पटना में बना बिहार का पहला मॉडर्न श्मशान घाट,VIDEO:आदियोगी के तर्ज पर शिव प्रतिमा स्थापित, कैंटीन-वेटिंग हॉल भी मौजूद; ऑनलाइन कर सकते हैं स्लॉट बुक

पटना में बना बिहार का पहला मॉडर्न श्मशान घाट,VIDEO:आदियोगी के तर्ज पर शिव प्रतिमा स्थापित, कैंटीन-वेटिंग हॉल भी मौजूद; ऑनलाइन कर सकते हैं स्लॉट बुक

पटना के बांस घाट में हाई टेक श्मशान घाट का निर्माण किया गया है, जो कि बिहार का पहला मॉडर्न श्मशान घाट माना जा रहा है। यह श्मशान घाट 4.5 एकड़ में फैला है, जिसे 89.40 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। यह पिछले श्मशान घाट से तीन गुना बड़ा है, जो केवल 1.24 एकड़ में फैला था। पटना स्मार्ट सिटी और बुडको इस पूरे श्मशान घाट को विकसित किया गया है। देखिए बांस घाट में हाई टेक श्मशान घाट की तस्वीर… श्मशान घाट में मोक्ष द्वार और बैकुंठ द्वार बनाए गए इस श्मशान घाट में मुख्य आकर्षण का केंद्र श्मशान घाट के दो द्वार हैं, जिसमें से एक मोक्ष द्वार और दूसरा बैकुंठ द्वार है। दोनों द्वार 42 फीट ऊंचा है। इसमें से एक एंट्री और दूसरा निकास पॉइंट है। दोनों द्वार में कांसे से बना ओम चिन्ह भी स्थापित किया गया है। इन दोनों द्वार को जालंधर के कारीगर ने तैयार किया है। अंतिम संस्कार की सामग्री के लिए बनाए गए 4 दुकान श्मशान घाट में द्वार से अंदर इंटर करते ही बाएं साइड में 4 दुकानें बनाई गई हैं, जिसमें अंतिम संस्कार को लेकर सामग्री मिलेंगी। लोग पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार करने के लिए यहां से सामान खरीद सकते हैं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अंतिम संस्कार करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हों। एक साथ 18 शवों के अंतिम संस्कार की मिलेगी सुविधा बांस घाट के इस नए परिसर में एक साथ 18 शवों के अंतिम संस्कार की सुविधा मिलेगी। इसमें से 4 इलेक्ट्रिकल ओवन, 6 सेमी-इलेक्ट्रिकल और 8 ट्रेडिशनल तरीके से शव को जलाने की व्यवस्था है। इनमें चार इलेक्ट्रिक ओवन गुजरात से मंगाए गए हैं, जबकि 6 वुड क्रीमेसन ओवन बिहार की ही कंपनी ने तैयार किया हैं। इलेक्ट्रिक वाले में 15-20 मिनट में शव जलकर राख हो जाएंगे, जिसके लिए इलेक्ट्रिक पैनल भी बनाया गया है। इलेक्ट्रिक शवदाहगृह पारंपरिक लकड़ी के मुकाबले 90 फीसदी कम प्रदूषण फैलाते हैं। अब देखिए तीनों शवदाह घरों की तस्वीर… वहीं, वुड क्रीमेसन में शव को जलाने में कम लकड़ी की खपत होती है और शव 20-25 मिनट में राख हो जाते हैं। धुंए को बाहर निकालने के लिए चिमनी भी गई है। दूसरी और, शवों को सुरक्षित रखने के लिए यहां मोर्चरी रूम में मोर्चरी फ्रीजर की भी व्यवस्था की गई है। वहीं, बच्चों के शव के लिए भी एक अलग से 30/30 का एरिया डेवेलप किया जा रहा है, ताकि लोग गंगा में जाकर शव को प्रवाहित न करें। अस्थि विसर्जन और स्नान के लिए बनाए गए तालाब अस्थियों को विसर्जित करने और स्नान करने के