Blood Type and Heart Attack Risk : इन 3 ब्लड ग्रुप वालों में हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर का अधिक खतरा! सिर्फ एक ग्रुप वाले सबसे सेफ

Blood Type and Heart Attack Risk : इन 3 ब्लड ग्रुप वालों में हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर का अधिक खतरा! सिर्फ एक ग्रुप वाले सबसे सेफ

Blood Type and Heart Attack Risk Chart: हार्ट अटैक या दिल की बीमारी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके लिए सिर्फ आपकी खराब लाइफस्टाइल जिम्मेदार नहीं है। बल्कि, कुछ बल्ड ग्रुप वालों को भी हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर का खतरा अधिक होता है। 2012 में आर्टेरियोस्क्लेरोसिस (Arteriosclerosis) में प्रकाशित अध्ययन में ये बात सामने आई। चलिए, हम समझते हैं कि किस ब्लड ग्रुप वालों को हार्ट से जुड़ी समस्याओं (Blood type and heart disease) का खतरा अधिक होता है और किसे कम।

सबसे सुरक्षित ओ (O) ब्लड ग्रुप

अध्ययन में पाया गया है कि ‘O’ ब्लड ग्रुप वाले व्यक्तियों में अन्य ब्लड ग्रुप (A, B, और AB) की तुलना में हृदय रोगों (Cardiovascular diseases) का खतरा बेहद कम होता है। इस हिसाब से ‘ओ’ रक्त समूह को दिल के लिए एक तरह से सबसे सुरक्षित माना गया है। अगर आप इस ग्रुप से आते हैं तो आप दिल की बीमारी से काफी हद तक सुरक्षित हैं।

किन ब्लड ग्रुप्स को हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर अधिक खतरा?

स्टडी में वैज्ञानिकों का दावा है कि A, B, और AB ब्लड ग्रुप के लोगों में कोरोनरी हार्ट डिजीज और हार्ट फेलियर का जोखिम अधिक होता है। ‘ओ’ ग्रुप की तुलना में ‘नॉन ओ’ ग्रुप जैसे- (A, B, AB) ग्रुप के लोगों में हृदय रोग विकसित होने का खतरा लगभग 6% से 23% तक अधिक पाया गया है।

स्ट्रोक का खतरा इन ब्लड ग्रुप में अधिक

Blood Type and Heart Attack Risk Chart

शोध के अनुसार, ‘ए’ ब्लड ग्रुप वाले लोगों में 60 साल की उम्र से पहले स्ट्रोक होने की संभावना अधिक होती है। वहीं, ‘AB’ ग्रुप में स्ट्रोक का जोखिम ‘O’ के मुकाबले 1.6 से 7 गुना तक ज्यादा हो सकता है।

जोखिम अधिक होने का कारण समझिए

वैज्ञानिकों का मानना है कि ‘ओ’ के अलावा अन्य ब्लड ग्रुप्स में जोखिम अधिक होने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं:

पहला कारण- थक्के जमने वाले कारक (Clotting Factors) के आधार पर बताया गया है कि ‘Non-O’ रक्त समूहों में ‘फैक्टर VIII’ और ‘वॉन विलेब्रैंड फैक्टर’ (von Willebrand factor) जैसे प्रोटीन अधिक मात्रा में होते हैं, जिससे रक्त के हानिकारक थक्के जमने की संभावना बढ़ जाती है।

दूसरा कारण- सूजन (Inflammation) के आधार पर बताया गया है कि इन ब्लड ग्रुप्स में इन्फ्लेमेटरी मार्कर्स का स्तर भी अधिक होता है, जो लंबे समय में धमनियों में रुकावट और हृदय रोगों का कारण बन सकता है।

इन दोनों कारणों के आधार पर ही ये तय किया गया है कि किस ब्लड समूह वाले को कितना खतरा है। हालांकि, ओ ग्रुप वाले ये बिल्कुल ना सोचें कि उनको इस तरह की दिक्कत नहीं हो सकती है। क्योंकि, कोरोनरी हार्ट डिजीज और हार्ट फेलियर का जोखिम अन्य कारणों से भी हो सकता है। इसलिए, समय पर जांच और हेल्दी लाइफस्टाइल सबके लिए जरूरी है।

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