मुजफ्फरपुर कलेक्ट्रेट परिसर में आत्मदाह करने वाले बिंदालाल गुप्ता की मौत को अब 20 महीने बीत चुके हैं, लेकिन उनका परिवार आज भी न्याय और प्रशासनिक कार्रवाई के इंतजार में भटक रहा है। गुरुवार को मृतक के बेटे और अन्य परिजन एक बार फिर समाहरणालय पहुंचे और जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई। परिजनों का आरोप है कि आत्मदाह की घटना के बाद सरकार की ओर से जो जमीन आवंटित की गई थी, उस पर अब तक कब्जा नहीं मिल पाया। वहीं, आत्मदाह के लिए जिम्मेदार बताए गए नामजद आरोपियों पर भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। परिवार ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द न्याय नहीं मिला, तो वे फिर से आंदोलन करने को मजबूर होंगे। 4 जुलाई 2024 को मुजफ्फरपुर समाहरणालय परिसर में बिंदालाल गुप्ता ने पेट्रोल डालकर आत्मदाह किया था। गंभीर रूप से झुलसने के बाद उन्हें एसकेएमसीएच में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अपना बयान दर्ज कराया। कुछ दिनों बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक सवाल खड़े कर दिए थे। एफआईआर हुई, लेकिन आगे कार्रवाई शून्य मृतक की पत्नी किशोरी देवी के बयान पर 7 जुलाई 2024 को नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। एफआईआर में कांटी निवासी संजय राम, पप्पू राम और उनके बेटों को नामजद आरोपी बनाया गया था। परिवार का आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद न किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई, न जांच में तेजी आई और न ही अब तक चार्जशीट दाखिल की गई। 20 महीने बीत जाने के बाद भी केस में कोई ठोस प्रगति नहीं दिखी है। जमीन विवाद बना आत्मदाह की वजह परिजनों के अनुसार पूरा विवाद जमीन को लेकर था। आत्मदाह की घटना के बाद प्रशासन ने पीड़ित परिवार को दामोदरपुर में 3 डिसमिल जमीन आवंटित की थी। किशोरी देवी ने बताया,“हमें लगा कि अब इंसाफ मिल गया है। हमने अपनी जमा पूंजी और उधार लेकर घर बनाना शुरू किया। पिलर तक निर्माण करवा दिया, तभी एक व्यक्ति ने जमीन पर दावा कर दिया।”परिवार का कहना है कि राकेश मेहता नाम के व्यक्ति ने जमीन पर दावा करते हुए अदालत में मामला दायर कर दिया, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर निर्माण काम रोक दिया गया। निर्माण सामग्री की चोरी, कार्रवाई नहीं जमीन विवाद शुरू होने के बाद निर्माण स्थल पर रखी सीमेंट, ईंट, गिट्टी, सरिया, बालू समेत अन्य निर्माण सामग्री चोरी हो गई। परिजनों का दावा है कि इसकी कीमत लाखों रुपए थी।हालांकि, इस मामले में भी न तो कोई प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही चोरी गई सामग्री की बरामदगी हो सकी। जनता दरबार में छलका परिवार का दर्द गुरुवार को डीएम कार्यालय में आयोजित जनता दरबार के दौरान मृतक के बेटे ने कहा कि 20 महीना हो गए साहब… न जमीन मिल पाई, न न्याय। मेरे पिता ने इंसाफ के लिए जान दे दी, लेकिन आज भी हमारा मामला फाइलों में बंद है।” मृतक के पोते राजकुमार ने कहा- “सरकार ने जो जमीन दी, वह भी विवादित निकली। लाखों का नुकसान हो गया, लेकिन किसी को फर्क नहीं पड़ा। 20 महीने से चक्कर लगा रहे हैं, हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है। ”डीएम ने दिए जांच के निर्देश परिजनों की शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने डीसीएलआर को स्थल जांच का निर्देश दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कब और क्या ठोस कार्रवाई करता है।