यूपी में भाजपा का क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ा:पूर्वांचल में गोरखपुर और काशी क्षेत्र का दबदबा बढ़ा, अवध-पश्चिम कमजोर

यूपी में भाजपा का क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ा:पूर्वांचल में गोरखपुर और काशी क्षेत्र का दबदबा बढ़ा, अवध-पश्चिम कमजोर

यूपी की भाजपा सरकार और संगठन में क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ गया है। सरकार और संगठन में प्रमुख पदों पर पूर्वांचल के काशी और गोरखपुर क्षेत्र का दबदबा बढ़ गया है। वहीं, अवध और पश्चिम क्षेत्र सबसे कमजोर हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव के चलते भाजपा को क्षेत्रीय संतुलन ठीक करना होगा। क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ा रहा तो इसका असर चुनाव नतीजों पर देखने को मिल सकता है। पढ़िए ये रिपोर्ट… हमेशा भाजपा का फोकस क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर रहता है। पार्टी की ओर से अक्सर संतुलन बैठाने की कोशिश की जाती है। लेकिन, इस बार सीएम योगी और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी दोनों गोरखपुर जिले के ही हैं। वहीं, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी पूर्वांचल के काशी क्षेत्र से हैं। पार्टी संगठन में भी बड़ी संख्या में पदाधिकारी पूर्वांचल से ही हैं। जबकि, पश्चिम और अवध को संगठन में भी तरजीह नहीं दी गई है। एक-एक जिले से तीन-तीन पदाधिकारी
भाजपा की प्रदेश टीम में एक-एक जिले से तीन-तीन पदाधिकारी हैं। पदाधिकारियों ने बड़ी चतुराई से अपना गृह जिला बदलकर अब लखनऊ कर लिया है। प्रदेश उपाध्यक्ष त्रयंबक त्रिपाठी, उपाध्यक्ष संतोष सिंह और महामंत्री सुभाष यदुवंश संतकबीर नगर जिले से हैं। वहीं, उपाध्यक्ष सलिल विश्नोई, मानवेंद्र सिंह और कमलावती सिंह और देवेश कोरी भी कानपुर जिले से ही हैं। संगठन में भी अवध और पश्चिम पीछे
भाजपा की 45 सदस्यीय प्रदेश टीम में एक प्रदेश अध्यक्ष, एक महामंत्री संगठन, 7 महामंत्री, 18 उपाध्यक्ष और 16 मंत्री हैं। इनमें से 5 प्रदेश उपाध्यक्ष, 7 में से 4 महामंत्री, 5 मंत्री पूर्वांचल से ही हैं। पश्चिम से एक भी प्रदेश महामंत्री नहीं है। लेकिन, 5 उपाध्यक्ष और तीन प्रदेश मंत्री हैं। ब्रज से तीन प्रदेश मंत्री, एक महामंत्री, एक उपाध्यक्ष है। अवध से चार मंत्री, एक महामंत्री हैं, उपाध्यक्ष एक भी नहीं है। कानपुर से एक मंत्री और 4 प्रदेश उपाध्यक्ष हैं, लेकिन एक भी महामंत्री नहीं हैं। नई लीडरशिप तैयार नहीं होती है
राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र नाथ भट्‌ट कहते हैं- इन दिनों भाजपा में पूर्वांचल का प्रभाव ज्यादा है, जबकि अवध ने सबसे अधिक सीटें जीतकर दी हैं। क्षेत्रीय संतुलन नहीं बनाने से संगठन या सरकार में जो क्षेत्र पिछड़ा रह जाता है, वहांं नई लीडरशिप तैयार नहीं होती है। UGC की छाया दिखेगी
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि UGC के नए नियमों पर भले ही सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। लेकिन यह मुद्दा ठंडा नहीं हुआ है। आने वाले समय में भाजपा की नई टीम के गठन और मंत्रिमंडल विस्तार में इसकी छाया देखने को मिलेगी। भाजपा की टीम में ब्राह्मण और ठाकुरों को पहले से कुछ ज्यादा अहमियत मिलेगी। खासतौर पर यूपी में ब्राह्मणों की नाराजगी का मुद्दा छाया हुआ है। भाजपा उसे नियंत्रित करने के लिए कुछ ब्राह्मण चेहरों को अधिक मौका दे सकती है। 2014 से पहले प्रदेश टीम में ब्राह्मण, ठाकुर और वैश्य ज्यादा जगह पाते थे। लेकिन, उसके बाद लगातार अगड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व कम होता गया। वरिष्ठ पत्रकार आनंद राय कहते हैं- पूर्वांचल में भाजपा को बड़ा झटका लगा था। लोकसभा चुनाव में भी भाजपा पूर्वांचल की कई सीटें हार गई थी। इसलिए पूर्वांचल में ज्यादा काम कर रही। वहां के नेताओं को ज्यादा आगे बढ़ाया जा रहा। इतनी बड़ी पार्टी है, लेकिन मंत्रिमंडल और प्रदेश टीम में लिमिटेड सीट हैं। इसलिए सभी जिलों को नेतृत्व मिलना संभव भी नहीं होता। क्षेत्रीय संतुलन बनाने की तैयारी
भाजपा के एक पदाधिकारी ने बताया कि आने वाले दिनों में संगठनात्मक बदलाव होना है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम का गठन होगा। साथ ही सभी 6 क्षेत्रों के क्षेत्रीय अध्यक्ष भी बदले जाएंगे। पार्टी को क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ने का आभास हो गया है। पार्टी के नेता भी मानते हैं कि 2024 में भाजपा की हार में यह भी एक वजह रही। इसके चलते आगामी संगठनात्मक बदलाव में प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व क्षेत्रीय संतुलन बनाने की कोशिश करेगा। जिससे पदाधिकारियों की नाराजगी दूर हो। ———————– ये खबर भी पढ़ें… खतरे में BJP युवा मोर्चा नेताओं की दावेदारी, भाजपा उम्र के नए नियम ला रही, UP के ज्यादातर दावेदार 35 साल आयु से ज्यादा भारतीय जनता युवा मोर्चा में प्रदेश अध्यक्ष पद के दावेदारों में उम्र का पेंच फंस गया है। पार्टी 32 से 35 वर्ष की आयु के युवा को ही युवा मोर्चा की कमान सौंपने की तैयारी कर रही है। ऐसे में यूपी में युवा मोर्चा अध्यक्ष पद के नेताओं की दावेदारी खतरे में पड़ सकती है। पढ़ें पूरी खबर

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