सुबह करीब 3 बजे फोन की घंटी बजी… मैं गहरी नींद में था। स्क्रीन पर पुलिस का नंबर देखकर दिल घबरा गया। जैसे ही कॉल उठाया, उधर से आवाज आई आपके भाई को गोली लगी है, हॉस्पिटल में एडमिट हैं… जल्दी आइए। लेकिन किसी ने हमसे ये नहीं कहा कि मेरा भाई अब इस दुनिया में नहीं रहा। यह कहते-कहते शहीद जवान श्रीराम यादव (31) के बड़े भाई श्रीभगवान यादव की आवाज भर्रा जाती है। उनके शब्द टूटने लगते हैं। दरअसल, सोमवार की रात मोतिहारी में अपराधियों से मुठभेड़ में STF जवान श्रीराम यादव (31) शहीद हो गए। 4 साल के बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। शहीद की अंतिम यात्रा से पहले पत्नी पार्थिव शरीर से लिपटकर रोने लगी। वहीं, अंतिम यात्रा में बड़े स्तर के पुलिस अधिकारी समेत गांव के सभी लोग शामिल हुए। अंतिम यात्रा से जुड़ी तस्वीरें देखिए… जवान के घर से आई इमोशनल तस्वीरें… मां और पत्नी ने जवान को किया सैल्यूट अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी खबर… एडिशनल SHO को दी थी फोन पर धमकी बताया जाता है कि एक सप्ताह पहले मोतिहारी में पुलिस-अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इसमें एक आरोपी को पैर में गोली लगी थी। इस घटना के बाद 15 मार्च को कुंदन ठाकुर ने चकिया थाने के एडिशनल SHO गौरव कुमार को फोन कर धमकी दी थी। नेपाल के नंबर से फोन कर अपना नाम बताते हुए कहा था, ‘यह क्या चल रहा है सर… न्यूज में देखे हैं कि पुलिस अपराधी के मुठभेड़ में एक बदमाश घायल, पता है अगली न्यूज क्या होगी सर? अपराधी और पुलिस के बीच मुठभेड़ में 10 से 15 पुलिसकर्मियों की हुई मौत, अपराधी फरार। गुंडई क्या होती है, आपको और पूरे शहर को दिखा देंगे।’ इसके बाद 16 मार्च की रात चकिया थाने की पुलिस को सूचना मिली कि कुंदन और प्रियांशु दोनों उसी थाना क्षेत्र में संत तिवारी के घर पर हैं। पुलिस की टीम और STF लोकेशन पर पहुंची और बदमाशों को घेर लिया। खुद को घिरते देख कुंदन ठाकुर और प्रियांशु दुबे फोर्स पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए गोलियां चलाई। दोनों ओर से कुछ देर तक गोलीबारी होती रही। इसके बाद कुंदन और प्रियांशु की मौत हो गई। वहीं, STF जवान श्रीराम यादव शहीद हो गए। इस घटना के बाद दैनिक भास्कर की टीम जवान के घर पर पहुंची। वहां का माहौल बहुत ही गमगीन था। हर तरफ से सिर्फ रोने की चीखें सुनाई दे रही थी। अंतिम संस्कार के बाद हमारी टीम ने मृतक के बड़े भाई श्रीभगवान यादव से बात की। उसने पहले ही कहा था फोर्स कम है श्रीभगवान यादव बताते हैं, जब चकिया थाने की पुलिस घटनास्थल के लिए निकल रही थी, तब मेरे भाई ने उनलोगों को रोका था। ‘कहा था फोर्स कम है, हमें नहीं जाना चाहिए। लेकिन थाने की पुलिस जबरदस्ती सभी को लेकर चली गई।’ अगर पहले से पता था कि खतरा है तो पूरी तैयारी क्यों नहीं की गई? सबसे आगे उसे कर दिया… और गोलियां चलने लगीं वे उस खौफनाक पल को याद करते हैं, जैसे ही टीम मौके पर पहुंची, मेरे भाई को सबसे आगे कर दिया गया। अचानक अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों की आवाज से पूरा इलाका गूंज उठा। फायरिंग शुरू होते ही बाकी जवान पीछे हट गए। कुछ तो भाग गए। मेरा भाई अकेला सामने खड़ा रह गया। सीने और कमर में गोली लगी फिर भी लड़ता रहा उन्होंने आगे बताया, जब बदमाशों ने फायरिंग शुरू की तो पहली गोली श्रीराम के सीने में लगी, दूसरी कमर में लगी। सोचिए, उस हालत में भी वो पीछे नहीं हटा। वो लड़ता रहा। आखिरी सांस तक लड़ता रहा। उसने अकेले ही दोनों अपराधियों को मार गिराया, लेकिन उसे बचाने वाला कोई नहीं था। सारे पुलिसवाले एक साथ फायरिंग करते तो मेरा भाई बच सकता था। ऐसा कैसे हो सकता है कि अपराधी गोली चलाएं और पुलिस वाले मैदान छोड़कर भाग जाएं? अपराधियों के पास आधुनिक हथियार थे। 18-19 साल के लड़कों के पास कार्बाइन कैसे आ गई? उसी हथियार से मेरे भाई को गोली मारी गई। इसका मतलब साफ है कहीं न कहीं से उन्हें संरक्षण मिल रहा था। सरकार अपराधियों को बढ़ावा दे रही है भाई श्रीभगवान का गुस्सा अब सिस्टम पर है, सरकार अपराधियों का मनोबल बढ़ा रही है। पुलिस को अधिकार मिलना चाहिए कि जब मुठभेड़ हो तो अपराधियों के गोलियों का इंतजार न करे। सीधे कार्रवाई करे, लेकिन ऐसा नहीं होता है। वे मांग करते हैं कि ऐसी घटनाओं में सख्त नीति बनाई जाए। गोली लगने की जानकारी मिलते ही हम पूरे परिवार के साथ भागते हुए सीवान से मोतिहारी सदर अस्पताल पहुंचे। वहां जो देखा वो जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे। मेरा भाई स्ट्रेचर पर पड़ा था। बिल्कुल शांत, जैसे गहरी नींद में हो। लेकिन ये नींद कभी नहीं टूटने वाली थी। उसके अलग-बगल पुलिस जवान खड़े थे। जब मैंने उनलोगों से पूछा कि क्या हुआ है, तब मुझे मेरे भाई की शहीद होने की जानकारी मिली। तिरंगा भी ठुकरा दिया, दर्द इतना गहरा था जब स्पेशल टास्क फोर्स और बिहार पुलिस के अधिकारी तिरंगा लेकर पहुंचे तो घर में मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। लेकिन भाई ने तिरंगा लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, मैं तिरंगा नहीं ले सकता। मेरा भाई अकेला लड़ रहा था, बाकी सब भाग गए। यह कहते ही वे फूट-फूट कर रोने लगे। मौके पर मौजूद अधिकारी उन्हें समझाते रहे। परिवार का एक और बेटा पुलिस में है। हम एक बेटे को खो चुके हैं, अब दूसरे को कैसे भेजें? हर वक्त डर लगा रहेगा कि कहीं उसके साथ भी ऐसा न हो जाए। वो कहता था कि STF में जाकर कुछ बड़ा करेगा, जिले का नाम रोशन करेगा… हमें गर्व था उस पर… लेकिन किसे पता था कि वो तिरंगे में लिपटकर वापस आएगा… जवान की 7 साल पहले हुई थी शादी जवान की 7 साल पहले शादी हुई थी। दो बच्चे हैं, बड़ी 6 साल की बेटी अंशिका कुमारी है, छोटा 4 साल का अंश कुमार है। दोनों पिता के आने का इंतजार कर रहे हैं। सोमवार रात 10 बजे श्रीराम पत्नी से कहकर निकले थे कि रेड पर जा रहा हूं। 2.30 बजे मुठभेड़ में उनकी मौत हो गई। इसमें 2 बदमाश भी ढेर हुए हैं। पत्नी बोली- 10.30 बजे रेड पर जाने का कहकर गए थे STF जवान की पत्नी सिन्धू देवी ने भास्कर को बताया, रात में 10.30 बजे पुलिस वाले घर आए। मेरे पति से कहा कि चलो छापेमारी करनी है। मेरे पति ने कहा कि कितने लोग हैं। पुलिस वालों ने कहा कि लोग तो कम हैं, लेकिन चलना जरूरी है। उसके बाद मेरे पति ने कहा कि तुम सो जाओ हम आते हैं। 