परिवार का सवाल साफ है—एक ही सरकारी जमीन कई लोगों को कैसे आवंटित कर दी गई, और आखिर न्याय कब मिलेगा? मुजफ्फरपुर कलेक्ट्रेट परिसर में आत्मदाह करने वाले बिंदालाल गुप्ता की मौत को अब 20 महीने बीत चुके हैं, लेकिन उनका परिवार आज भी न्याय और प्रशासनिक कार्रवाई के इंतजार में भटक रहा है। गुरुवार को मृतक के बेटे और अन्य परिजन एक बार फिर समाहरणालय पहुंचे और जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई। परिजनों का आरोप है कि आत्मदाह की घटना के बाद सरकार की ओर से जो जमीन आवंटित की गई थी, उस पर अब तक कब्जा नहीं मिल पाया। वहीं, आत्मदाह के लिए जिम्मेदार बताए गए नामजद आरोपियों पर भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। परिवार ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द न्याय नहीं मिला, तो वे फिर से आंदोलन करने को मजबूर होंगे। 4 जुलाई 2024 को मुजफ्फरपुर समाहरणालय परिसर में बिंदालाल गुप्ता ने पेट्रोल डालकर आत्मदाह किया था। गंभीर रूप से झुलसने के बाद उन्हें एसकेएमसीएच में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अपना बयान दर्ज कराया। कुछ दिनों बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक सवाल खड़े कर दिए थे। एफआईआर हुई, लेकिन आगे कार्रवाई शून्य मृतक की पत्नी किशोरी देवी के बयान पर 7 जुलाई 2024 को नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। एफआईआर में कांटी निवासी संजय राम, पप्पू राम और उनके बेटों को नामजद आरोपी बनाया गया था। परिवार का आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद न किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई, न जांच में तेजी आई और न ही अब तक चार्जशीट दाखिल की गई। 20 महीने बीत जाने के बाद भी केस में कोई ठोस प्रगति नहीं दिखी है। जमीन विवाद बना आत्मदाह की वजह परिजनों के अनुसार पूरा विवाद जमीन को लेकर था। आत्मदाह की घटना के बाद प्रशासन ने पीड़ित परिवार को दामोदरपुर में 3 डिसमिल जमीन आवंटित की थी। किशोरी देवी ने बताया,“हमें लगा कि अब इंसाफ मिल गया है। हमने अपनी जमा पूंजी और उधार लेकर घर बनाना शुरू किया। पिलर तक निर्माण करवा दिया, तभी एक व्यक्ति ने जमीन पर दावा कर दिया।”परिवार का कहना है कि राकेश मेहता नाम के व्यक्ति ने जमीन पर दावा करते हुए अदालत में मामला दायर कर दिया, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर निर्माण काम रोक दिया गया। निर्माण सामग्री की चोरी, कार्रवाई नहीं जमीन विवाद शुरू होने के बाद निर्माण स्थल पर रखी सीमेंट, ईंट, गिट्टी, सरिया, बालू समेत अन्य निर्माण सामग्री चोरी हो गई। परिजनों का दावा है कि इसकी कीमत लाखों रुपए थी।हालांकि, इस मामले में भी न तो कोई प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही चोरी गई सामग्री की बरामदगी हो सकी। जनता दरबार में छलका परिवार का दर्द गुरुवार को डीएम कार्यालय में आयोजित जनता दरबार के दौरान मृतक के बेटे ने कहा कि 20 महीना हो गए साहब… न जमीन मिल पाई, न न्याय। मेरे पिता ने इंसाफ के लिए जान दे दी, लेकिन आज भी हमारा मामला फाइलों में बंद है।” मृतक के पोते राजकुमार ने कहा- “सरकार ने जो जमीन दी, वह भी विवादित निकली। लाखों का नुकसान हो गया, लेकिन किसी को फर्क नहीं पड़ा। 20 महीने से चक्कर लगा रहे हैं, हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है। ”डीएम ने दिए जांच के निर्देश परिजनों की शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने डीसीएलआर को स्थल जांच का निर्देश दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कब और क्या ठोस कार्रवाई करता है।परिवार का सवाल साफ है—एक ही सरकारी जमीन कई लोगों को कैसे आवंटित कर दी गई, और आखिर न्याय कब मिलेगा?


