बिहार सरकार की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹3,47,589.76 करोड़ का बजट पेश हुआ है। इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो चुका है। भाजपा नेताओं ने बजट को विकासोन्मुखी और ऐतिहासिक बताया है। जबकि, मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने मिथिला क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाया है। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि यह बजट बिहार के विकास को नई गति देने वाला और आधारभूत संरचना को मजबूत करने वाला है। उन्होंने कहा कि बजट में युवाओं के रोजगार, महिलाओं के सशक्तिकरण, किसानों की आय वृद्धि, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग सहित सभी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “सबका साथ, सबका विकास” की परिकल्पना को साकार करेगा और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार को समृद्धि की ओर ले जाएगा। विकसित बिहार की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया भाजपा जिला अध्यक्ष आदित्य नारायण मन्ना ने भी बजट को सकारात्मक बताते हुए कहा कि इसमें छात्रों, किसानों, उद्यमियों, युवाओं और महिलाओं सहित समाज के हर वर्ग के विकास की योजना शामिल है। विधायक सह पूर्व मंत्री जीवेश कुमार ने बजट को आत्मनिर्भर और विकसित बिहार की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक है और साल 2004-05 की तुलना में करीब 11 गुना वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, कृषि और सामाजिक न्याय पर आधारित “पंच-संकल्प” के तहत प्रस्तुत यह बजट बिहार के उज्ज्वल भविष्य का रोडमैप है। बजट की प्रमुख घोषणाएं… बजट में मिथिला क्षेत्र के लिए कोई विशेष विकास पैकेज नहीं मिथिला स्टूडेंट यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विद्या भूषण ने कहा कि बजट में मिथिला क्षेत्र के लिए कोई विशेष विकास पैकेज नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि मिथिला विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, छात्रावासों और शोध संस्थानों के लिए कोई ठोस योजना नहीं लाई गई। बेरोजगारी और पलायन मिथिला की बड़ी समस्या है, लेकिन बजट में स्थानीय उद्योग, कृषि आधारित स्टार्टअप, बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई को लेकर कोई ठोस घोषणा नहीं हुई।
उन्होंने मिथिला विकास बोर्ड के गठन की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मिथिला के लिए विशेष पैकेज की घोषणा नहीं की, तो छात्र और युवा लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होंगे। बिहार सरकार की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹3,47,589.76 करोड़ का बजट पेश हुआ है। इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो चुका है। भाजपा नेताओं ने बजट को विकासोन्मुखी और ऐतिहासिक बताया है। जबकि, मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने मिथिला क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाया है। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि यह बजट बिहार के विकास को नई गति देने वाला और आधारभूत संरचना को मजबूत करने वाला है। उन्होंने कहा कि बजट में युवाओं के रोजगार, महिलाओं के सशक्तिकरण, किसानों की आय वृद्धि, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग सहित सभी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “सबका साथ, सबका विकास” की परिकल्पना को साकार करेगा और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार को समृद्धि की ओर ले जाएगा। विकसित बिहार की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया भाजपा जिला अध्यक्ष आदित्य नारायण मन्ना ने भी बजट को सकारात्मक बताते हुए कहा कि इसमें छात्रों, किसानों, उद्यमियों, युवाओं और महिलाओं सहित समाज के हर वर्ग के विकास की योजना शामिल है। विधायक सह पूर्व मंत्री जीवेश कुमार ने बजट को आत्मनिर्भर और विकसित बिहार की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक है और साल 2004-05 की तुलना में करीब 11 गुना वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, कृषि और सामाजिक न्याय पर आधारित “पंच-संकल्प” के तहत प्रस्तुत यह बजट बिहार के उज्ज्वल भविष्य का रोडमैप है। बजट की प्रमुख घोषणाएं… बजट में मिथिला क्षेत्र के लिए कोई विशेष विकास पैकेज नहीं मिथिला स्टूडेंट यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विद्या भूषण ने कहा कि बजट में मिथिला क्षेत्र के लिए कोई विशेष विकास पैकेज नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि मिथिला विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, छात्रावासों और शोध संस्थानों के लिए कोई ठोस योजना नहीं लाई गई। बेरोजगारी और पलायन मिथिला की बड़ी समस्या है, लेकिन बजट में स्थानीय उद्योग, कृषि आधारित स्टार्टअप, बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई को लेकर कोई ठोस घोषणा नहीं हुई।
उन्होंने मिथिला विकास बोर्ड के गठन की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मिथिला के लिए विशेष पैकेज की घोषणा नहीं की, तो छात्र और युवा लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होंगे।


