रंगपंचमी पर गेर के दौरान पटाखे छोड़े जाने से आठ लोगों के झुलसने की घटना में आरोपी इवेंट संचालकों पर सिर्फ जमानती धारा में पुलिस ने केस दर्ज किया। इवेंट संचालकों ने कर्मचारी के साथ बिना अनुमति के भीड़ वाली जगह पटाखे छोड़े, जिससे आठ लोगों का जीवन संकट में आ गया। पुलिस ने गंभीर हादसे में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सुरक्षा में तो बड़ी चूक की थी, आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करते हुए जमानती अपराध दर्ज किया। पुलिस ने धारा 151 में कोर्ट में पेश किया, जहां से तीनों को जेल भेजा गया। रंगपंचमी की गेर में 8 मार्च को मुख्यमंत्री डॉ. यादव जिस मंच पर थे, उससे महज 15 फीट दूर फॉयर शॉट पटाखे छोड़ने से 8 लोग झुलसे थे, इनमें से दो लोगों का इंदौर में उपचार चल रहा है। पुलिस ने पहले अज्ञात में फिर अगले ही दिन तीन ज्ञात हो गए। एसएन स्पेशल इफेक्ट वेडिंग एंट्री कंपनी संचालित करने वाले शिकारी गली निवासी मुजीब व शाहनवाज पिता मोहम्मद सलीम समेत सहयोगी कर्मचारी शरीक पिता अतीक कुरैशी निवासी हरिफाटक को हिरासत में ले लिया। एडिशनल एसपी गुरुप्रसाद पाराशर ने इस संदर्भ में बताया मामले में पता कर बता पाऊंगा। भास्कर एक्सपर्ट – वीरेंद्र शर्मा, सीनियर एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट जीवन को संकट में डाला, धारा 150 लगाना थी सीएम सिक्युरिटी को अनदेखा कर सैकड़ों लोगों की भीड़ में बिना अनुमति इवेंट वालों ने पटाखे छोड़ मानवीय जीवन संकट में डाला और 8 लोग गंभीर झुलस गए, यह गंभीर मामला है। ऐसे में गैर जमानती बीएनएस की धारा 150 में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाना चाहिए थी, जिसमें दस साल तक की सजा का प्रावधान है। इवेंट वालों को किसने बुलाया था, उन पर क्या कार्रवाई? मामले में दो इवेंट संचालक व एक कर्मचारी सहित तीन लोगों पर मामूली धारा में कार्रवाई की पर बड़ा सवाल अभी यही है कि इवेंट वालों को किस मंच, संस्था वालों ने बुलाया था। किसी लोकेश का नाम भी सामने आया था, लेकिन सिर्फ तीन पर कार्रवाई हुई। नीलगंगा पुलिस से मामले में कोई जवाब नहीं दे पाई।