3 बजे रात में फोन आया कि आपके पति को चोट लगी है। अस्पताल आने पर पता चला कि उनकी मौत हो गई है। सुबह करीब 3 बजे फोन की घंटी बजी… मैं गहरी नींद में था। स्क्रीन पर पुलिस का नंबर देखकर दिल घबरा गया। जैसे ही कॉल उठाया, उधर से आवाज आई आपके भाई को गोली लगी है, हॉस्पिटल में एडमिट हैं… जल्दी आइए। लेकिन किसी ने हमसे ये नहीं कहा कि मेरा भाई अब इस दुनिया में नहीं रहा। यह कहते-कहते शहीद जवान श्रीराम यादव (31) के बड़े भाई श्रीभगवान यादव की आवाज भर्रा जाती है। उनके शब्द टूटने लगते हैं। दरअसल, सोमवार की रात मोतिहारी में अपराधियों से मुठभेड़ में STF जवान श्रीराम यादव (31) शहीद हो गए। 4 साल के बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। शहीद की अंतिम यात्रा से पहले पत्नी पार्थिव शरीर से लिपटकर रोने लगी। वहीं, अंतिम यात्रा में बड़े स्तर के पुलिस अधिकारी समेत गांव के सभी लोग शामिल हुए। अंतिम यात्रा से जुड़ी तस्वीरें देखिए… जवान के घर से आई इमोशनल तस्वीरें… मां और पत्नी ने जवान को किया सैल्यूट अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी खबर… एडिशनल SHO को दी थी फोन पर धमकी बताया जाता है कि एक सप्ताह पहले मोतिहारी में पुलिस-अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इसमें एक आरोपी को पैर में गोली लगी थी। इस घटना के बाद 15 मार्च को कुंदन ठाकुर ने चकिया थाने के एडिशनल SHO गौरव कुमार को फोन कर धमकी दी थी। नेपाल के नंबर से फोन कर अपना नाम बताते हुए कहा था, ‘यह क्या चल रहा है सर… न्यूज में देखे हैं कि पुलिस अपराधी के मुठभेड़ में एक बदमाश घायल, पता है अगली न्यूज क्या होगी सर? अपराधी और पुलिस के बीच मुठभेड़ में 10 से 15 पुलिसकर्मियों की हुई मौत, अपराधी फरार। गुंडई क्या होती है, आपको और पूरे शहर को दिखा देंगे।’ इसके बाद 16 मार्च की रात चकिया थाने की पुलिस को सूचना मिली कि कुंदन और प्रियांशु दोनों उसी थाना क्षेत्र में संत तिवारी के घर पर हैं। पुलिस की टीम और STF लोकेशन पर पहुंची और बदमाशों को घेर लिया। खुद को घिरते देख कुंदन ठाकुर और प्रियांशु दुबे फोर्स पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए गोलियां चलाई। दोनों ओर से कुछ देर तक गोलीबारी होती रही। इसके बाद कुंदन और प्रियांशु की मौत हो गई। वहीं, STF जवान श्रीराम यादव शहीद हो गए। इस घटना के बाद दैनिक भास्कर की टीम जवान के घर पर पहुंची। वहां का माहौल बहुत ही गमगीन था। हर तरफ से सिर्फ रोने की चीखें सुनाई दे रही थी। अंतिम संस्कार के बाद हमारी टीम ने मृतक के बड़े भाई श्रीभगवान यादव से बात की। उसने पहले ही कहा था फोर्स कम है श्रीभगवान यादव बताते हैं, जब चकिया थाने की पुलिस घटनास्थल के लिए निकल रही थी, तब मेरे भाई ने उनलोगों को रोका था। ‘कहा था फोर्स कम है, हमें नहीं जाना चाहिए। लेकिन थाने की पुलिस जबरदस्ती सभी को लेकर चली गई।’ अगर पहले से पता था कि खतरा है तो पूरी तैयारी क्यों नहीं की गई? सबसे आगे उसे कर दिया… और गोलियां चलने लगीं वे उस खौफनाक पल को याद करते हैं, जैसे ही टीम मौके पर पहुंची, मेरे भाई को सबसे आगे कर दिया गया। अचानक अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों की आवाज से पूरा इलाका गूंज उठा। फायरिंग शुरू होते ही बाकी जवान पीछे हट गए। कुछ तो भाग गए। मेरा भाई अकेला सामने खड़ा रह गया। सीने और कमर में गोली लगी फिर भी लड़ता रहा उन्होंने आगे बताया, जब बदमाशों ने फायरिंग शुरू की तो पहली गोली श्रीराम के सीने में लगी, दूसरी कमर में लगी। सोचिए, उस हालत में भी वो पीछे नहीं हटा। वो लड़ता रहा। आखिरी सांस तक लड़ता रहा। उसने अकेले ही दोनों अपराधियों को मार गिराया, लेकिन उसे बचाने वाला कोई नहीं था। सारे पुलिसवाले एक साथ फायरिंग करते तो मेरा भाई बच सकता था। ऐसा कैसे हो सकता है कि अपराधी गोली चलाएं और पुलिस वाले मैदान छोड़कर भाग जाएं? अपराधियों के पास आधुनिक हथियार थे। 18-19 साल के लड़कों के पास कार्बाइन कैसे आ गई? उसी हथियार से मेरे भाई को गोली मारी गई। इसका मतलब साफ है कहीं न कहीं से उन्हें संरक्षण मिल रहा था। सरकार अपराधियों को बढ़ावा दे रही है भाई श्रीभगवान का गुस्सा अब सिस्टम पर है, सरकार अपराधियों का मनोबल बढ़ा रही है। पुलिस को अधिकार मिलना चाहिए कि जब मुठभेड़ हो तो अपराधियों के गोलियों का इंतजार न करे। सीधे कार्रवाई करे, लेकिन ऐसा नहीं होता है। वे मांग करते हैं कि ऐसी घटनाओं में सख्त नीति बनाई जाए। गोली लगने की जानकारी मिलते ही हम पूरे परिवार के साथ भागते हुए सीवान से मोतिहारी सदर अस्पताल पहुंचे। वहां जो देखा वो जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे। मेरा भाई स्ट्रेचर पर पड़ा था। बिल्कुल शांत, जैसे गहरी नींद में हो। लेकिन ये नींद कभी नहीं टूटने वाली थी। उसके अलग-बगल पुलिस जवान खड़े थे। जब मैंने उनलोगों से पूछा कि क्या हुआ है, तब मुझे मेरे भाई की शहीद होने की जानकारी मिली। तिरंगा भी ठुकरा दिया, दर्द इतना गहरा था जब स्पेशल टास्क फोर्स और बिहार पुलिस के अधिकारी तिरंगा लेकर पहुंचे तो घर में मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। लेकिन भाई ने तिरंगा लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, मैं तिरंगा नहीं ले सकता। मेरा भाई अकेला लड़ रहा था, बाकी सब भाग गए। यह कहते ही वे फूट-फूट कर रोने लगे। मौके पर मौजूद अधिकारी उन्हें समझाते रहे। परिवार का एक और बेटा पुलिस में है। हम एक बेटे को खो चुके हैं, अब दूसरे को कैसे भेजें? हर वक्त डर लगा रहेगा कि कहीं उसके साथ भी ऐसा न हो जाए। वो कहता था कि STF में जाकर कुछ बड़ा करेगा, जिले का नाम रोशन करेगा… हमें गर्व था उस पर… लेकिन किसे पता था कि वो तिरंगे में लिपटकर वापस आएगा… जवान की 7 साल पहले हुई थी शादी जवान की 7 साल पहले शादी हुई थी। दो बच्चे हैं, बड़ी 6 साल की बेटी अंशिका कुमारी है, छोटा 4 साल का अंश कुमार है। दोनों पिता के आने का इंतजार कर रहे हैं। सोमवार रात 10 बजे श्रीराम पत्नी से कहकर निकले थे कि रेड पर जा रहा हूं। 2.30 बजे मुठभेड़ में उनकी मौत हो गई। इसमें 2 बदमाश भी ढेर हुए हैं। पत्नी बोली- 10.30 बजे रेड पर जाने का कहकर गए थे STF जवान की पत्नी सिन्धू देवी ने भास्कर को बताया, रात में 10.30 बजे पुलिस वाले घर आए। मेरे पति से कहा कि चलो छापेमारी करनी है। मेरे पति ने कहा कि कितने लोग हैं। पुलिस वालों ने कहा कि लोग तो कम हैं, लेकिन चलना जरूरी है। उसके बाद मेरे पति ने कहा कि तुम सो जाओ हम आते हैं। 3 बजे रात में फोन आया कि आपके पति को चोट लगी है। अस्पताल आने पर पता चला कि उनकी मौत हो गई है।