लिए दो तालाब बनाए गए हैं, जिनमें दो किलोमीटर लंबी पाइप लाइन के माध्यम से सीधे गंगा नदी के पानी को तालाब में भेजा जा रहा है। इससे गंगा भी प्रदूषित नहीं होगी और लोगों को गंगा में अस्थी विसर्जन का पुण्य भी मिलेगा। इसमें से एक तालाब 45 मीटर और दूसरा 65 मीटर का है। वहीं, पूरे परिसर में करीब 12 हजार पेड़-पौधे लगाए गए हैं, जिन्हें आंध्र प्रदेश से मंगाया गया है। दो तालाबों के बीच शिव की प्रतिमा स्थापित दूसरी ओर इस श्मशान घाट के परिसर में दो तालाबों के बीच 12 फुट ऊंची शिव की प्रतिमा स्थापित की गई है। इस प्रतिमा को तमिलनाडु के आदियोगी के तर्ज पर तैयार किया गया है। इसे बनाने के लिए जालंधर से कारीगर आए थे। इसे फाइबर मटेरियल से बनाया गया है। इस 15 फीट ऊंचे त्रिशूल के साथ स्थापित प्रतिमा में शिव की जटाओं से गंगा निकलती दिखाई देंगी और साथ ही आसपास लाइटिंग भी की गई है। वहीं, आगे की तरफ रास्तों पर ग्रीन एरिया को डेवलप गया है। श्मशान घाट की दीवारों पर बनाई गई पेंटिंग इस श्मशान घाट के दीवारों पर पेंटिंग बनाई गई है, जहां इंसान के जन्म से लेकर मृत्यु तक की जीवन यात्रा और कर्मों के आधार पर स्वर्ग-नरक के मार्ग को बेहद खूबसूरती से उकेरा गया है। वहीं, शांति मिलने के लिए स्लोगन को भी लिखा गया है। इसके अलावा राजा हरिश्चंद्र की तस्वीर के साथ उनकी कहानी को उकेरी गई है। राजा हरिश्चंद्र की कहानी यहां आए शोकाकुल लोगों को किसी भी परिस्थिति में सच्चाई और कर्तव्यों के पालन के लिए प्रेरित करेगी। चहारदीवारी में ओम लिखे आकर्षक स्टील फ्रेम लगाये जा रहे इस पूरे परिसर के पीछे वाले एरिया में जेपी गंगा पथ (मरीन ड्राइव) का इलाका है, जहां से रोज हजारों की संख्या में गाड़ियां गुजरती है। जलते शव खुले में दिखायी नहीं दे, इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है। परिसर की दीवारों पर त्रिशूल बना आकर्षक फ्रेम लगाए गए हैं, जिसे मोक्ष धाम और वैकुंठ धाम नाम दिया गया है। यह एक HPL (हाई प्रेशर लैमिनेट) शीट है। इस व्यू कटर को गुजरात से मंगाया गया है। वेबसाइट पर ऑनलाइन स्लॉट कर सकते बुक इसने शवदाह गृह में ऑनलाइन बुकिंग की भी सुविधा होगी। इससे परिजनों को लंबी कतारों और अफरातफरी से मुक्ति मिलेगी। लोग इसके लिए स्लाॅट भी बुक कर सकते हैं। वह पटना नगर निगम के वेबसाइट पर जाकर टिकट आईडी जेनरेट कर सकते हैं या फिर व्हाट्सएप चैटबोट 9264447449 के माध्यम से भी बुकिंग कर सकते हैं। वहीं, पिकअप सर्विस के लिए मुक्ति रथ को भी बुक कर सकते हैं। इसके साथ ही डेथ सर्टिफिकेट के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। हेल्प डेस्क की टीम लोगों को रजिस्टर करने में मदद भी करेगी। हालांकि, अभी तक दाह संस्कार की तरह तय नहीं की गई है। बिहार में अत्याधुनिक तकनीक से 40 शवदाह गृह बनाए जा रहे बिहार में अत्याधुनिक तकनीक से 40 शवदाह गृह बनाए जा रहे हैं। इसमें से 20 शवदाह गृह का निर्माण पूरा हो चुका है।