कागजों में अरबों का कारोबार, हकीकत में दफ्तर गायब… करोड़ों की कर चोरी का खुलासा, तीन प्रोपराइटरों पर मुकदमा

कागजों में अरबों का कारोबार, हकीकत में दफ्तर गायब… करोड़ों की कर चोरी का खुलासा, तीन प्रोपराइटरों पर मुकदमा

बरेली। शहर में जीएसटी फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य कर विभाग की जांच में तीन ऐसी फर्में सामने आई हैं, जो कागजों में तो करोड़ों का कारोबार कर रही थीं, लेकिन जमीन पर उनका कोई अस्तित्व ही नहीं मिला। सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिए बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) पास-ऑन कर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया। मामले में थाना इज्जतनगर में एफआईआर दर्ज कराई गई है।

19 करोड़ की खरीद दिखाकर 3 करोड़ का खेल

जांच के मुताबिक एमएस जागेश्वर ट्रेडर्स (प्रो. अमन) ने वर्ष 2023-24 में 19.12 करोड़ रुपये की इनवर्ड सप्लाई दिखाई और 1.31 करोड़ रुपये की आईटीसी क्लेम कर ली। इसके बाद 17.89 करोड़ की आउटवर्ड सप्लाई दर्शाकर 68.58 लाख सीजीएसटी और 62.58 लाख एसजीएसटी की बोगस आईटीसी आगे पास-ऑन कर दी। जब विभाग ने मौके पर जांच की तो घोषित पते पर कोई कारोबार नहीं मिला। इस फर्म पर 3.06 करोड़ रुपये के कर अपवंचन का आरोप है। फर्म का पंजीयन पहले ही निरस्त किया जा चुका है।

आकाश ट्रेडर्स ने 4.63 करोड़ का फर्जीवाड़ा रचा

दूसरे मामले में एमएस आकाश ट्रेडर्स (प्रो. सोनू श्रीवास्तव) ने 21.72 करोड़ की इनवर्ड सप्लाई दिखाकर भारी आईटीसी क्लेम की। फिर 23.38 करोड़ की आउटवर्ड सप्लाई के नाम पर 90.29 लाख सीजीएसटी और 90.29 लाख एसजीएसटी की बोगस आईटीसी पास-ऑन कर दी। जांच टीम जब दिए गए पते पर पहुंची तो वहां कोई व्यापारिक गतिविधि नहीं मिली। फर्म का पंजीयन 7 अक्टूबर 2023 से सुओ-मोटो निरस्त है। इस मामले में 4.63 करोड़ रुपये के कर अपवंचन का मुकदमा दर्ज हुआ है।

गोयल इंटरप्राइजेज ने भी किया करोड़ों का पास-ऑन

तीसरे प्रकरण में एमएस गोयल इंटरप्राइजेज (प्रो. परमजीत सिंह) का नाम सामने आया। फर्म ने 1.30 करोड़ की इनवर्ड सप्लाई पर 19.97 लाख आईजीएसटी की आईटीसी क्लेम की, जबकि 14.76 करोड़ की बोगस आईजीएसटी आईटीसी अन्य फर्मों को पास-ऑन कर दी। जांच में यहां भी फर्म कागजों तक ही सीमित मिली। इस मामले में 2.85 करोड़ रुपये के कर अपवंचन का आरोप है।

सिर्फ कागजों में चला कारोबार, माल की आपूर्ति का कोई सबूत नहीं

राज्य कर विभाग की जांच में सामने आया है कि दिल्ली और अन्य राज्यों की फर्मों के साथ मिलकर सिर्फ जीएसटीआर-1 और ई-वे बिल के जरिए कागजी लेन-देन दिखाया गया। असल में माल की कोई आपूर्ति नहीं हुई। कानून की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन कर फर्जी आईटीसी क्लेम की गई और उसे आगे पास-ऑन कर दिया गया। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। फर्जी पंजीयन और बोगस आईटीसी के पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है। अन्य संबंधित फर्मों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। साफ संकेत हैं कि आने वाले दिनों में इस जीएसटी खेल से जुड़े और नाम भी उजागर हो सकते हैं।

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