कारोबारी पुत्र कैरव का 10 दिन बाद भी पता नहीं:अपहरण, हनी ट्रैप या पारिवारिक विवाद; जाल उलझती जा रही, कई जगह छापेमारी

कारोबारी पुत्र कैरव का 10 दिन बाद भी पता नहीं:अपहरण, हनी ट्रैप या पारिवारिक विवाद; जाल उलझती जा रही, कई जगह छापेमारी

जमशेदपुर बिष्टुपुर के उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण की घटना को दस दिन बीत चुके हैं, लेकिन जिला पुलिस अब भी पूरी तरह अंधेरे में तीर चला रही है। रांची, हाजीपुर, पटना, नालंदा, कोडरमा सहित बिहार के दर्जनभर स्थानों पर छापेमारी के बावजूद पुलिस को कोई ठोस नतीजा नहीं मिला है। इसी बीच मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची जोन के एडीजी मनोज कौशिक भी जमशेदपुर पहुंचे। उन्होंने कैरव के परिजनों से उनके घर पर मिलकर कई पहलुओं पर जानकारी लेने की कोशिश की। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस की जांच रांची और बिहार में हाजीपुर स्थित चंदन सोनार गैंग तक भी पहुंची है। घटना में जिस ‘पुलिस’ लिखी स्कॉर्पियो (JH12A-4499) का इस्तेमाल हुआ था, उसका नंबर भी जांच में फर्जी निकला। 13 जनवरी से बंद है कैरव का मोबाइल फोन
इसके बाद पुलिस वाहन मालिक नालंदा के राजगीर निवासी राजशेखर तक पहुंची। राजशेखर हालांकि नहीं मिला, लेकिन उसकी नई स्विफ्ट कार पुलिस ने जब्त कर ली है। मालूम हो कि कैरव का मोबाइल 13 जनवरी दोपहर 1 बजे के बाद बंद हो गया था। उसी रात उनकी गाड़ी कांदरबेड़ा के पास लावारिश हालत में मिली थी। चांडिल टोल प्लाजा पर स्कॉर्पियो की तस्वीर सामने आई थी। पुलिस ने 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरे खंगाले, लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है। हनी ट्रैप एंगल की भी पुलिस कर रही है जांच
कॉल डिटेल से निकली एक जानकारी ने हनी ट्रैप की संभावना की भी जांच हो रही है। घर से निकलने से ठीक पहले कैरव के मोबाइल पर एक महिला का कॉल आया था और उससे बात करते ही वह घर से निकले थे। इसके बाद उन्हें किसी का कॉल नहीं आया। कैरव ने मुंबई में पढ़ाई की है और कारोबारी परिवार से आते हैं। पुलिस को आशंका है कि शायद किसी ने उन्हें झांसे में लिया हो। इसी वजह से पुलिस ने सोनारी थाना में एक महिला से पूछताछ भी की है। गाड़ी में मिला चेक, परिवार चुप, ‘खुद जाने’ की चर्चा तेज
लंबे समय तक कोई ठोस तथ्य हाथ न लगने से शहर में एक और चर्चा भी तेज है कि कहीं कैरव खुद किसी नाराजगी या विवाद के कारण घर छोड़कर तो नहीं चले गए? घर से 25 लाख का चेक लेकर निकलना और वही चेक बाद में गाड़ी में मिल जाना, साथ ही परिजनों का लगातार चुप रहना, ये सारी बातें इस चर्चा को भी बल दे रहा है। हालांकि न पुलिस इसकी पुष्टि कर रही है और न परिवार ही कुछ कह रहा है। जमशेदपुर बिष्टुपुर के उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण की घटना को दस दिन बीत चुके हैं, लेकिन जिला पुलिस अब भी पूरी तरह अंधेरे में तीर चला रही है। रांची, हाजीपुर, पटना, नालंदा, कोडरमा सहित बिहार के दर्जनभर स्थानों पर छापेमारी के बावजूद पुलिस को कोई ठोस नतीजा नहीं मिला है। इसी बीच मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची जोन के एडीजी मनोज कौशिक भी जमशेदपुर पहुंचे। उन्होंने कैरव के परिजनों से उनके घर पर मिलकर कई पहलुओं पर जानकारी लेने की कोशिश की। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस की जांच रांची और बिहार में हाजीपुर स्थित चंदन सोनार गैंग तक भी पहुंची है। घटना में जिस ‘पुलिस’ लिखी स्कॉर्पियो (JH12A-4499) का इस्तेमाल हुआ था, उसका नंबर भी जांच में फर्जी निकला। 13 जनवरी से बंद है कैरव का मोबाइल फोन
इसके बाद पुलिस वाहन मालिक नालंदा के राजगीर निवासी राजशेखर तक पहुंची। राजशेखर हालांकि नहीं मिला, लेकिन उसकी नई स्विफ्ट कार पुलिस ने जब्त कर ली है। मालूम हो कि कैरव का मोबाइल 13 जनवरी दोपहर 1 बजे के बाद बंद हो गया था। उसी रात उनकी गाड़ी कांदरबेड़ा के पास लावारिश हालत में मिली थी। चांडिल टोल प्लाजा पर स्कॉर्पियो की तस्वीर सामने आई थी। पुलिस ने 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरे खंगाले, लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है। हनी ट्रैप एंगल की भी पुलिस कर रही है जांच
कॉल डिटेल से निकली एक जानकारी ने हनी ट्रैप की संभावना की भी जांच हो रही है। घर से निकलने से ठीक पहले कैरव के मोबाइल पर एक महिला का कॉल आया था और उससे बात करते ही वह घर से निकले थे। इसके बाद उन्हें किसी का कॉल नहीं आया। कैरव ने मुंबई में पढ़ाई की है और कारोबारी परिवार से आते हैं। पुलिस को आशंका है कि शायद किसी ने उन्हें झांसे में लिया हो। इसी वजह से पुलिस ने सोनारी थाना में एक महिला से पूछताछ भी की है। गाड़ी में मिला चेक, परिवार चुप, ‘खुद जाने’ की चर्चा तेज
लंबे समय तक कोई ठोस तथ्य हाथ न लगने से शहर में एक और चर्चा भी तेज है कि कहीं कैरव खुद किसी नाराजगी या विवाद के कारण घर छोड़कर तो नहीं चले गए? घर से 25 लाख का चेक लेकर निकलना और वही चेक बाद में गाड़ी में मिल जाना, साथ ही परिजनों का लगातार चुप रहना, ये सारी बातें इस चर्चा को भी बल दे रहा है। हालांकि न पुलिस इसकी पुष्टि कर रही है और न परिवार ही कुछ कह रहा है।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *