चंडीगढ़ की अदालत में चल रहे एक मामले में अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया सहित 8 ने पेशी से छूट की मांग की है। आवेदन में बताया गया कि आज बिक्रम मजीठिया की पंजाब के बठिंडा जिले के गांव बाघा बराना में शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेताओं और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक में विभिन्न गांवों, शहरों और राज्यों से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है, इसलिए आरोपियों की उपस्थिति वहां आवश्यक है। आवेदन मीठिया के वकील राजेश राय की और से दाखिल किया गया है। जिसमें कहा गया कि आरोपी पवन कुमार टिन्नू, जो एक बैंक के चेयरमैन हैं, उन्हें भी एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए बुलाया है। वहीं बलविंदर सिंह किडनी से संबंधित बीमारी से पीड़ित हैं, जिस कारण उनका अदालत में उपस्थित होना संभव नहीं है। अगली तारिख पर होंगे पेश अदालत को आश्वासन दिया कि वे अगली तारीख पर जरूर पेश होंगे। साथ ही कहा गया कि उनकी अनुपस्थिति जानबूझकर नहीं है, बल्कि परिस्थितियों के कारण वे पेश नहीं हो पा रहे हैं। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि इस मामले में बिक्रम सिंह मजीठिया और अन्य आरोपियों की ओर से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने की याचिका दायर की गई है, जिस पर 26 मार्च 2026 को सुनवाई निर्धारित है। याचिका में यह भी बताया गया कि इस एफआईआर को दो अन्य लोगों के खिलाफ हाईकोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है। अदालत से निवेदन किया गया है कि न्याय के हित में आज की सुनवाई के लिए उनकी व्यक्तिगत पेशी से छूट दी जाए। मुख्यमंत्री आवास घेराव के दौरान हुई थी झड़प पुलिस के अनुसार वर्ष 2021 में अकाली दल के कई नेता पंजाब में महंगाई और 1984 दंगों के मुद्दे पर चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने जा रहे थे। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए यूटी पुलिस ने बैरिकेड लगाकर नाकाबंदी की थी। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ दिए, सरकारी आदेशों का उल्लंघन किया और पुलिस कार्य में बाधा डाली। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।सेक्टर-3 थाना पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी। अब हाईकोर्ट की रोक हटने के बाद जिला अदालत में मुकदमे की कार्रवाई तेज होगी। हाईकोर्ट ने हटाई डेढ़ साल पुरानी रोक वर्ष 2021 में मजीठिया समेत अकाली के 20 से अधिक नेताओं के खिलाफ सेक्टर-3 थाना पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 188, 186, 353, 332 और 34 के तहत केस दर्ज किया था। दलजीत सिंह चीमा और महेशइंदर सिंह ग्रेवाल ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में आरोप तय करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। 29 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने चीमा और ग्रेवाल की याचिका स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कर दी। इसी के साथ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में चल रहे मामले पर लगी रोक भी हट गई।


