मोतिहारी में कड़ाके की ठंड के बावजूद नगर निगम और जिला प्रशासन के अलाव व्यवस्था के दावों की पोल खुल गई है। दैनिक भास्कर की टीम ने रात 9 बजे से 12 बजे तक शहर के प्रमुख चौक-चौराहों का रियलिटी चेक किया, जिसमें दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर सामने आया। टीम ने शहर के उन सात प्रमुख स्थानों को चुना, जहां हर साल नगर निगम की ओर से नियमित रूप से अलाव की व्यवस्था की जाती रही है। लेकिन इन सात जगहों में से सिर्फ एक स्थान पर ही निगम द्वारा जलता हुआ अलाव देखने को मिला। बाकी सभी जगहों पर लोग या तो खुद जुगाड़ कर आग जलाते नजर आए या फिर ठंड में ठिठुरते हुए किसी तरह रात काटने को मजबूर थे। 4-5 लकड़ियां गिराकर चली जाती है निगम की गाड़ी रियलिटी चेक की शुरुआत कचहरी चौक से की गई। यहां एक वृद्ध महिला गायत्री देवी मिली, जो उसी चौक पर सब्जी बेचती हैं और अपना ठेला ही उनका सहारा है। गायत्री देवी ने बताया कि नगर निगम की गाड़ी शाम के वक्त आती है और चार-पांच लकड़ियां गिराकर चली जाती है, जो आधे घंटे में ही खत्म हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि इतनी ठंड में अगर हम खुद से आग की व्यवस्था न करें तो जान पर बन आए। उनके मुताबिक, सर्द हवा इतनी तेज होती है कि बिना अलाव के रहना मुश्किल है। कूड़ा-कचरा इकट्ठा कर आग जलाते नजर आए लोग इसके बाद टीम बलुआ चौक पहुंची। यहां टेम्पो चालक, यात्री और राहगीर कूड़ा-कचरा इकट्ठा कर आग जलाते नजर आए। लोगों ने बताया कि हर साल निगम की ओर से लकड़ी डाली जाती थी, लेकिन इस साल न तो ढंग से लकड़ी दी जा रही है और न ही कंबल का वितरण हो रहा है। पास के दुकानदार मोहन जी ने बताया कि दो दिन पहले पांच-सात लकड़ियां डाली गई थीं, लेकिन वह भी कब खत्म हो गईं, पता ही नहीं चला। पिछले चार-पांच दिनों से कोई व्यवस्था नजर नहीं आई, इसलिए मजबूरी में खुद लकड़ी खरीदकर या कूड़ा जलाकर आग तापनी पड़ रही है। कागजों में ही दावे करता है निगम इसके बाद टीम जिले के सबसे बड़े अस्पताल, सदर अस्पताल पहुंची। अस्पताल गेट पर चाय की दुकान के पास बड़ी संख्या में लोग ठंड से बचने के लिए जमा थे। जब उनसे अलाव व्यवस्था के बारे में पूछा गया तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने कहा कि नगर निगम केवल कागजों में ही दावे करता है। हर साल यहां लकड़ी के बड़े-बड़े बोटे गिराए जाते थे, जिससे मरीजों के परिजन और यात्री रात गुजार लेते थे। इस साल कई दिनों बाद सिर्फ चार-पांच किलो लकड़ी रखी गई, जो आधे घंटे में ही जलकर खत्म हो गई। मरीजों के परिजन अब ठंड में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। अलाव की खुद से व्यवस्था कर रहे दुकानदार इसके बाद टीम बापूधाम मोतिहारी रेलवे स्टेशन पहुंची। स्टेशन के बाहर अंडा दुकानदार अमित कुमार ने बताया कि दुकान के पास जो आग जल रही है, वह उनकी खुद की व्यवस्था है। नगर निगम की ओर से इस साल कहीं भी अलाव की समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। यात्रियों और दुकानदारों को अपनी जेब से खर्च कर ठंड से बचने की कोशिश करनी पड़ रही है। टीम इसके बाद जानपुल चौक पहुंची, जहां उमा शंकर प्रसाद अपनी दुकान के सामने कुछ लोगों के साथ आग तापते मिले। उन्होंने बताया कि आज ही नगर निगम की ओर से कुछ लकड़ियां डाली गई थीं, उसी से आग जलाई गई है। लेकिन यह व्यवस्था भी अस्थायी और नाकाफी है। रिक्शा पर पतली चादर ओढ़े बैठा मिला चालक मीना बाजार में पहुंचने पर देखा गया कि आग बुझ चुकी थी। रिक्शा चालक अपनी रिक्शा पर पतली चादर ओढ़े बैठे थे। उनसे जब कंबल वितरण के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि अब तक न तो नगर निगम और न ही जिला प्रशासन की ओर से उन्हें कंबल दिया गया है। न ही ऐसी कोई व्यवस्था है, जिससे पूस की रात आसानी से काटी जा सके। रियलिटी चेक के दौरान नगर थाना की गश्ती गाड़ियां कई जगह नजर आईं। पुलिसकर्मियों ने टीम से देर रात घूमने को लेकर पूछताछ भी की, लेकिन अलाव या कंबल वितरण की व्यवस्था कहीं नजर नहीं आई। छतौनी चौक पर एक भी दिन नहीं जला अलाव आखिरी पड़ाव छतौनी चौक रहा, जहां पटना, दिल्ली समेत कई शहरों से बसें आकर रुकती हैं। यहां भी अलाव की कोई व्यवस्था नहीं थी। यात्रियों और स्थानीय लोगों ने बताया कि अब तक एक दिन भी नगर निगम की ओर से यहां अलाव नहीं जलाया गया