Carolina Marin Retires: पीवी सिंधु के ओलंपिक गोल्ड का सपना तोड़ने वाली कैरोलिना मारिन ने लिया संन्यास

Carolina Marin Retires: पीवी सिंधु के ओलंपिक गोल्ड का सपना तोड़ने वाली कैरोलिना मारिन ने लिया संन्यास

मारिन ने इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो में कहा, “आज मैं सीधे-सीधे बात करना चाहती हूं। प्रोफेशनल बैडमिंटन में मेरा सफर समाप्त हो गया है। इसलिए मैं हुएलवा की यूरोपियन चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं लूंगी।” 

Carolina Marin Retires: रियो ओलंपिक 2016 के महिला एकल बैडमिंटन के फाइनल में भारतीय स्टार पीवी सिंधु को हराकर उनका और करोड़ों भारतीयों के गोल्ड मेडल का सपना तोड़ने वाली स्पेन की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी कैरोलिना मारिन ने संन्यास ले लिया है। दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए बताया कि वह अपने होमटाउन, हुएलवा में होने वाली यूरोपियन चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं लेंगी। इस टूर्नामेंट में उन्हें वाइल्ड कार्ड एंट्री मिली थी।

मारिन ने इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो में कहा, “आज मैं सीधे-सीधे बात करना चाहती हूं। प्रोफेशनल बैडमिंटन में मेरा सफर समाप्त हो गया है। इसलिए मैं हुएलवा की यूरोपियन चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं लूंगी।” 31 साल की मारिन ने कहा, “मैं चाहती थी कि हम आखिरी बार कोर्ट पर मिलें, लेकिन सिर्फ आखिरी बार कोर्ट पर दिखने के लिए मैं अपने शरीर को जोखिम में नहीं डालना चाहतीं। चोटों की वजह से संन्यास का फैसला लेना पड़ा है। मैं अपने फैसले पर कायम हूं।”

मारिन को बैडमिंटन के इतिहास की सबसे सफल महिला खिलाड़ियों में से एक माना जाता है। वह तीन बार की वर्ल्ड चैंपियन और कई बार की यूरोपियन चैंपियन हैं। ओलंपिक में बैडमिंटन में गोल्ड जीतने वाली पहली स्पेनिश खिलाड़ी हैं। अपने सफर पर मारिन ने कहा, “उनका आखिरी मैच अनजाने में पेरिस ओलंपिक 2024 में हुआ, जहां घुटने की चोट लगने के बाद वह सेमी-फाइनल से हट गई थीं। मैंने उसी समय रिटायरमेंट ले लिया था, बस तब हमें इस बात का पता नहीं था।”

मारिन ने कहा, “मुझे कभी गिरने न देने के लिए, मेरे साथ खड़े रहने के लिए, और सबसे मुश्किल पलों में मेरा साथ देने के लिए आप सबका शुक्रिया। आपके बिना शर्त प्यार के लिए धन्यवाद।”

विश्व चैंपियन ने कहा, “मैं अपने जुनून को अलविदा कह रही हूं, और मुझे इस बात पर बहुत गर्व है कि मैंने जो कुछ भी हासिल किया है, वह सिर्फ खिताबों के लिए नहीं, बल्कि खेल की दुनिया में दुनिया का सम्मान पाने के लिए किया है। अब मैं एक नए रास्ते पर चलूंगी, जहां मैं कोशिश करूंगी कि मुझे जो भी समर्थन मिला है, उसे मैं वापस लौटा सकूं और खेल के मूल्यों की रक्षा करती रहूं।

उन्होंने कहा, “मैं चाहती थी कि मेरा सफर हुएलवा में ही खत्म हो, और ऐसा ही होगा। मेरे हाथ में रैकेट नहीं होगा, बल्कि मैं उसी शहर में रहूंगी जहां मेरा जन्म हुआ था, ताकि कई सालों का यह सफर पूरा हो सके। अपने करियर में जो कुछ भी हासिल कर पाई हूं उसके लिए शुक्रगुजार हूं और जिंदगी के एक नए दौर के लिए तैयार हूं।”

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