जमुई में रामनवमी पर्व के अवसर पर प्रस्तावित विशाल शोभायात्रा को पुलिस प्रशासन ने रोक दिया। यह शोभायात्रा हिंदू स्वाभिमान संगठन की ओर से आयोजित की जानी थी, लेकिन अंतिम समय में अनुमति रद्द कर दी गई। संगठन के बिहार प्रांत प्रमुख नीतीश कुमार के नेतृत्व में इस आयोजन की तैयारी की जा रही थी। आयोजकों के अनुसार, उन्होंने तीन दिन पूर्व ही सौरव कुमार को आवेदन दिया था और टाउन थाना में भी इसकी सूचना दी गई थी। 26 मार्च को पुलिस द्वारा तीन फोटो जमा करने का निर्देश भी दिया गया था, जिससे उन्हें लाइसेंस जारी होने की उम्मीद थी। हालांकि, आयोजन के दिन अचानक टाउन थाना से पहुंचे कर्मियों ने लाइसेंस रद्द होने की जानकारी दी और शोभायात्रा को रोक दिया गया। इसके बाद टाउन थानाध्यक्ष अमरेंद्र कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और किसी भी प्रकार की रैली निकालने की अनुमति नहीं दी। इस कार्रवाई के बाद संगठन के नेता नीतीश कुमार ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक साजिश के तहत किया गया कदम है और इसे हिंदू भावनाओं के खिलाफ बताया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि लाइसेंस निर्गत नहीं किया जाना था, तो इसकी जानकारी पहले दी जानी चाहिए थी, न कि अंतिम समय में। एसडीओ द्वारा मांगी गई रिपोर्ट में टाउन थानाध्यक्ष अमरेंद्र कुमार ने आयोजक की कथित आपराधिक छवि का हवाला दिया था। इसी आधार पर लाइसेंस जारी नहीं किया गया और एहतियातन शोभायात्रा को रोक दिया गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी गई। कई लोगों ने इसे अनुचित बताते हुए पारदर्शिता की मांग की। फिलहाल, आयोजक पक्ष ने इस मामले को लेकर न्यायालय जाने की बात कही है। सौरव कुमार एसडीओ जमुई ने बताया कि थानाध्यक्ष जमुई के द्वारा बताया गया कि लोक शांति और विधि व्यवस्था को देखते हुए अनुशंसा नहीं दी जाती है। इसको लेकर टाउन थानाध्यक्ष अमरेंद्र कुमार के द्वारा अनुमति नहीं देने का उनसे अनुरोध किया गया था। साथ ही दूसरा कारण श्री रामकृष्ण गौशाला से एनओसी उपलब्ध नहीं कराना भी है जिस कारण लाइसेंस निर्गत नहीं की गई। जमुई में रामनवमी पर्व के अवसर पर प्रस्तावित विशाल शोभायात्रा को पुलिस प्रशासन ने रोक दिया। यह शोभायात्रा हिंदू स्वाभिमान संगठन की ओर से आयोजित की जानी थी, लेकिन अंतिम समय में अनुमति रद्द कर दी गई। संगठन के बिहार प्रांत प्रमुख नीतीश कुमार के नेतृत्व में इस आयोजन की तैयारी की जा रही थी। आयोजकों के अनुसार, उन्होंने तीन दिन पूर्व ही सौरव कुमार को आवेदन दिया था और टाउन थाना में भी इसकी सूचना दी गई थी। 26 मार्च को पुलिस द्वारा तीन फोटो जमा करने का निर्देश भी दिया गया था, जिससे उन्हें लाइसेंस जारी होने की उम्मीद थी। हालांकि, आयोजन के दिन अचानक टाउन थाना से पहुंचे कर्मियों ने लाइसेंस रद्द होने की जानकारी दी और शोभायात्रा को रोक दिया गया। इसके बाद टाउन थानाध्यक्ष अमरेंद्र कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और किसी भी प्रकार की रैली निकालने की अनुमति नहीं दी। इस कार्रवाई के बाद संगठन के नेता नीतीश कुमार ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक साजिश के तहत किया गया कदम है और इसे हिंदू भावनाओं के खिलाफ बताया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि लाइसेंस निर्गत नहीं किया जाना था, तो इसकी जानकारी पहले दी जानी चाहिए थी, न कि अंतिम समय में। एसडीओ द्वारा मांगी गई रिपोर्ट में टाउन थानाध्यक्ष अमरेंद्र कुमार ने आयोजक की कथित आपराधिक छवि का हवाला दिया था। इसी आधार पर लाइसेंस जारी नहीं किया गया और एहतियातन शोभायात्रा को रोक दिया गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी गई। कई लोगों ने इसे अनुचित बताते हुए पारदर्शिता की मांग की। फिलहाल, आयोजक पक्ष ने इस मामले को लेकर न्यायालय जाने की बात कही है। सौरव कुमार एसडीओ जमुई ने बताया कि थानाध्यक्ष जमुई के द्वारा बताया गया कि लोक शांति और विधि व्यवस्था को देखते हुए अनुशंसा नहीं दी जाती है। इसको लेकर टाउन थानाध्यक्ष अमरेंद्र कुमार के द्वारा अनुमति नहीं देने का उनसे अनुरोध किया गया था। साथ ही दूसरा कारण श्री रामकृष्ण गौशाला से एनओसी उपलब्ध नहीं कराना भी है जिस कारण लाइसेंस निर्गत नहीं की गई।


