राज्यसभा के लिए चुने गए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 मार्च तक इस्तीफा देंगे। यह संवैधानिक प्रक्रिया या बाध्यता भी है। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार विधानपरिषद से इस्तीफा देंगे। इसके साथ ही नई सरकार के गठन को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। इन सबके बीच पूर्व सांसद और बाहुबली आनंद मोहन ने नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले पर ऐतराज जताया है। पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, फैसला चाहे नीतीश कुमार का ही क्यों ना हो, बिहार के लाखों लोग इस फैसले से आहत हैं और असहमत हैं। इससे जदयू को नुकसान तो होगा ही, लेकिन उससे ज्यादा नुकसान बीजेपी को होगा। पूर्व सांसद ने निशांत को फुल फ्लेज्ड पावर देने की वकालत करते हुए कहा, फैसले से लोगों में गुस्सा है। लव-कुश का समीकरण बिगड़ा है और इसका फायदा विपक्ष को होगा। इधर, पटना के वीरचंद पटेल रोड पर पोस्टर लगे हैं। जिसमें लिखा गया- बिहार छोड़कर न जाएं मुख्यमंत्री। जानिए नीतीश कुमार के दिल्ली जाने को लेकर किस तरह से राजनीति गर्म है। और क्या-क्या बयानबाजी हो रही है। शाह का नाम लिए बिना हमला बिहार के नए मुख्यमंत्री के सवाल पर आनंद मोहन ने कहा, नीतीश कुमार की जगह बिहार में कोन सीएम बनेगा, यह फैसला तो शीर्ष नेतृत्व वाले नेताओं को लेना है। लेकिन, पिछले चुनाव में जनता ने 2025 से 30, फिर से नीतीश के नारे पर मैंडेट दिया था। इस विश्वास को ठेस पहुंचेगा तो परिणाम अच्छे नहीं होंगे। पूर्व सांसद ने अमित शाह का नाम लिए बिना चाणक्य बोलकर कहा, जो रणनीतिकार, मंत्रणाकार यह समझते हैं कि इससे लाभ होगा तो वे गलत सोच रहे हैं। इसका नुकसान जेडीयू को उठाना पड़ेगा, बीजेपी को ज्यादा झेलना पड़ेगा। बैठे बिठाए इसका लाभ विपक्षी दलों को मिलेगा। आनंद मोहन बोले- उपमुख्यमंत्री मतलब चुप- मुख्यमंत्री पूर्व सांसद ने कहा, निशांत कुमार को लाया जाना नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के फैसले के लिए शॉक एब्जॉर्वर जैसा है। उनके आने से कुछ उम्मीद बढ़ी है लेकिन, उन्हें लाना है तो एनडीए फुल फ्लेज्ड लेकर आए। उप मुख्यमंत्री का मतलब चुप मुख्यमंत्री होता है। नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा से माहौल कुछ संतुलित हुआ है। लेकिन, इस पर ठंडे दिमाग से इस पर बैठकर विचार किया जाना चाहिए। नई सरकार के गठन की चर्चा के बीच नीतीश एक्टिव
नीतीश कुमार की विधानपरिषद से इस्तीफा की सामने आई तारीख ने नई सरकार के गठन की भी चर्चा कराई। नई सरकार बनने की तारीख को लेकर कई तर्क आ रहे। एक मसला खरमास का है, जो 14 अप्रैल तक है। हालांकि इसकी काट में में ये कहा जा रहा हैकि इस खरमास में सिवाय शादी के कमोबेश तमाम शुभ काम होते हैं। इधर, भाजपा के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े शुक्रवार को यहां पहुंचे। अपनों के साथ बैठक की। इसे नई सरकार के गठन की कवायद से जोड़कर देखा गया। इन उठापटक के बीच नीतीश कुमार और उनके बेटे निशांत कुमार खासे सक्रिय रहे। सीएम ने शनिवार को पटना में बन रहे गौरव पार्क के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। साथ ही पटना हाट के भी निर्माण कार्य का जायजा लिया। राज्यसभा के लिए चुने गए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 मार्च तक इस्तीफा देंगे। यह संवैधानिक प्रक्रिया या बाध्यता भी है। