Bundi : किसी के कुष्ठ रोग की बीमारी तो किसी के मां नहीं, पालनहार बन रहा मददगार

Bundi : किसी के कुष्ठ रोग की बीमारी तो किसी के मां नहीं, पालनहार बन रहा मददगार

बूंदी. किसी के कुष्ठ रोगी की बीमारी है तो किसी के मां नहीं है, पिता का देहांत हो चुका है तो कोई अनाथ है। कुछ ऐसी जिदंगी जी रहे है। जिले के करीब 17 हजार 627 बच्चों के लिए पालनहार योजना हौंसला बढ़ा रही है। उनकी पढ़ाई के साथ उनके लालन-पालन में मद़्दगार बन रही है। या यू कहें कि इन बच्चों की जिदंगी पालनहार योजना ने थाम रखी है। जिले के पांच ब्लॉक के ऐसे कई बच्चे है जो जीवन के कठिन दौर में इस योजना के सहारे आगे बढ़ रहे हैं। सरकार की यह योजना इन बच्चों के लिए सिर्फ आर्थिक मदद ही नहीं, बल्कि जीने की नई वजह और शिक्षा की राह भी दिखा रहा है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से पालनहार योजना का संचालन किया जाता है,जिसका उद्देश्य है जरूरतमंद बच्चों की मदद करना है।

यह मिलती है मदद
विभाग के अनुसार करीब 10 श्रेणी इस योजना में शामिल है। इसमें यह है कि किसी के पिता का साया नहीं है तो कहीं पर मां के निधन ने बचपन को अधूरा कर दिया है, लेकिन अब यह बच्चे प्रतिमाह मिलने वाली मदद़ से पढ़ाई और पोषण दोनों संभाल रहे है। इसमें 6 वर्ष तक के को 750 रुपए व 6 से 18 वर्ष तक के को 1500 रुपए मिलते है। जबकि अनाथ बच्चों को 6 वर्ष तक को 1500 रुपए व 6 से 18 वर्ष तक के बच्चों को 2500 रुपए दिए जाते है। कुल मिलाकर 11 हजार 175 पालनहार के 17 हजार 625 बच्चे इस योजना से लाभांवित हो रहे है।

632 बच्चों का भौतिक सत्यापन शेष
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से पालनहार योजना के लाभार्थियों का प्रतिवर्ष सत्यापन किया जाता है। इसके तहत 2025-26 में सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। विभागीय जानकारों के अनुसार 452 पालनहार के 632 बच्चों का भौतिक सत्यापन होना शेष है। विभाग की ओर से इनके सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।

इनको मिलता है लाभ
गंभीर बीमारी, आजीवन कारावास, नाताप्रथा, विकलांगता, विधवा, तलाकशुदा जैसी श्रेणियां इसमें शामिल।
पालनहार संरक्षक के लिए प्रति बच्चे 750-1500 की मासिक सहायता दी जाती। बच्चों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य निगरानी विभाग की ओर से की जाती।योजनान्तर्गत प्रतिवर्ष छात्र-छात्राओं वे आंगनबाड़ी, स्कूल, प्रवेश, प्रमाणीकरण करना आवश्यक होता है।

चल रहा भौतिक सत्यापन
पालनहार योजना के तहत हर पात्र बच्चे तक योजना को पहुंचाने का प्रयास है। जिले में 17 हजार 627 बच्चे योजना का लाभ ले रहे है। शेष बच रहे 632 बच्चों का भौतिक सत्यापन चल रहा है।
अर्पित जैन, जिला समाज कल्याण अधकारी,बूंदी

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