साबरमती आश्रम की तर्ज पर विकसित होगी बिरसा मुंडा जन्मस्थली:उलिहातू में बनेगा म्यूजियम, पारंपरिक लुक में री-मॉडलिंग वर्क जल्द शुरू होगा, टेराकोटा से सजेगी दीवार

साबरमती आश्रम की तर्ज पर विकसित होगी बिरसा मुंडा जन्मस्थली:उलिहातू में बनेगा म्यूजियम, पारंपरिक लुक में री-मॉडलिंग वर्क जल्द शुरू होगा, टेराकोटा से सजेगी दीवार

महान आदिवासी नायक भगवान बिरसा मुंडा का जन्म 151 वर्ष पहले 1875 में खूंटी के उलिहातू गांव में हुआ था। झारखंड गठन के बाद वर्ष 2003 में तत्कालीन विधायक रमेश सिंह मुंडा ने विधायक फंड से उनकी जन्मस्थली का सौंदर्यीकरण करवाया था, जहां खप्पड़ की छत वाला घर, बाउंड्री और मुख्य द्वार बनाया गया। आगे काले रंग का गोल गेट भी बनाया गया था। अभी वहां जाने वाले देश-विदेश के पर्यटक इसी घर और खूंटकटी दार में लगी मूर्ति के दर्शन करते हैं।
23 साल बाद अब झारखंड सरकार इस ऐतिहासिक स्थल को नए सिरे से विकसित करने जा रही है। पर्यटन एवं कल्याण विभाग उलिहातू स्थित भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली को म्यूजियम के रूप में विकसित करेगा। पर्यटन सचिव मनोज कुमार ने बताया कि जन्मस्थली परिसर को साबरमती स्थित गांधी आश्रम की तर्ज पर डेवलप किया जाएगा। मॉडर्न दिख रहे घर को झारखंडी पारंपरिक घर का स्वरूप दिया जाएगा
सीलिंग: जिप्सम बोर्ड हटाकर बांस से बना फॉल्स सीलिंग लगाया जाएगा।
लैंडस्केप: संगमरमर की फर्श हटाकर पत्थर, हरियाली और पेड़-पौधे लगाए जाएंगे।
लाइटिंग: पैनल लाइट की जगह स्पॉट लाइटिंग, जिससे मूर्ति और वॉल आर्ट उभरेगा। राज्य के पारंपरिक म्यूरल्स, आर्ट फॉर्म व संस्कृति को प्रदर्शित किया जाएगा
परिसर में झारखंड के पारंपरिक म्यूरल्स, आर्ट फॉर्म और संस्कृति को प्रदर्शित किया जाएगा। डीपीआर तैयार हो चुका है। जल्द ही काम शुरू होगा। पर्यटन विभाग का उद्देश्य इस म्यूजियम के जरिए देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को झारखंड की संस्कृति, इतिहास और बिरसा के संघर्ष से रूबरू कराना है। बाउंड्री दीवार: सोहराई पेंटिंग हटाकर टेराकोटा म्यूरल लगाए जाएंगे, जिनमें बिरसा मुंडा के जीवन की घटनाएं उकेरी जाएंगी। महान आदिवासी नायक भगवान बिरसा मुंडा का जन्म 151 वर्ष पहले 1875 में खूंटी के उलिहातू गांव में हुआ था। झारखंड गठन के बाद वर्ष 2003 में तत्कालीन विधायक रमेश सिंह मुंडा ने विधायक फंड से उनकी जन्मस्थली का सौंदर्यीकरण करवाया था, जहां खप्पड़ की छत वाला घर, बाउंड्री और मुख्य द्वार बनाया गया। आगे काले रंग का गोल गेट भी बनाया गया था। अभी वहां जाने वाले देश-विदेश के पर्यटक इसी घर और खूंटकटी दार में लगी मूर्ति के दर्शन करते हैं।
23 साल बाद अब झारखंड सरकार इस ऐतिहासिक स्थल को नए सिरे से विकसित करने जा रही है। पर्यटन एवं कल्याण विभाग उलिहातू स्थित भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली को म्यूजियम के रूप में विकसित करेगा। पर्यटन सचिव मनोज कुमार ने बताया कि जन्मस्थली परिसर को साबरमती स्थित गांधी आश्रम की तर्ज पर डेवलप किया जाएगा। मॉडर्न दिख रहे घर को झारखंडी पारंपरिक घर का स्वरूप दिया जाएगा
सीलिंग: जिप्सम बोर्ड हटाकर बांस से बना फॉल्स सीलिंग लगाया जाएगा।
लैंडस्केप: संगमरमर की फर्श हटाकर पत्थर, हरियाली और पेड़-पौधे लगाए जाएंगे।
लाइटिंग: पैनल लाइट की जगह स्पॉट लाइटिंग, जिससे मूर्ति और वॉल आर्ट उभरेगा। राज्य के पारंपरिक म्यूरल्स, आर्ट फॉर्म व संस्कृति को प्रदर्शित किया जाएगा
परिसर में झारखंड के पारंपरिक म्यूरल्स, आर्ट फॉर्म और संस्कृति को प्रदर्शित किया जाएगा। डीपीआर तैयार हो चुका है। जल्द ही काम शुरू होगा। पर्यटन विभाग का उद्देश्य इस म्यूजियम के जरिए देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को झारखंड की संस्कृति, इतिहास और बिरसा के संघर्ष से रूबरू कराना है। बाउंड्री दीवार: सोहराई पेंटिंग हटाकर टेराकोटा म्यूरल लगाए जाएंगे, जिनमें बिरसा मुंडा के जीवन की घटनाएं उकेरी जाएंगी।  

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