महाराष्ट्र: पंचायत समिति चुनाव में बजा भाजपा गठबंधन का डंका, सातारा में बंपर जीत, कांग्रेस का सूपड़ा साफ

महाराष्ट्र: पंचायत समिति चुनाव में बजा भाजपा गठबंधन का डंका, सातारा में बंपर जीत, कांग्रेस का सूपड़ा साफ

महाराष्ट्र के सातारा जिले में पंचायत समिति चुनाव के नतीजों ने स्थानीय राजनीति की तस्वीर बदल दी है। इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 11 में से 5 पंचायत समितियों पर कब्जा जमाया, जो जिले में पार्टी के लिए अब तक की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।

सत्ता का गणित बदला, कांग्रेस साफ

सातारा जिला पंचायत समिति के चुनाव परिणामों ने जिले के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। कुल 11 पंचायत समितियों के लिए हुए इस कड़े मुकाबले में भाजपा (BJP) ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 5 सीटों पर अपना परचम लहराया है।

वहीं, एनसीपी (सुनेत्रा पवार) भी 5 समितियां जीतने में सफल रही है, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना के खाते में 1 सीट आई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कांग्रेस को एक भी पंचायत समिति में सत्ता नहीं मिली, जिससे पार्टी को बड़ा झटका लगा है।

फलटण बना चर्चा का केंद्र

फलटण में आए अप्रत्याशित नतीजों ने पूरे जिले में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इसे राष्ट्रवादी कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन भाजपा ने यहां सेंध लगाकर बड़ा संदेश दिया है। यह परिणाम आने वाले समय में स्थानीय राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

किन पंचायत समितियों में किसका कब्जा?

भाजपा ने सातारा, फलटण, जावली, कराड और खटाव में जीत दर्ज की है। वहीं, पाटण में शिवसेना सत्ता में काबिज होगी। जबकि कोरेगांव, खंडाला, वाई, माण और महाबलेश्वर में एनसीपी ने अध्यक्ष पद हासिल किया।

दांव पर थी बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा

इस चुनाव में दो बड़े मंत्रियों की साख दांव पर थी। शिवेंद्रराजे भोसले के नेतृत्व में भाजपा ने सातारा और जावली में सत्ता हासिल की। वहीं मंत्री जयकुमार गोरे के क्षेत्र माण में राष्ट्रवादी कांग्रेस ने जीत दर्ज कर भाजपा को झटका दिया। पाटण में मंत्री शंभुराज देसाई के नेतृत्व में शिवसेना ने अपनी सत्ता बरकरार रखी है, जहां सविता पवार सभापति बनी हैं।

कराड में पहली बार भाजपा की एंट्री

कराड पंचायत समिति में भाजपा ने पहली बार सत्ता स्थापित की है, जो पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है।

अब सभी की नजर सातारा जिला परिषद पर टिकी है। पंचायत समिति के नतीजों के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि जिला परिषद की सत्ता पर किसका कब्जा होता है।

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