दुनिया भर में स्तन कैंसर महिलाओं के लिए सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बनता जा रहा है। साल 2023 में विश्वभर में करीब 23 लाख महिलाओं में स्तन कैंसर के नए मामले सामने आए और इनमें से 7.64 लाख महिलाओं की मौत हो गई। यह चौंकाने वाला खुलासा प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका द लैंसेट ऑन्कोलॉजी के मार्च 2026 अंक में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में हुआ है। खास बात यह है कि इस वैश्विक शोध में एम्स भोपाल के बायोकैमिस्ट्री विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. सुखेश मुखर्जी भी सह लेखक के रूप में शामिल रहे। अमीर देशों में पहचान ज्यादा, लेकिन मौतें कम अध्ययन में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि उच्च आय वाले देशों में स्तन कैंसर की पहचान दर सबसे अधिक है। इसका मुख्य कारण वहां बेहतर स्क्रीनिंग सुविधाएं, नियमित स्वास्थ्य जांच और जागरूकता कार्यक्रम हैं। हालांकि, इन देशों में मामलों की संख्या अधिक होने के बावजूद मृत्यु दर में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। अध्ययन के अनुसार 1990 के बाद इन देशों में स्तन कैंसर से होने वाली मृत्यु दर में लगभग 29.9 प्रतिशत की कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच, उन्नत चिकित्सा तकनीक और बेहतर उपचार सुविधाओं के कारण यह कमी संभव हो पाई है। गरीब देशों में स्वास्थ्य असमानता का असर इसके विपरीत निम्न आय वाले देशों की स्थिति चिंताजनक पाई गई है। इन देशों में स्तन कैंसर के मामले अपेक्षाकृत कम दर्ज होते हैं, लेकिन मृत्यु दर में तेजी से वृद्धि हो रही है। अध्ययन के अनुसार 1990 के बाद इन देशों में स्तन कैंसर से होने वाली मौतों में लगभग 99.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे मुख्य कारण समय पर जांच की कमी, सीमित चिकित्सा संसाधन और उपचार सुविधाओं की अनुपलब्धता है। यह आंकड़े वैश्विक स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद असमानता को भी उजागर करते हैं। अंतरराष्ट्रीय शोध में एम्स भोपाल की भागीदारी यह अध्ययन ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी 2023 के तहत किया गया है, जिसमें 1990 से 2023 तक विश्वभर में कैंसर के मामलों, मृत्यु दर और स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव का व्यापक विश्लेषण किया गया है। शोध में यह भी सामने आया है कि बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के कारण अमीर देशों में मृत्यु दर घट रही है, जबकि गरीब देशों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण मौतें तेजी से बढ़ रही हैं। अध्ययन में एम्स भोपाल के बायोकैमिस्ट्री विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. सुखेश मुखर्जी सह-लेखक के रूप में शामिल रहे। यह शोध ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी 2023 के अंतर्गत किया गया, जिसका नेतृत्व इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्युएशन (IHME) ने किया। अध्ययन के लिए विश्वभर के कैंसर रजिस्ट्रियों और स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण किया गया। इसमें 1990 से 2023 तक कैंसर के मामलों, मृत्यु दर, बीमारी के प्रचलन और इसके कारण जीवन के खोए वर्षों का आकलन किया गया। इसके साथ ही शोधकर्ताओं ने वर्ष 2050 तक स्तन कैंसर के संभावित रुझानों का भी अनुमान प्रस्तुत किया है। वैश्विक स्तर पर स्तन कैंसर का बढ़ता बोझ अध्ययन के अनुसार वर्ष 2023 में दुनिया भर में लगभग 23 लाख महिलाओं में स्तन कैंसर के नए मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में करीब 7.64 लाख महिलाओं की मौत हुई।कैंसर के कारण होने वाले स्वास्थ्य नुकसान को मापने के लिए डिसएबिलिटी एडजस्टेड लाइफ ईयर्स (DALYs) का उपयोग किया जाता है। इस अध्ययन के मुताबिक स्तन कैंसर के कारण 2023 में विश्व स्तर पर लगभग 2.41 करोड़ DALYs का नुकसान हुआ। इसका मतलब है कि इस बीमारी के कारण लाखों महिलाओं के जीवन के कई स्वस्थ वर्ष प्रभावित हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि स्तन कैंसर केवल एक चिकित्सा समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर चुनौती बन चुका है। जीवनशैली से जुड़े जोखिम भी जिम्मेदार शोध में यह भी सामने आया है कि कुछ जीवनशैली संबंधी जोखिम कारक स्तन कैंसर के बढ़ते मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अध्ययन के अनुसार अस्वास्थ्यकर आहार, तंबाकू का उपयोग और उच्च उपवास रक्त शर्करा जैसे कारक स्तन कैंसर के बोझ में उल्लेखनीय योगदान देते हैं। वर्ष 2023 में इन जोखिम कारकों के कारण कुल DALYs का लगभग 28.3 प्रतिशत हिस्सा जुड़ा पाया गया। हालांकि अध्ययन में यह भी संकेत मिला है कि तंबाकू और अत्यधिक शराब सेवन से जुड़े जोखिमों में पिछले कुछ वर्षों में कुछ कमी दर्ज की गई है। 2050 तक मृत्यु संख्या बढ़कर 13.7 लाख होने की संभावना शोध में भविष्य को लेकर भी गंभीर चेतावनी दी गई है। यदि प्रभावी स्वास्थ्य नीतियां और रोकथाम के उपाय नहीं अपनाए गए, तो आने वाले वर्षों में स्तन कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि हो सकती है। अनुमान के अनुसार वर्ष 2050 तक दुनिया भर में स्तन कैंसर के मामलों की संख्या बढ़कर लगभग 35.6 लाख तक पहुंच सकती है। वहीं मृत्यु संख्या बढ़कर करीब 13.7 लाख तक हो सकती है। यह स्थिति विश्व स्वास्थ्य संगठन की ग्लोबल ब्रेस्ट कैंसर इनिशिएटिव के उस लक्ष्य को भी प्रभावित कर सकती है, जिसमें 2040 तक स्तन कैंसर से होने वाली मृत्यु दर में हर साल 2.5 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखा है।


