Dharmendra Tribute In BAFTA Awards 2026: ब्रिटिश सिनेमा के प्रतिष्ठित सम्मान समारोह ब्रिटिश एकादमी फिल्म अवॉर्ड्स के 79वें संस्करण में इस बार एक खास पल ने भारतीय दर्शकों की आंखें नम कर दीं। लंदन के रॉयल फेस्टिवल हॉल में आयोजित समारोह के दौरान ‘इन मेमोरियम’ खंड में हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को याद किया गया। जैसे ही स्क्रीन पर उनका नाम आया, भारत में बैठे उनके प्रशंसकों के लिए वो पल गर्व और भावुकता से भरा था।
सुरों के जरिए श्रद्धांजलि (Dharmendra Tribute In BAFTA Awards 2026)
समारोह के दौरान मशहूर ब्रिटिश गायिका जेसी वेयर ने मंच संभाला और लोकप्रिय गीत ‘द वे वी वर’ पर एक इमोशनल परफॉरमेंस दी। इस मधुर धुन के साथ स्क्रीन पर उन कलाकारों की झलकियां दिखाई गईं, जिन्होंने पिछले वर्ष दुनिया को अलविदा कहा। इसी क्रम में धर्मेंद्र का नाम भी शामिल था, जिसने भारतीय फैंस को काफी इमोशनल कर दिया।
सोशल मीडिया पर उमड़ा प्यार (Dharmendra Tribute In BAFTA Awards 2026)
जैसे ही ये सीन सोशल मीडिया पर आया, भारतीय प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा कीं। कई लोगों ने लिखा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर धर्मेंद्र को याद किया जाना भारतीय सिनेमा के लिए सम्मान की बात है। दशकों तक रोमांस, एक्शन और पारिवारिक भूमिकाओं से दर्शकों का दिल जीतने वाले इस अभिनेता की विरासत को वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया जाना उनके कद को दर्शाता है।
कुछ नामों की गैरमौजूदगी पर नाराजगी
हालांकि समारोह के ‘इन मेमोरियम’ खंड को लेकर कुछ अंतरराष्ट्रीय दर्शकों ने नाराजगी भी जताई। हॉलीवुड अभिनेता एरिक डेन और जेम्स वान डर बीक के नाम शामिल न होने पर सोशल मीडिया पर सवाल उठे। कई यूजर्स ने इसे बड़ी चूक बताया। बावजूद इसके, श्रद्धांजलि खंड का भावनात्मक असर कम नहीं हुआ।
89 वर्ष की आयु में दुनिया को कहा अलविदा
धर्मेंद्र का निधन 24 नवंबर को मुंबई में हुआ था। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। वो अपने पीछे एक सफल फिल्मी विरासत छोड़ गए। उनके परिवार में पत्नी प्रकाश कौर और अभिनेत्री हेमा मालिनी के अलावा बेटे सनी देओल, बॉबी देओल और बेटी एशा देओल सहित पूरा परिवार है, जो आज भी उनकी यादों को संजोए हुए है।
गांव से ग्लैमर तक का सफर
1935 में पंजाब के लुधियाना जिले के एक गांव में जन्मे धर्मेंद्र ने 1960 में फिल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से अपने करियर की शुरुआत की। शुरुआती दौर में उन्होंने रोमांटिक भूमिकाएं निभाईं, लेकिन 1965 की फिल्म ‘हकीकत’ और फिर ‘फूल और पत्थर’ ने उन्हें स्टारडम दिलाया।
इसके बाद उन्होंने शोले, चुपके चुपके और ‘सीता और गीता’ जैसी यादगार फिल्मों में अभिनय किया। एक्शन छवि के कारण उन्हें ‘ही-मैन’ की उपाधि भी मिली। अपने बेटों के साथ यमला पगला दीवाना और अपने में उनकी मौजूदगी ने दर्शकों को पारिवारिक जुड़ाव का एहसास कराया।
मरणोपरांत मिला बड़ा सम्मान
भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत पद्म विभुषण से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी कला और लोकप्रियता की आधिकारिक स्वीकृति है।


