बॉलीवुड गीतकार जावेद अख़्तर पहुंचे बिहार म्यूजियम:सिनेमा से दूरी बनाने की वजह बताई, किताब उत्सव में IPS की किताब पर भी हुई चर्चा

बॉलीवुड गीतकार जावेद अख़्तर पहुंचे बिहार म्यूजियम:सिनेमा से दूरी बनाने की वजह बताई, किताब उत्सव में IPS की किताब पर भी हुई चर्चा

पटना में आयोजित ‘किताब उत्सव’ का समापन हुआ। समापन सत्र में मशहूर कवि-गीतकार जावेद अख़्तर की किताब ‘सीपियां’ के सन्दर्भ में चर्चा हुई। इस किताब में जावेद अख़्तर ने कबीर, तुलसी, रहीम, वृंद सहित अनेक कवियों द्वारा रचित चुनिंदा दोहों की सरल भाषा में व्याख्या की है। उनके अर्थों को रोज़मर्रा के जीवन से जोड़ते हुए उदाहरणों के साथ समझाया है। आजकल के गानों में कोई गहराई नहीं रही सिनेमा पर जावेद अख्तर ने कहा कि एक पेशे के तौर उन्होंने काफ़ी काम कर लिया है। आजकल की परिस्थिति उनके अनुकूल नहीं है इसलिए भी वो फ़िल्मों से दूरी बना लेते हैं। 90 के दशक में फूहड़ता का दौर चल पड़ा इसलिए उन्होंने कई फिल्में छोड़ीं। आजकल के गानों में कोई गहराई नहीं रही। आजकल भी अच्छा लिखने वाले लोग हैं लेकिन उस तरह का माहौल नहीं है। आजकल रफ़्तार बढ़ी है लेकिन गहराई कम हो गई है। जावेद अख़्तर ने आज बिहार संग्रहालय का दौरा किया जावेद अख़्तर ने आज बिहार संग्रहालय का दौरा किया। उन्होंने मौजूद पुरातात्विक अवशेषों के विशाल भंडार को देखकर कहा कि जब भी मैं किसी देश या राज्य में जाता हूं, तो वहां मौजूद संग्रहालय में जरूर जाता है। संग्रहालय में मौजूद अवशेषों से उस जगह के इतिहास, समाज, संस्कृति, लोग आदि के बारे में पता चलता है। मैं लंदन, यूरोप, इंडोनेशिया, मिख आदि अब तक दुनिया के कई सारे संग्रहालयों का भ्रमण कर चुका हूं, लेकिन पुरातात्विक अवशेषों का जितना विशाल और विस्तृत भंडार बिहार संग्रहालय में देखने को मिला है, उतना कहीं नहीं देखा। यहां आने से पहले मुझे इस बात का बिल्कुल भी आइडिया नहीं था कि पटना में इतना खूबसूरत संग्रहालय भी है। आईपीएस अधिकारी सुशील कुमार ने अपनी किताब पर की चर्चा इसके अलावा आज दूसरे सत्र में आईपीएस अधिकारी सुशील कुमार की किताब ‘साइबर कथाएं : डिजिटल सुरक्षा की राह’ विषय पर केंद्रित परिचर्चा हुई। सुशील कुमार ने कहा कि ये किताब कई मायनों में ज़रूरत बन चुकी है। क्योंकि अब यह सिर्फ़ साइबर सिक्यॉरिटी का मामला नहीं है बल्कि एक सामाजिक मुद्दा बन चुका है। किताब की प्रेरणा के सवाल पर उन्होंने कहा कि साइबर विभाग में काम करने के अपने अनुभवों से महसूस हुआ कि साइबर अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक करना बहुत ज़रूरी है। इस किताब में साइबर अपराध और इससे बचने के तरीकों पर कहानियों के जरिए चर्चा की गई है। इसमें वैज्ञानिक पहलुओं के बजाय व्यावहारिक पहलुओं पर ज्यादा ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि समय से पहले और उम्मीद से ज्यादा पैसों के लालच ने ऐसी घटनाओं को जन्म दिया है। इन्फ्लूएंसर बनने की होड़ ने एक ऐसा समाज तैयार किया है जहां लोग जल्दी अमीर बनना चाहते हैं। वर्तमान में साइबर अपराधियों द्वारा लोग हजारों तरीकों से ठगे जा रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट और ठगी जैसे अपराध डर और लालच की वजह से पांव पसार रहे हैं। पटना में आयोजित ‘किताब उत्सव’ का समापन हुआ। समापन सत्र में मशहूर कवि-गीतकार जावेद अख़्तर की किताब ‘सीपियां’ के सन्दर्भ में चर्चा हुई। इस किताब में जावेद अख़्तर ने कबीर, तुलसी, रहीम, वृंद सहित अनेक कवियों द्वारा रचित चुनिंदा दोहों की सरल भाषा में व्याख्या की है। उनके अर्थों को रोज़मर्रा के जीवन से जोड़ते हुए उदाहरणों के साथ समझाया है। आजकल के गानों में कोई गहराई नहीं रही सिनेमा पर जावेद अख्तर ने कहा कि एक पेशे के तौर उन्होंने काफ़ी काम कर लिया है। आजकल की परिस्थिति उनके अनुकूल नहीं है इसलिए भी वो फ़िल्मों से दूरी बना लेते हैं। 90 के दशक में फूहड़ता का दौर चल पड़ा इसलिए उन्होंने कई फिल्में छोड़ीं। आजकल के गानों में कोई गहराई नहीं रही। आजकल भी अच्छा लिखने वाले लोग हैं लेकिन उस तरह का माहौल नहीं है। आजकल रफ़्तार बढ़ी है लेकिन गहराई कम हो गई है। जावेद अख़्तर ने आज बिहार संग्रहालय का दौरा किया जावेद अख़्तर ने आज बिहार संग्रहालय का दौरा किया। उन्होंने मौजूद पुरातात्विक अवशेषों के विशाल भंडार को देखकर कहा कि जब भी मैं किसी देश या राज्य में जाता हूं, तो वहां मौजूद संग्रहालय में जरूर जाता है। संग्रहालय में मौजूद अवशेषों से उस जगह के इतिहास, समाज, संस्कृति, लोग आदि के बारे में पता चलता है। मैं लंदन, यूरोप, इंडोनेशिया, मिख आदि अब तक दुनिया के कई सारे संग्रहालयों का भ्रमण कर चुका हूं, लेकिन पुरातात्विक अवशेषों का जितना विशाल और विस्तृत भंडार बिहार संग्रहालय में देखने को मिला है, उतना कहीं नहीं देखा। यहां आने से पहले मुझे इस बात का बिल्कुल भी आइडिया नहीं था कि पटना में इतना खूबसूरत संग्रहालय भी है। आईपीएस अधिकारी सुशील कुमार ने अपनी किताब पर की चर्चा इसके अलावा आज दूसरे सत्र में आईपीएस अधिकारी सुशील कुमार की किताब ‘साइबर कथाएं : डिजिटल सुरक्षा की राह’ विषय पर केंद्रित परिचर्चा हुई। सुशील कुमार ने कहा कि ये किताब कई मायनों में ज़रूरत बन चुकी है। क्योंकि अब यह सिर्फ़ साइबर सिक्यॉरिटी का मामला नहीं है बल्कि एक सामाजिक मुद्दा बन चुका है। किताब की प्रेरणा के सवाल पर उन्होंने कहा कि साइबर विभाग में काम करने के अपने अनुभवों से महसूस हुआ कि साइबर अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक करना बहुत ज़रूरी है। इस किताब में साइबर अपराध और इससे बचने के तरीकों पर कहानियों के जरिए चर्चा की गई है। इसमें वैज्ञानिक पहलुओं के बजाय व्यावहारिक पहलुओं पर ज्यादा ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि समय से पहले और उम्मीद से ज्यादा पैसों के लालच ने ऐसी घटनाओं को जन्म दिया है। इन्फ्लूएंसर बनने की होड़ ने एक ऐसा समाज तैयार किया है जहां लोग जल्दी अमीर बनना चाहते हैं। वर्तमान में साइबर अपराधियों द्वारा लोग हजारों तरीकों से ठगे जा रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट और ठगी जैसे अपराध डर और लालच की वजह से पांव पसार रहे हैं।  

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