लाटरी कारोबारी से रिश्वत लेने का मामला:5 साल बीतने के बावजूद पुलिस नहीं कर सकी कर्मचारियों की पहचान,28 जनवरी को अगली सुनवाई

लाटरी कारोबारी से रिश्वत लेने का मामला:5 साल बीतने के बावजूद पुलिस नहीं कर सकी कर्मचारियों की पहचान,28 जनवरी को अगली सुनवाई

लाटरी कारोबारी सुभाष केट्टी से रिश्वतखोरी से जुड़े मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पांच साल बीतने के बावजूद पुलिस उन कर्मचारियों की पहचान तक नहीं कर पाई है, जो कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए वीडियो में कैद हुए थे। बार-बार चेतावनी और अदालत की तीखी टिप्पणियों के बावजूद वीडियो क्लिपों में कैद कथित पुलिस कर्मियों की पहचान अधिकारी नहीं कर रहे। अदालत ने लगाई पुलिस को कड़ी फटकार कोर्ट की सुनवाई के दौरान अदालत में विभाग का प्रतिनिधित्व करने वाले पुलिस अधिकारी बदलते रहे, लेकिन उनके बहाने वही रहे। यह मामला फिर से जांच के दायरे में आया, अब जब अदालत ने विभाग को उसकी लगातार देरी और बहाने के लिए कड़ी फटकार लगाई। लगातार नए पुलिस अधिकारी कोर्ट में हो रहे पेश अदालत में सुनवाई के दौरान थाना डिवीजन नंबर 3 के इंस्पेक्टर नरदेव सिंह और ACP सेंट्रल अनिल कुमार भनोट विशेष न्यायाधीश अमरिंदर सिंह शेरगिल की अदालत में पेश हुए। उन्होंने एक बार फिर सबूत के तौर पर पेश किए गए वीडियो क्लिप में दिख रहे पुलिस अधिकारियों की पहचान करने के लिए और समय मांगा। यह लगातार तीसरी सुनवाई थी जिसमें नए अधिकारी पेश हुए, लेकिन स्पष्टीकरण वही रहा। अदालत ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह अस्वीकार्य है कि एक पुलिस बल, जिसे अज्ञात अपराधियों की पहचान करने और गिरफ्तार करने का काम सौंपा गया है लेकिन वह अब अपने ही कर्मियों की पहचान नहीं कर पा रहे। 28 वीडियो क्लिपों में नजर आए रहे कर्मियों की जल्द पहचान करने के निर्देश न्यायाधीश ने पुलिस को 28 वीडियो क्लिप में दिख रहे अधिकारियों की पहचान जल्द से जल्द पूरी करने का निर्देश दिया। ऐसा करने में विफल रहने पर, विभाग को अपनी “अक्षमता” बताते हुए एक औपचारिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। अदालत के समक्ष पेश की गई एक स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि फुटेज में दिखाए गए व्यक्तियों की पहचान करने के लिए साइबर जांच और तकनीकी सहायता इकाइयों के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, अदालत ने स्पष्टीकरण को असंतोषजनक पाया और पंजाब के मुख्य सचिव को प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एक अलग पत्र भेजने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी
यह मामला 2019-2020 का है, जब लॉटरी व्यापारी सुभाष केट्टी ने आरोप लगाया था कि पुलिस कर्मी खुले तौर पर लॉटरी विक्रेताओं से रिश्वत ले रहे थे। केट्टी ने सबसे पहले उस समय के पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल को वीडियो सबूत सौंपे थे। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद मार्च 2020 में एक मामला दर्ज किया गया। अब तक पुलिस ने 11 अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और 10 के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। हालांकि, केट्टी का कहना है कि एक स्टिंग ऑपरेशन के दौरान 28 पुलिस कर्मियों को कैमरे में कैद किया गया था, जिससे फोर्स के भीतर चयनात्मक कार्रवाई और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठते हैं।

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