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार विधानपरिषद से इस्तीफा देंगे। इसके साथ ही नई सरकार के गठन को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। इन सबके बीच पूर्व सांसद और बाहुबली आनंद मोहन ने नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले पर ऐतराज जताया है। पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, फैसला चाहे नीतीश कुमार का ही क्यों ना हो, बिहार के लाखों लोग इस फैसले से आहत हैं और असहमत हैं। इससे जदयू को नुकसान तो होगा ही, लेकिन उससे ज्यादा नुकसान बीजेपी को होगा। पूर्व सांसद ने निशांत को फुल फ्लेज्ड पावर देने की वकालत करते हुए कहा, फैसले से लोगों में गुस्सा है। लव-कुश का समीकरण बिगड़ा है और इसका फायदा विपक्ष को होगा। इधर, पटना के वीरचंद पटेल रोड पर पोस्टर लगे हैं। जिसमें लिखा गया- बिहार छोड़कर न जाएं मुख्यमंत्री। जानिए नीतीश कुमार के दिल्ली जाने को लेकर किस तरह से राजनीति गर्म है। और क्या-क्या बयानबाजी हो रही है। शाह का नाम लिए बिना हमला बिहार के नए मुख्यमंत्री के सवाल पर आनंद मोहन ने कहा, नीतीश कुमार की जगह बिहार में कोन सीएम बनेगा, यह फैसला तो शीर्ष नेतृत्व वाले नेताओं को लेना है। लेकिन, पिछले चुनाव में जनता ने 2025 से 30, फिर से नीतीश के नारे पर मैंडेट दिया था। इस विश्वास को ठेस पहुंचेगा तो परिणाम अच्छे नहीं होंगे। पूर्व सांसद ने अमित शाह का नाम लिए बिना चाणक्य बोलकर कहा, जो रणनीतिकार, मंत्रणाकार यह समझते हैं कि इससे लाभ होगा तो वे गलत सोच रहे हैं। इसका नुकसान जेडीयू को उठाना पड़ेगा, बीजेपी को ज्यादा झेलना पड़ेगा। बैठे बिठाए इसका लाभ विपक्षी दलों को मिलेगा। आनंद मोहन बोले- उपमुख्यमंत्री मतलब चुप- मुख्यमंत्री पूर्व सांसद ने कहा, निशांत कुमार को लाया जाना नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के फैसले के लिए शॉक एब्जॉर्वर जैसा है। उनके आने से कुछ उम्मीद बढ़ी है लेकिन, उन्हें लाना है तो एनडीए फुल फ्लेज्ड लेकर आए। उप मुख्यमंत्री का मतलब चुप मुख्यमंत्री होता है। नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा से माहौल कुछ संतुलित हुआ है। लेकिन, इस पर ठंडे दिमाग से इस पर बैठकर विचार किया जाना चाहिए। नई सरकार के गठन की चर्चा के बीच नीतीश एक्टिव
नीतीश कुमार की विधानपरिषद से इस्तीफा की सामने आई तारीख ने नई सरकार के गठन की भी चर्चा कराई। नई सरकार बनने की तारीख को लेकर कई तर्क आ रहे। एक मसला खरमास का है, जो 14 अप्रैल तक है। हालांकि इसकी काट में में ये कहा जा रहा हैकि इस खरमास में सिवाय शादी के कमोबेश तमाम शुभ काम होते हैं। इधर, भाजपा के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े शुक्रवार को यहां पहुंचे। अपनों के साथ बैठक की। इसे नई सरकार के गठन की कवायद से जोड़कर देखा गया। इन उठापटक के बीच नीतीश कुमार और उनके बेटे निशांत कुमार खासे सक्रिय रहे। सीएम ने शनिवार को पटना में बन रहे गौरव पार्क के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। साथ ही पटना हाट के भी निर्माण कार्य का जायजा लिया।


