बीआरए बिहार विश्वविद्यालय कर्मचारी का धरना:कुलपति के खिलाफ नारेबाजी की, कहा- पूरी राशि का भुगतान हो

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय कर्मचारी का धरना:कुलपति के खिलाफ नारेबाजी की, कहा- पूरी राशि का भुगतान हो

मुजफ्फरपुर में बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने कुलपति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका आरोप है कि लंबे समय से उनकी जायज मांगों की अनदेखी की जा रही है, जिससे उनमें गहरा आक्रोश है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को सहायक, लेखापाल और उच्चवर्गीय लिपिक के पदों पर पदोन्नत करने और इसकी अधिसूचना जल्द जारी करने की मांग की। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2022 से 2026 के बीच लंबित MACP (Modified Assured Career Progression) के निष्पादन, वेतन निर्धारण और भुगतान सुनिश्चित करने की भी मांग की गई। कर्मचारियों ने छठे और सातवें वेतनमान के बकाया अंतर की पूरी राशि का भुगतान करने की मांग की। उन्होंने दैनिक वेतनभोगी और संविदा पर कार्यरत कर्मियों को न्यूनतम वेतनमान के अनुसार भुगतान करने और उनकी सेवाओं को नियमित करने की भी अपील की। चुनाव कराने की भी मांग रखी धरना में शामिल कर्मियों ने व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में कार्यरत कर्मचारियों को “समान काम के बदले समान वेतन” देने और उच्च न्यायालय के निर्णय के आलोक में उनके नियमितीकरण की मांग की। उन्होंने विश्वविद्यालय के सीनेट में शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को प्रतिनिधित्व देने के लिए चुनाव कराने की भी मांग रखी। अन्य प्रमुख मांगों में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए अनुकंपा समिति की बैठक शीघ्र बुलाना, तृतीय वर्ग में प्रोन्नत चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों का वेतन निर्धारण करना, कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य बीमा/सामूहिक बीमा लागू करना और संघ कार्यालय के लिए कमरा आवंटित करना शामिल है। कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय स्तर पर गठित अलग-अलग समितियों में कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों को शामिल करने की भी मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। मुजफ्फरपुर में बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने कुलपति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका आरोप है कि लंबे समय से उनकी जायज मांगों की अनदेखी की जा रही है, जिससे उनमें गहरा आक्रोश है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को सहायक, लेखापाल और उच्चवर्गीय लिपिक के पदों पर पदोन्नत करने और इसकी अधिसूचना जल्द जारी करने की मांग की। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2022 से 2026 के बीच लंबित MACP (Modified Assured Career Progression) के निष्पादन, वेतन निर्धारण और भुगतान सुनिश्चित करने की भी मांग की गई। कर्मचारियों ने छठे और सातवें वेतनमान के बकाया अंतर की पूरी राशि का भुगतान करने की मांग की। उन्होंने दैनिक वेतनभोगी और संविदा पर कार्यरत कर्मियों को न्यूनतम वेतनमान के अनुसार भुगतान करने और उनकी सेवाओं को नियमित करने की भी अपील की। चुनाव कराने की भी मांग रखी धरना में शामिल कर्मियों ने व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में कार्यरत कर्मचारियों को “समान काम के बदले समान वेतन” देने और उच्च न्यायालय के निर्णय के आलोक में उनके नियमितीकरण की मांग की। उन्होंने विश्वविद्यालय के सीनेट में शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को प्रतिनिधित्व देने के लिए चुनाव कराने की भी मांग रखी। अन्य प्रमुख मांगों में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए अनुकंपा समिति की बैठक शीघ्र बुलाना, तृतीय वर्ग में प्रोन्नत चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों का वेतन निर्धारण करना, कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य बीमा/सामूहिक बीमा लागू करना और संघ कार्यालय के लिए कमरा आवंटित करना शामिल है। कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय स्तर पर गठित अलग-अलग समितियों में कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों को शामिल करने की भी मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।  

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