औरंगाबाद में शेर-ए-बिहार’ के नाम से प्रसिद्ध पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लाने वाले स्वर्गीय राम लखन सिंह यादव की जयंती शहर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान राम लखन सिंह यादव सभागार में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित समारोह में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक एवं शैक्षणिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भाग लेकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।कार्यक्रम की शुरुआत स्व. राम लखन सिंह यादव के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। उपस्थित अतिथियों और वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। वक्ताओं ने कहा कि राम लखन बाबू केवल एक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि वे एक सशक्त विचारधारा के प्रतीक थे। उनके आदर्शों और सिद्धांतों को अपनाकर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है। ‘1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई’ वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि राम लखन सिंह यादव का पूरा जीवन समाज सेवा, संघर्ष और जनकल्याण के कार्यों को समर्पित रहा। उन्होंने महात्मा गांधी के आह्वान पर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष का झंडा बुलंद किया। इस आंदोलन के दौरान उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। राजनीतिक जीवन में भी राम लखन सिंह यादव ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने पालीगंज विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व वर्ष 1952 से 1957 तथा 1962 से 1967 तक किया। इसके बाद वर्ष 1963 से 1967 तक बिहार सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री केबी सहाय के मंत्रिमंडल में लोक निर्माण मंत्री के रूप में कार्य किया। बाद में वर्ष 1994 से 1996 तक केंद्र की नरसिम्हा राव सरकार में रसायन एवं उर्वरक मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दीं। ‘स्कूल और कॉलेजों की स्थापना कर शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा दी’ वक्ताओं ने कहा कि बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में जो व्यापक विस्तार हुआ, उसका बड़ा श्रेय राम लखन सिंह यादव को जाता है। उन्होंने राज्य के विभिन्न जिलों में स्कूल और कॉलेजों की स्थापना कर शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा दी। उनके प्रयासों से समाज के हर वर्ग के छात्र-छात्राओं को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला। शिक्षा के प्रसार को उन्होंने सामाजिक विकास की आधारशिला माना। समारोह में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में राम लखन बाबू के विचारों और आदर्शों को अपनाने की आवश्यकता पहले से अधिक है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों और धर्मों के लोगों को साथ लेकर समरस समाज और मजबूत राष्ट्र निर्माण का संदेश दिया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता अनिल माथुर ने की, जबकि संचालन शिक्षक डॉ. संतोष यादव ने किया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार सरकार के पूर्व मंत्री सुरेश पासवान उपस्थित थे। वहीं विशिष्ट अतिथियों में जेपी सेनानी अजय कुमार श्रीवास्तव, प्रमोद कुमार सिंह, राघवेन्द्र प्रताप सिंह, अमोद चंद्रवंशी, सिद्धेश्वर विद्यार्थी, सुबोध कुमार सिंह, जिला पार्षद सुरेंद्र यादव, डॉ. रमेश यादव, मुखिया संजय यादव, गोरडिहा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि नगेंद्र सिंह, संजीत यादव, अजय यादव, श्यामता प्रसाद, तुलसी यादव, मुखिया बृजमोहन यादव, चंचला कुशवाहा, सबिता देवी, पूनम देवी और चंद्रीप राम सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने राम लखन सिंह यादव के आदर्शों को आत्मसात कर समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देने का संकल्प लिया। औरंगाबाद में शेर-ए-बिहार’ के नाम से प्रसिद्ध पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लाने वाले स्वर्गीय राम लखन सिंह यादव की जयंती शहर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान राम लखन सिंह यादव सभागार में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित समारोह में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक एवं शैक्षणिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भाग लेकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।कार्यक्रम की शुरुआत स्व. राम लखन सिंह यादव के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। उपस्थित अतिथियों और वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। वक्ताओं ने कहा कि राम लखन बाबू केवल एक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि वे एक सशक्त विचारधारा के प्रतीक थे। उनके आदर्शों और सिद्धांतों को अपनाकर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है। ‘1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई’ वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि राम लखन सिंह यादव का पूरा जीवन समाज सेवा, संघर्ष और जनकल्याण के कार्यों को समर्पित रहा। उन्होंने महात्मा गांधी के आह्वान पर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष का झंडा बुलंद किया। इस आंदोलन के दौरान उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। राजनीतिक जीवन में भी राम लखन सिंह यादव ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने पालीगंज विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व वर्ष 1952 से 1957 तथा 1962 से 1967 तक किया। इसके बाद वर्ष 1963 से 1967 तक बिहार सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री केबी सहाय के मंत्रिमंडल में लोक निर्माण मंत्री के रूप में कार्य किया। बाद में वर्ष 1994 से 1996 तक केंद्र की नरसिम्हा राव सरकार में रसायन एवं उर्वरक मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दीं। ‘स्कूल और कॉलेजों की स्थापना कर शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा दी’ वक्ताओं ने कहा कि बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में जो व्यापक विस्तार हुआ, उसका बड़ा श्रेय राम लखन सिंह यादव को जाता है। उन्होंने राज्य के विभिन्न जिलों में स्कूल और कॉलेजों की स्थापना कर शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा दी। उनके प्रयासों से समाज के हर वर्ग के छात्र-छात्राओं को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला। शिक्षा के प्रसार को उन्होंने सामाजिक विकास की आधारशिला माना। समारोह में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में राम लखन बाबू के विचारों और आदर्शों को अपनाने की आवश्यकता पहले से अधिक है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों और धर्मों के लोगों को साथ लेकर समरस समाज और मजबूत राष्ट्र निर्माण का संदेश दिया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता अनिल माथुर ने की, जबकि संचालन शिक्षक डॉ. संतोष यादव ने किया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार सरकार के पूर्व मंत्री सुरेश पासवान उपस्थित थे। वहीं विशिष्ट अतिथियों में जेपी सेनानी अजय कुमार श्रीवास्तव, प्रमोद कुमार सिंह, राघवेन्द्र प्रताप सिंह, अमोद चंद्रवंशी, सिद्धेश्वर विद्यार्थी, सुबोध कुमार सिंह, जिला पार्षद सुरेंद्र यादव, डॉ. रमेश यादव, मुखिया संजय यादव, गोरडिहा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि नगेंद्र सिंह, संजीत यादव, अजय यादव, श्यामता प्रसाद, तुलसी यादव, मुखिया बृजमोहन यादव, चंचला कुशवाहा, सबिता देवी, पूनम देवी और चंद्रीप राम सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने राम लखन सिंह यादव के आदर्शों को आत्मसात कर समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देने का संकल्प लिया।


