Kissing Disease Mono: हाल ही में एक नई स्टडी में एक दिलचस्प और थोड़ा चौंकाने वाला कनेक्शन सामने आया है। इसमें कहा गया है कि जिन लोगों को कभी किसिंग डिजीज हुई है, उनमें आगे चलकर मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) होने का खतरा करीब 3 गुना तक बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर किसी को यह बीमारी होगी।
क्या होती है ‘किसिंग डिजीज’?
जिसे आम भाषा में किसिंग डिजीज कहा जाता है, उसका मेडिकल नाम इन्फेक्शियस मोनोन्यूक्लिओसिस (Mono) है। यह बीमारी एक वायरस, एपस्टीन-बार वायरस (EBV) के कारण होती है। यह वायरस आमतौर पर लार (saliva) के जरिए फैलता है, जैसे किस करने से, एक ही गिलास या चम्मच इस्तेमाल करने से, या खांसने-छींकने से। दिलचस्प बात ये है कि ज्यादातर लोग अपनी जिंदगी में कभी न कभी इस वायरस से संक्रमित हो जाते हैं, लेकिन हर किसी में इसके लक्षण नहीं दिखते।
इसके लक्षण क्या होते हैं?
Mono के लक्षण अक्सर फ्लू या गले के इंफेक्शन जैसे लगते हैं, इसलिए लोग इसे हल्के में ले लेते हैं। बहुत ज्यादा थकान
बुखार, गले में दर्द, गर्दन में सूजन (लिम्फ नोड्स),कभी-कभी लिवर या प्लीहा (spleen) में सूजन, अधिकतर मामलों में यह बीमारी आराम, पानी और हल्की दवाइयों से खुद ही ठीक हो जाती है।
स्टडी में क्या नया सामने आया?
नई रिसर्च के अनुसार, जिन लोगों को Mono हुआ था, उनमें आगे चलकर MS होने का खतरा दूसरों के मुकाबले ज्यादा पाया गया। लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है कि कुल जोखिम अभी भी बहुत कम है। यानी यह सिर्फ एक रिस्क फैक्टर है, पक्की वजह नहीं।
Mono और MS का कनेक्शन क्यों?
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसका कारण इम्यून सिस्टम से जुड़ा है। EBV वायरस शरीर की B cells (इम्यून सेल्स) को प्रभावित करता है। कुछ मामलों में यह शरीर को भ्रमित कर सकता है, जिससे इम्यून सिस्टम अपने ही नर्व्स पर हमला करने लगता है। यही प्रक्रिया मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) में देखी जाती है, जिसमें दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड प्रभावित होते हैं।
क्या आपको चिंता करनी चाहिए?
आपको चिंता करनी नहीं चाहिए। क्योंकि 90-95% लोगों में EBV पाया जाता है। लेकिन MS बहुत कम लोगों में होता है। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है, बस जागरूक रहना जरूरी है।
किन लक्षणों पर ध्यान दें?
अगर आगे चलकर ये लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से सलाह लें:
- नजर कमजोर होना
- शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन
- लगातार थकान
- संतुलन बिगड़ना


