राजस्थान के रामगढ़ क्षेत्र स्थित ओडेला पत्थर खदान में हुए हादसे में बक्सर के राजडीहा गांव निवासी रामानंद तिवारी (25) का शव नौ दिन बाद बरामद कर लिया गया है। उनका शव पानी से भरी खाई से निकाला गया। यह हादसा 6 फरवरी को हुआ था, जब खदान में हेवी ब्लास्टिंग के दौरान करीब 50 हजार टन पत्थर खिसककर पोकलेन मशीन पर गिर गया। उस समय रामानंद तिवारी मशीन चला रहे थे और हादसे के साथ ही लगभग 100 फीट गहरी पानी से भरी खाई में समा गए थे। पोकलेन मशीन को चार दिन बाद पानी से बाहर निकाला हादसे के चार दिन बाद प्रशासन ने पोकलेन मशीन को पानी से बाहर निकाल लिया था, लेकिन ऑपरेटर रामानंद तिवारी का पता नहीं चल पाया था। इसके बाद रामगढ़ प्रशासन ने बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया। खोजबीन के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और निजी गोताखोरों को भी बुलाया गया। लगातार प्रयासों के बावजूद सफलता न मिलने पर खाई से पानी निकालने के लिए बड़े मोटरों का उपयोग किया गया। बड़े पत्थरों के बीच शव फंसा हुआ मिला बचाव दल को एक दिन पहले पानी में युवक का जूता मिला था, जिसके बाद तलाशी अभियान तेज कर दिया गया। जब लगभग 15 फीट पानी निकाला जा चुका था, तब बड़े पत्थरों के बीच रामानंद तिवारी का शव फंसा हुआ मिला। पोकलेन की मदद से शव को बाहर निकाला गया और तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। शव को डी-फ्रीजर एंबुलेंस से भेजा जाएगा घर शव बरामद होने की सूचना बक्सर के राजडीहा गांव पहुंचते ही परिवार में दुख का माहौल छा गया। ग्रामीणों के अनुसार, रामानंद तिवारी अपने तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। परिजनों ने उचित मुआवजे की मांग की है। अरवल के SDM बाबूलाल वर्मा ने बताया कि प्रशासन ने बचाव अभियान पूरी निष्ठा के साथ चलाया और नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि शव को डी-फ्रीजर एंबुलेंस के माध्यम से मृतक के गृह राज्य भेजा जाएगा। संभावना है कि शव शनिवार तक बक्सर पहुंच जाएगा, जहां उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा। राजस्थान के रामगढ़ क्षेत्र स्थित ओडेला पत्थर खदान में हुए हादसे में बक्सर के राजडीहा गांव निवासी रामानंद तिवारी (25) का शव नौ दिन बाद बरामद कर लिया गया है। उनका शव पानी से भरी खाई से निकाला गया। यह हादसा 6 फरवरी को हुआ था, जब खदान में हेवी ब्लास्टिंग के दौरान करीब 50 हजार टन पत्थर खिसककर पोकलेन मशीन पर गिर गया। उस समय रामानंद तिवारी मशीन चला रहे थे और हादसे के साथ ही लगभग 100 फीट गहरी पानी से भरी खाई में समा गए थे। पोकलेन मशीन को चार दिन बाद पानी से बाहर निकाला हादसे के चार दिन बाद प्रशासन ने पोकलेन मशीन को पानी से बाहर निकाल लिया था, लेकिन ऑपरेटर रामानंद तिवारी का पता नहीं चल पाया था। इसके बाद रामगढ़ प्रशासन ने बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया। खोजबीन के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और निजी गोताखोरों को भी बुलाया गया। लगातार प्रयासों के बावजूद सफलता न मिलने पर खाई से पानी निकालने के लिए बड़े मोटरों का उपयोग किया गया। बड़े पत्थरों के बीच शव फंसा हुआ मिला बचाव दल को एक दिन पहले पानी में युवक का जूता मिला था, जिसके बाद तलाशी अभियान तेज कर दिया गया। जब लगभग 15 फीट पानी निकाला जा चुका था, तब बड़े पत्थरों के बीच रामानंद तिवारी का शव फंसा हुआ मिला। पोकलेन की मदद से शव को बाहर निकाला गया और तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। शव को डी-फ्रीजर एंबुलेंस से भेजा जाएगा घर शव बरामद होने की सूचना बक्सर के राजडीहा गांव पहुंचते ही परिवार में दुख का माहौल छा गया। ग्रामीणों के अनुसार, रामानंद तिवारी अपने तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। परिजनों ने उचित मुआवजे की मांग की है। अरवल के SDM बाबूलाल वर्मा ने बताया कि प्रशासन ने बचाव अभियान पूरी निष्ठा के साथ चलाया और नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि शव को डी-फ्रीजर एंबुलेंस के माध्यम से मृतक के गृह राज्य भेजा जाएगा। संभावना है कि शव शनिवार तक बक्सर पहुंच जाएगा, जहां उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा।


