Bikaner News: रेतीले टीलों से रोजगार हब बना श्रीडूंगरगढ़, खेती और उद्योगों ने बदली पूरे क्षेत्र की तस्वीर

Bikaner News: रेतीले टीलों से रोजगार हब बना श्रीडूंगरगढ़, खेती और उद्योगों ने बदली पूरे क्षेत्र की तस्वीर

ठुकरियासर। कभी रेतीले टीलों के बीच संघर्षपूर्ण जीवन जीने वाला श्रीडूंगरगढ़ तहसील क्षेत्र आज कृषि और उससे जुड़े उद्योगों के दम पर रोजगार का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। पिछले तीन दशकों में किसानों के हरित क्रांति जैसे प्रयासों ने न केवल कृषि उत्पादन बढ़ाया, बल्कि इस क्षेत्र को प्रवासी मजदूरों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना दिया है।

रबी और खरीफ फसल की कटाई के समय यहां मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तरप्रदेश और राजस्थान के अन्य हिस्सों से बड़ी संख्या में मजदूर पहुंचते हैं। श्रीडूंगरगढ़ शहर के घूमचक्कर, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और गांवों की चौपालों पर इन प्रवासी मजदूरों की टोलियां आसानी से देखी जा सकती हैं। ये मजदूर गांवों में कृषि नलकूपों के आसपास अस्थायी ठिकाने बनाकर महीनों तक काम करते हैं।

खेती के साथ उद्योगों में भी बढ़ी मांग

पिछले एक दशक में क्षेत्र में स्थापित औद्योगिक इकाइयों ने रोजगार के अवसरों को और बढ़ाया है। मूंगफली से जुड़े गोटा और तेल मिल, गम मिल, डेयरी उद्योग, फसल अवशेष से गिट्टी निर्माण इकाइयां, वेयरहाउस और मसाला उद्योग जैसी इकाइयों में हजारों मजदूर कार्यरत हैं, जिससे स्थानीय और प्रवासी दोनों को रोजगार मिल रहा है।

मजदूरों को भी मिल रहा बेहतर पारिश्रमिक

बाना गांव के सत्यनारायण बाना के अनुसार, फसल कटाई के समय हजारों मजदूर अपने परिवार के साथ यहां आते हैं। मजदूरी के रूप में 600 से 800 रुपए प्रतिदिन मिलते हैं। कई मजदूर वर्षों से स्थाई रूप से जुड़े हुए हैं। इससे किसानों को श्रमिकों की कमी का सामना नहीं करना पड़ता।

बीजान और उत्पादन में अग्रणी क्षेत्र

श्रीडूंगरगढ़ तहसील में करीब 20 हजार कृषि नलकूप हैं, जिनसे लगभग 1.20 लाख हेक्टेयर सिंचित भूमि पर मूंगफली, गेहूं, जौ, चना, सरसों, जीरा, मेथी, इसबगोल और 1.25 लाख हेक्टेयर बरानी भूमि पर मोठ, बाजरा, ग्वार, मूंग और तिल का उत्पादन होता है। विशेष रूप से मूंगफली उत्पादन में यह क्षेत्र देश के अग्रणी इलाकों में शामिल है।

गांव-गांव में औद्योगिक विस्तार

आडसर, ठुकरियासर, जेतासर, श्रीडूंगरगढ़, बिग्गा, बाना, सुडसर और शेरुणा सहित कई गांवों में औद्योगिक इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्र में स्थानीय लोगों को भी बड़े पैमाने पर रोजगार मिल रहा है।

हरित क्रांति ने बदली पहचान

कभी बंजर माने जाने वाले इस क्षेत्र में आज हरित क्रांति ने नई पहचान बना दी है। कृषि और उद्योग के समन्वय ने श्रीडूंगरगढ़ को न केवल उत्पादन का हब बनाया है, बल्कि रोजगार के नए आयाम भी स्थापित किए हैं।

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