Brain Disease Treatment: दिमाग से जुड़ी बीमारियों का इलाज अब तक काफी मुश्किल और जोखिम भरा माना जाता रहा है। आमतौर पर इसके लिए सर्जरी करनी पड़ती है, जिसमें दिमाग के अंदर इलेक्ट्रोड या डिवाइस लगाए जाते हैं। लेकिन MIT की वैज्ञानिक देबलिना सरकार ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो इस सोच को बदल सकती है। इस नई तकनीक का नाम है सर्कुलेट्रॉनिक्स (Circulatronics)।
इंजेक्शन से इलाज, बिना ऑपरेशन
सर्कुलेट्रॉनिक्स में बेहद छोटे इलेक्ट्रॉनिक चिप्स का इस्तेमाल होता है। ये चिप्स इतने सूक्ष्म होते हैं कि चावल के दाने के अरबवें हिस्से जितने छोटे माने जाते हैं। इन्हें किसी सर्जरी के बिना, सिर्फ इंजेक्शन के जरिए शरीर में डाला जाता है। इंजेक्शन लगने के बाद ये चिप्स खून के साथ पूरे शरीर में घूमते हैं।
कैसे पहुंचते हैं चिप्स दिमाग तक
जब ये माइक्रोचिप्स खून के बहाव के साथ चलते हैं, तो धीरे-धीरे दिमाग के उस हिस्से तक पहुंच जाते हैं जहां न्यूरॉन्स कमजोर या खराब हो चुके होते हैं। खास बात यह है कि ये चिप्स खुद ही उस जगह पर जाकर टिक जाते हैं, जहां इलाज की जरूरत होती है। इसमें किसी तरह की चीड़-फाड़ या ऑपरेशन नहीं करना पड़ता।
लेजर से एक्टिव होते हैं चिप्स
इन चिप्स को बाहर से, खोपड़ी के ऊपर से ही, इंफ्रारेड लेजर की मदद से एक्टिव किया जाता है। लेजर लगते ही ये चिप्स दिमाग के अंदर बहुत सटीक तरीके से इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजते हैं। इससे खराब न्यूरॉन्स को दोबारा काम करने में मदद मिल सकती है। यह प्रक्रिया पूरी तरह कंट्रोल में होती है और आसपास के स्वस्थ टिशू को नुकसान नहीं पहुंचता।
किन बीमारियों में हो सकता है फायदा
यह तकनीक अल्जाइमर, लंबे समय से चले आ रहे दर्द, ब्रेन ट्यूमर और अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज में बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। चूंकि इसमें सर्जरी नहीं होती, इसलिए बुजुर्गों और कमजोर मरीजों के लिए भी यह ज्यादा सुरक्षित विकल्प बन सकता है।
देबलिना सरकार का प्रेरणादायक सफर
देबलिना सरकार का जन्म और पालन-पोषण कोलकाता में हुआ। उन्होंने IIT धनबाद से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद वे अमेरिका गईं, जहां यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से नैनोइलेक्ट्रॉनिक्स में मास्टर्स और पीएचडी पूरी की। आज वे MIT में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और मेडिकल साइंस को नई दिशा दे रही हैं।
भविष्य के इलाज की नई उम्मीद
सर्कुलेट्रॉनिक्स जैसी तकनीक यह दिखाती है कि आने वाले समय में दिमाग की बीमारियों का इलाज ज्यादा आसान, सुरक्षित और दर्द-रहित हो सकता है। यह खोज सिर्फ मेडिकल साइंस के लिए नहीं, बल्कि लाखों मरीजों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है।