है। मोतिहारी में कड़ाके की ठंड के बावजूद नगर निगम और जिला प्रशासन के अलाव व्यवस्था के दावों की पोल खुल गई है। दैनिक भास्कर की टीम ने रात 9 बजे से 12 बजे तक शहर के प्रमुख चौक-चौराहों का रियलिटी चेक किया, जिसमें दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर सामने आया। टीम ने शहर के उन सात प्रमुख स्थानों को चुना, जहां हर साल नगर निगम की ओर से नियमित रूप से अलाव की व्यवस्था की जाती रही है। लेकिन इन सात जगहों में से सिर्फ एक स्थान पर ही निगम द्वारा जलता हुआ अलाव देखने को मिला। बाकी सभी जगहों पर लोग या तो खुद जुगाड़ कर आग जलाते नजर आए या फिर ठंड में ठिठुरते हुए किसी तरह रात काटने को मजबूर थे। 4-5 लकड़ियां गिराकर चली जाती है निगम की गाड़ी रियलिटी चेक की शुरुआत कचहरी चौक से की गई। यहां एक वृद्ध महिला गायत्री देवी मिली, जो उसी चौक पर सब्जी बेचती हैं और अपना ठेला ही उनका सहारा है। गायत्री देवी ने बताया कि नगर निगम की गाड़ी शाम के वक्त आती है और चार-पांच लकड़ियां गिराकर चली जाती है, जो आधे घंटे में ही खत्म हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि इतनी ठंड में अगर हम खुद से आग की व्यवस्था न करें तो जान पर बन आए। उनके मुताबिक, सर्द हवा इतनी तेज होती है कि बिना अलाव के रहना मुश्किल है। कूड़ा-कचरा इकट्ठा कर आग जलाते नजर आए लोग इसके बाद टीम बलुआ चौक पहुंची। यहां टेम्पो चालक, यात्री और राहगीर कूड़ा-कचरा इकट्ठा कर आग जलाते नजर आए। लोगों ने बताया कि हर साल निगम की ओर से लकड़ी डाली जाती थी, लेकिन इस साल न तो ढंग से लकड़ी दी जा रही है और न ही कंबल का वितरण हो रहा है। पास के दुकानदार मोहन जी ने बताया कि दो दिन पहले पांच-सात लकड़ियां डाली गई थीं, लेकिन वह भी कब खत्म हो गईं, पता ही नहीं चला। पिछले चार-पांच दिनों से कोई व्यवस्था नजर नहीं आई, इसलिए मजबूरी में खुद लकड़ी खरीदकर या कूड़ा जलाकर आग तापनी पड़ रही है। कागजों में ही दावे करता है निगम इसके बाद टीम जिले के सबसे बड़े अस्पताल, सदर अस्पताल पहुंची। अस्पताल गेट पर चाय की दुकान के पास बड़ी संख्या में लोग ठंड से बचने के लिए जमा थे। जब उनसे अलाव व्यवस्था के बारे में पूछा गया तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने कहा कि नगर निगम केवल कागजों में ही दावे करता है। हर साल यहां लकड़ी के बड़े-बड़े बोटे गिराए जाते थे, जिससे मरीजों के परिजन और यात्री रात गुजार लेते थे। इस साल कई दिनों बाद सिर्फ चार-पांच किलो लकड़ी रखी गई, जो आधे घंटे में ही जलकर खत्म हो गई। मरीजों के परिजन अब ठंड में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। अलाव की खुद से व्यवस्था कर रहे दुकानदार इसके बाद टीम बापूधाम मोतिहारी रेलवे स्टेशन पहुंची। स्टेशन के बाहर अंडा दुकानदार अमित कुमार ने बताया कि दुकान के पास जो आग जल रही है, वह उनकी खुद की व्यवस्था है। नगर निगम की ओर से इस साल कहीं भी अलाव की समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। यात्रियों और दुकानदारों को अपनी जेब से खर्च कर ठंड से बचने की कोशिश करनी पड़ रही है। टीम इसके बाद जानपुल चौक पहुंची, जहां उमा शंकर प्रसाद अपनी दुकान के सामने कुछ लोगों के साथ आग तापते मिले। उन्होंने बताया कि आज ही नगर निगम की ओर से कुछ लकड़ियां डाली गई थीं, उसी से आग जलाई गई है। लेकिन यह व्यवस्था भी अस्थायी और नाकाफी है। रिक्शा पर पतली चादर ओढ़े बैठा मिला चालक मीना बाजार में पहुंचने पर देखा गया कि आग बुझ चुकी थी। रिक्शा चालक अपनी रिक्शा पर पतली चादर ओढ़े बैठे थे। उनसे जब कंबल वितरण के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि अब तक न तो नगर निगम और न ही जिला प्रशासन की ओर से उन्हें कंबल दिया गया है। न ही ऐसी कोई व्यवस्था है, जिससे पूस की रात आसानी से काटी जा सके। रियलिटी चेक के दौरान नगर थाना की गश्ती गाड़ियां कई जगह नजर आईं। पुलिसकर्मियों ने टीम से देर रात घूमने को लेकर पूछताछ भी की, लेकिन अलाव या कंबल वितरण की व्यवस्था कहीं नजर नहीं आई। छतौनी चौक पर एक भी दिन नहीं जला अलाव आखिरी पड़ाव छतौनी चौक रहा, जहां पटना, दिल्ली समेत कई शहरों से बसें आकर रुकती हैं। यहां भी अलाव की कोई व्यवस्था नहीं थी। यात्रियों और स्थानीय लोगों ने बताया कि अब तक एक दिन भी नगर निगम की ओर से यहां अलाव नहीं जलाया गया है।


