Union Budget 2026 West Bengal: एक फरवरी को पेश होने वाले बजट (Budget 2026) में पश्चिम बंगाल का खास ख्याल रखा जा सकता है। भाजपा ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल की सत्ता से बाहर करना चाहती है और बजट उसके लिए एक शानदार मौका है बंगाल की जनता के दिल में जगह बनाने का। राजनीतिक फायदे के लिए बजट का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। लगभग हमेशा से ऐसा किया जाता रहा है। पिछले बजट में बिहार के लिए कई घोषणाएं हुईं थीं, क्योंकि राज्य में विधानसभा चुनाव होने थे।
Bihar को मिला बहुत कुछ
बजट 2025-26 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बिहार के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की थीं। मसलन, नया मखाना बोर्ड, एक ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा और नहर परियोजना के लिए वित्तीय सहायता। इसी तरह, जुलाई 2024 के बजट में बिहार के लिए 60,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की इंफ्रास्ट्रक्चर और डेवलपमेंट परियोजनाओं की रूपरेखा पेश की गई थी। इसके अलावा, बाढ़ नियंत्रण के लिए खास तौर पर 11,500 करोड़ रुपए का भी ऐलान हुआ था। इन घोषणाओं से यह संदेश गया कि भाजपा राज्य के विकास के लिए फिक्रमंद है और हर संभव प्रयास करना चाहती है। चुनाव में इसका फायदा भी पार्टी को मिला। अब यही कोशिश बजट 2026 में पश्चिम बंगाल के लिए हो सकती है।
मिलेगा Special Package?
राजनीति के जानकारों का मानना है कि बजट 2026 पश्चिम बंगाल के रंग में रंगा हो सकता है। भले ही राज्य के लिए कोई स्पेशल पैकेज की घोषणा न हो, लेकिन ऐसे वित्तीय प्रावधान जरूर किए जा सकते हैं, जो चर्चा का केंद्र बनें। देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का हावड़ा और गुवाहाटी (कामाख्या) को जोड़ना भी बंगाल को प्रभावित करने की योजना का हिस्सा है। पीएम मोदी ने हाल ही में इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई है। इससे पहले रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ‘अमृत भारत स्टेशन’ योजना के तहत पश्चिम बंगाल के 101 स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य में रेलवे विकास के लिए 13000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं।
राजनीतिक लाभ का बजट
विपक्षी पार्टियां यह कहती आईं हैं कि भाजपा चुनावी लाभ के लिए बजट का इस्तेमाल करती है। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को भी यही लगता है। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी प्रवक्ता डॉ. प्रदीप्ता मुखर्जी का कहना है कि बजट अब वोट की राजनीति पर केंद्रित हो गया है। केंद्र सरकार अब राज्यों की वास्तविक जरूरतों के बजाए चुनावी लाभ के आधार अपर बजट आवंटित करती है। उन्होंने केंद्र द्वारा पश्चिम बंगाल की निरंतर उपेक्षा का भी आरोप लगाया। मालूम हो कि मनरेगा (अब विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025) को लेकर भी राज्य और केंद्र आमने-सामने आ चुके हैं। राज्य सरकार का कहना है कि केंद्र जानबूझकर उसका पैसा रोक रहा है, जबकि केंद्र पैसों के दुरुपयोग का हवाला देता आया है। यह मामला अदालत तक पहुंच चुका है।
केंद्र पर लगे आरोप धोएगा बजट
एक्स्पर्ट्स मानते हैं कि चुनावी मौसम में अचानक दिखाई गई उदारता से मतदाताओं के प्रभावित होने की संभावना अधिक नहीं रहती, लेकिन भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार एक प्रयास करना जरूर चाहेगी। बजट में पश्चिम बंगाल पर केंद्रित कई घोषणाओं की उम्मीद की जा सकती है। केंद्र सरकार इन घोषणाओं के जरिए ‘पक्षपात’, ‘शत्रुता’ जैसे आरोपों को गलत साबित करने की कोशिश कर सकती है। बंगाल की सत्ताधारी पार्टी और उसकी मुखिया ममता बनर्जी कई बार यह कह चुकी हैं कि केंद्र की मोदी सरकार पक्षपात करती है और चुनाव में हार का बदला राज्य से ले रही है। ऐसे में वित्तमंत्री बजट में इन आरोपों को गलत साबित करने वाले कुछ प्रावधान कर सकती हैं।
कोई कसर नहीं छोड़ेगी BJP
पश्चिम बंगाल की सत्ता तक पहुंचने का भाजपा का ख्वाब अब तक पूरा नहीं हो सका है। पिछले चुनाव में पार्टी को अपनी जीत का पूरा भरोसा था। राजनीतिक पंडित भी ममता बनर्जी की विदाई का अनुमान लगा रहे थे, लेकिन नतीजे एकदम उलट आए। ममता बनर्जी ने साफ कर दिया कि बंगाल की जनता के मन में फिलहाल वहीं हैं। ऐसे में भाजपा इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहेगी। बजट के जरिए यह दिखाने का प्रयास किया जा सकता है कि केंद्र को पश्चिम बंगाल के विकास की चिंता है। इसके अलावा, चुनाव पूर्व कुछ बड़ी घोषणाओं से भी इंकार नहीं किया जा सकता।


