामजीत ने तहसीलदार पर राजनीतिक दबाव में आकर कूटनीतिक साजिश का आरोप लगाया है। इसके बाद वह 25 अप्रैल 2025 से रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए थाना और एसपी कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने ब्लॉक प्रमुख दीपशिखा सिंह, कलावती सिंह, बहोरन सिंह, शेर सिंह, सुशील सिंह, मतोला सिंह, अरविंद सिंह, विमल सिंह और तत्कालीन सदर तहसीलदार राधेश्याम सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इस मामले पर तत्कालीन तहसीलदार राधेश्याम सिंह का कहना है कि आरोप बेबुनियाद हैं और वह अपना पक्ष न्यायालय में रखेंगे। वहीं, ब्लॉक प्रमुख दीपशिखा सिंह ने इसे विरोधियों की साजिश बताया और कहा कि मामला मनगढ़ंत है।


