बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) से जुड़े प्रस्तावित विधेयक पर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह विधेयक देश की सुरक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है। सांसद सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार न्यायालय के फैसलों को अपनी सुविधा के अनुसार स्वीकार करती है। उनके अनुसार, जब फैसला सरकार के पक्ष में आता है तो उसे मान लिया जाता है, लेकिन जब खिलाफ होता है तो कानून बदलकर उसे निष्प्रभावी करने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने इस प्रवृत्ति पर सवाल उठाए। समकक्ष व्यवस्थित सेवा का दर्जा देने को कहा
उन्होंने बताया कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने CAPF अधिकारियों के साथ हो रहे अन्याय को समाप्त करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। न्यायालय ने उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के समकक्ष व्यवस्थित सेवा का दर्जा देने को कहा था। हालांकि, सरकार इस फैसले को लागू करने के बजाय कानून में बदलाव कर उसे कमजोर करने की कोशिश कर रही है। देश को उनकी निष्पक्षता पर पूरा भरोसा
सुधाकर सिंह ने जोर दिया कि CAPF के अधिकारी संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के माध्यम से चयनित ग्रुप ‘ए’ के अधिकारी होते हैं। उनकी क्षमता किसी भी स्तर पर IPS अधिकारियों से कम नहीं है। CAPF की भूमिका देश की सीमाओं की सुरक्षा, आतंकवाद, नक्सलवाद, आपदा प्रबंधन और चुनाव जैसे संवेदनशील कार्यों में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने आगे कहा कि चुनावों के दौरान इन बलों की तैनाती की जाती है, क्योंकि देश को उनकी निष्पक्षता पर पूरा भरोसा है। सांसद सिंह ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित विधेयक उसी भरोसे को तोड़ने वाला है। CAPF की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती
उन्होंने आशंका व्यक्त की कि यदि CAPF का नेतृत्व सीधे सरकार के नियंत्रण में आने वाले अधिकारियों के हाथ में होगा, तो उनकी निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। इससे चुनाव प्रक्रिया पर भी नकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। सांसद ने सरकार से सीधा सवाल किया कि क्या उसे अपने ही CAPF अधिकारियों पर भरोसा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विधेयक CAPF को मजबूत करने के लिए नहीं, बल्कि उस पर नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से लाया गया है। CAPF के जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी
उन्होंने पुलवामा, दंतेवाड़ा, मणिपुर और चीन सीमा जैसे उदाहरण देते हुए कहा कि हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में CAPF के जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी है, लेकिन जब उन्हें अधिकार और सम्मान देने की बात आती है, तो सरकार उन्हें कमजोर करने वाला कानून लेकर आती है। अंत में सुधाकर सिंह ने स्पष्ट कहा कि यह अन्याय है और इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में जब इंडिया गठबंधन की सरकार बनेगी, तो इस कानून को पहले ही सत्र में रद्द कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र, संविधान और देश के वीर जवानों के सम्मान की रक्षा के लिए यह लड़ाई जारी रहेगी। बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) से जुड़े प्रस्तावित विधेयक पर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह विधेयक देश की सुरक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है। सांसद सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार न्यायालय के फैसलों को अपनी सुविधा के अनुसार स्वीकार करती है। उनके अनुसार, जब फैसला सरकार के पक्ष में आता है तो उसे मान लिया जाता है, लेकिन जब खिलाफ होता है तो कानून बदलकर उसे निष्प्रभावी करने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने इस प्रवृत्ति पर सवाल उठाए। समकक्ष व्यवस्थित सेवा का दर्जा देने को कहा
उन्होंने बताया कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने CAPF अधिकारियों के साथ हो रहे अन्याय को समाप्त करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। न्यायालय ने उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के समकक्ष व्यवस्थित सेवा का दर्जा देने को कहा था। हालांकि, सरकार इस फैसले को लागू करने के बजाय कानून में बदलाव कर उसे कमजोर करने की कोशिश कर रही है। देश को उनकी निष्पक्षता पर पूरा भरोसा
सुधाकर सिंह ने जोर दिया कि CAPF के अधिकारी संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के माध्यम से चयनित ग्रुप ‘ए’ के अधिकारी होते हैं। उनकी क्षमता किसी भी स्तर पर IPS अधिकारियों से कम नहीं है। CAPF की भूमिका देश की सीमाओं की सुरक्षा, आतंकवाद, नक्सलवाद, आपदा प्रबंधन और चुनाव जैसे संवेदनशील कार्यों में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने आगे कहा कि चुनावों के दौरान इन बलों की तैनाती की जाती है, क्योंकि देश को उनकी निष्पक्षता पर पूरा भरोसा है। सांसद सिंह ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित विधेयक उसी भरोसे को तोड़ने वाला है। CAPF की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती
उन्होंने आशंका व्यक्त की कि यदि CAPF का नेतृत्व सीधे सरकार के नियंत्रण में आने वाले अधिकारियों के हाथ में होगा, तो उनकी निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। इससे चुनाव प्रक्रिया पर भी नकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। सांसद ने सरकार से सीधा सवाल किया कि क्या उसे अपने ही CAPF अधिकारियों पर भरोसा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विधेयक CAPF को मजबूत करने के लिए नहीं, बल्कि उस पर नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से लाया गया है। CAPF के जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी
उन्होंने पुलवामा, दंतेवाड़ा, मणिपुर और चीन सीमा जैसे उदाहरण देते हुए कहा कि हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में CAPF के जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी है, लेकिन जब उन्हें अधिकार और सम्मान देने की बात आती है, तो सरकार उन्हें कमजोर करने वाला कानून लेकर आती है। अंत में सुधाकर सिंह ने स्पष्ट कहा कि यह अन्याय है और इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में जब इंडिया गठबंधन की सरकार बनेगी, तो इस कानून को पहले ही सत्र में रद्द कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र, संविधान और देश के वीर जवानों के सम्मान की रक्षा के लिए यह लड़ाई जारी रहेगी।


