धंधेबाज फरार, धंधा जारी…नालंदा के ड्रग्स माफियाओं ने दी थी नशीली सूई

धंधेबाज फरार, धंधा जारी…नालंदा के ड्रग्स माफियाओं ने दी थी नशीली सूई

भास्कर इनसाइट बहादुरपुर के कस्तूरबा नगर से गिरफ्तार नशे के धंधेबाजों को पुलिस ने पूछताछ के बाद शुक्रवार को जेल भेज दिया। पुलिस ने कस्तूरबा नगर के बाद देर रात अगमकुआं, भूतनाथ रोड और हाउसिंग कॉलोनी में भी छापेमारी की। गिरफ्तार छह धंधेबाजों अभिमन्यु, आकाश जालिम, अभय, मुंदन और दीपक से पूछताछ से पता चला कि नशे की सूई की यह खेप नालंदा के हिलसा थाना इलाके के मई गांव के ड्रग्स माफिया ब्रजेश और हरेंद्र पांडे की है। ये पटना में रहकर नशीली सूई (बुपरीनॉरफिन और एविल) का अवैध धंधा करते हैं। दोनों करीब डेढ़ साल से फरार हैं, लेकिन इनका धंधा जारी है। इससे पहले रामकृष्णानगर, अगमकुआं, बाइपास इलाके से नशे के इंजेक्शन जब्त हो चुके हैं। इन मामलों की जांच आगे बढ़ी तब पाया गया कि इन धंधेबाजों को ड्रग माफिया ब्रजेश और हरेंद्र ने ही खेप की सप्लाई की थी। सिटी एसपी पूर्वी परिचय कुमार ने कहा कि कुछ नाम सामने आए हैं। गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। छोटे धंधेबाजों को धमकाने के लिए खरीदी थी पिस्टल देर रात तक चली छापेमारी के दौरान पुलिस ने 20,080 इंजेक्शन, एक पिस्टल और नौ कारतूस जब्त किया। पूछताछ में धंधेबाजों ने बताया कि छोट धंधेबाजों को डराने-धमकाने के लिए पिस्टल और कारतूस खरीदा था। बरामद नशे की सूई। खरीदार बनकर गई पुलिस तब पकड़ाए नशे के सप्लायर गुप्त सूचना पर टीम ने कस्तूरबा नगर में एक घर में छापेमारी की। वहां से अभिमन्यु, आकाश, विकास और अभय को पकड़ा। इन लोगों ने ही बताया कि मुंदन और दीपक सूई की खेप पहुंचाते हैं। इसके बाद पुलिस खरीदार बनी और मुंदन को फोन किया। मुंदन और दीपक स्कूटी से खेप लेकर पहुंचा और पुलिस ने पकड़ लिया। मुंदन और दीपक ने पूछताछ में खुलासा किया कि दोनों ब्रजेश और हरेंद्र के लिए काम करते हैं। कैंसिल लाइसेंस पर दवा कंपनियों से मंगा रहे खेप ब्रजेश और हरेंद्र पांडेय ने दवा के कारोबार का लाइसेंस लिया था। दोनों के ठिकाने दवाओं का बिल मिला था। उस बिल के आधार पर जब दवा कंपनी से पूछताछ की गई तो पता चला कि ब्रजेश और हरेंद्र को उनके लाइसेंस पर दवा भेजी गई थी। इसके बाद ड्रग डिपार्टमेंट ने दोनों का लाइसेंस कैंसिल किया था। कैंसिल लाइसेंस पर ही दोनों अब भी नशीली सूई की खेप मंगाकर धंधा कर रहे हैं। अबतक की जांच में आया है कि दोनों हिमाचल और गुजरात की दवा कंपनियों से दवाओं की खेप मंगवाते हैं। भास्कर इनसाइट बहादुरपुर के कस्तूरबा नगर से गिरफ्तार नशे के धंधेबाजों को पुलिस ने पूछताछ के बाद शुक्रवार को जेल भेज दिया। पुलिस ने कस्तूरबा नगर के बाद देर रात अगमकुआं, भूतनाथ रोड और हाउसिंग कॉलोनी में भी छापेमारी की। गिरफ्तार छह धंधेबाजों अभिमन्यु, आकाश जालिम, अभय, मुंदन और दीपक से पूछताछ से पता चला कि नशे की सूई की यह खेप नालंदा के हिलसा थाना इलाके के मई गांव के ड्रग्स माफिया ब्रजेश और हरेंद्र पांडे की है। ये पटना में रहकर नशीली सूई (बुपरीनॉरफिन और एविल) का अवैध धंधा करते हैं। दोनों करीब डेढ़ साल से फरार हैं, लेकिन इनका धंधा जारी है। इससे पहले रामकृष्णानगर, अगमकुआं, बाइपास इलाके से नशे के इंजेक्शन जब्त हो चुके हैं। इन मामलों की जांच आगे बढ़ी तब पाया गया कि इन धंधेबाजों को ड्रग माफिया ब्रजेश और हरेंद्र ने ही खेप की सप्लाई की थी। सिटी एसपी पूर्वी परिचय कुमार ने कहा कि कुछ नाम सामने आए हैं। गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। छोटे धंधेबाजों को धमकाने के लिए खरीदी थी पिस्टल देर रात तक चली छापेमारी के दौरान पुलिस ने 20,080 इंजेक्शन, एक पिस्टल और नौ कारतूस जब्त किया। पूछताछ में धंधेबाजों ने बताया कि छोट धंधेबाजों को डराने-धमकाने के लिए पिस्टल और कारतूस खरीदा था। बरामद नशे की सूई। खरीदार बनकर गई पुलिस तब पकड़ाए नशे के सप्लायर गुप्त सूचना पर टीम ने कस्तूरबा नगर में एक घर में छापेमारी की। वहां से अभिमन्यु, आकाश, विकास और अभय को पकड़ा। इन लोगों ने ही बताया कि मुंदन और दीपक सूई की खेप पहुंचाते हैं। इसके बाद पुलिस खरीदार बनी और मुंदन को फोन किया। मुंदन और दीपक स्कूटी से खेप लेकर पहुंचा और पुलिस ने पकड़ लिया। मुंदन और दीपक ने पूछताछ में खुलासा किया कि दोनों ब्रजेश और हरेंद्र के लिए काम करते हैं। कैंसिल लाइसेंस पर दवा कंपनियों से मंगा रहे खेप ब्रजेश और हरेंद्र पांडेय ने दवा के कारोबार का लाइसेंस लिया था। दोनों के ठिकाने दवाओं का बिल मिला था। उस बिल के आधार पर जब दवा कंपनी से पूछताछ की गई तो पता चला कि ब्रजेश और हरेंद्र को उनके लाइसेंस पर दवा भेजी गई थी। इसके बाद ड्रग डिपार्टमेंट ने दोनों का लाइसेंस कैंसिल किया था। कैंसिल लाइसेंस पर ही दोनों अब भी नशीली सूई की खेप मंगाकर धंधा कर रहे हैं। अबतक की जांच में आया है कि दोनों हिमाचल और गुजरात की दवा कंपनियों से दवाओं की खेप मंगवाते हैं।  

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