उत्तर बिहार के 12 और दक्षिण बिहार के 8 जिलों में आधुनिक शवदाह गृहों का निर्माण हो चुका है। इन तैयार किए गए 20 शवदाह गृहों के सौंदर्यीकरण का काम अंतिम चरण में है, जिसके बाद इन्हें जल्द ही चालू कर दिया जाएगा। ये शवदाह गृह में इलेक्ट्रिकल और पारंपरिक दोनों प्रकार की सुविधा उपलब्ध होगी। पटना के बांस घाट में हाई टेक श्मशान घाट का निर्माण किया गया है, जो कि बिहार का पहला मॉडर्न श्मशान घाट माना जा रहा है। यह श्मशान घाट 4.5 एकड़ में फैला है, जिसे 89.40 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। यह पिछले श्मशान घाट से तीन गुना बड़ा है, जो केवल 1.24 एकड़ में फैला था। पटना स्मार्ट सिटी और बुडको इस पूरे श्मशान घाट को विकसित किया गया है। देखिए बांस घाट में हाई टेक श्मशान घाट की तस्वीर… श्मशान घाट में मोक्ष द्वार और बैकुंठ द्वार बनाए गए इस श्मशान घाट में मुख्य आकर्षण का केंद्र श्मशान घाट के दो द्वार हैं, जिसमें से एक मोक्ष द्वार और दूसरा बैकुंठ द्वार है। दोनों द्वार 42 फीट ऊंचा है। इसमें से एक एंट्री और दूसरा निकास पॉइंट है। दोनों द्वार में कांसे से बना ओम चिन्ह भी स्थापित किया गया है। इन दोनों द्वार को जालंधर के कारीगर ने तैयार किया है। अंतिम संस्कार की सामग्री के लिए बनाए गए 4 दुकान श्मशान घाट में द्वार से अंदर इंटर करते ही बाएं साइड में 4 दुकानें बनाई गई हैं, जिसमें अंतिम संस्कार को लेकर सामग्री मिलेंगी। लोग पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार करने के लिए यहां से सामान खरीद सकते हैं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अंतिम संस्कार करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हों। एक साथ 18 शवों के अंतिम संस्कार की मिलेगी सुविधा बांस घाट के इस नए परिसर में एक साथ 18 शवों के अंतिम संस्कार की सुविधा मिलेगी। इसमें से 4 इलेक्ट्रिकल ओवन, 6 सेमी-इलेक्ट्रिकल और 8 ट्रेडिशनल तरीके से शव को जलाने की व्यवस्था है। इनमें चार इलेक्ट्रिक ओवन गुजरात से मंगाए गए हैं, जबकि 6 वुड क्रीमेसन ओवन बिहार की ही कंपनी ने तैयार किया हैं। इलेक्ट्रिक वाले में 15-20 मिनट में शव जलकर राख हो जाएंगे, जिसके लिए इलेक्ट्रिक पैनल भी बनाया गया है। इलेक्ट्रिक शवदाहगृह पारंपरिक लकड़ी के मुकाबले 90 फीसदी कम प्रदूषण फैलाते हैं। अब देखिए तीनों शवदाह घरों की तस्वीर… वहीं, वुड क्रीमेसन में शव को जलाने में कम लकड़ी की खपत होती है और शव 20-25 मिनट में राख हो जाते हैं। धुंए को बाहर निकालने के लिए चिमनी भी गई है। दूसरी और, शवों को सुरक्षित रखने के लिए यहां मोर्चरी रूम में मोर्चरी फ्रीजर की भी व्यवस्था की गई है। वहीं, बच्चों के शव के लिए भी एक अलग से 30/30 का एरिया डेवेलप किया जा रहा है, ताकि लोग गंगा में जाकर शव को प्रवाहित न करें। अस्थि विसर्जन और स्नान के लिए बनाए गए तालाब अस्थियों को विसर्जित करने और स्नान करने के लिए दो तालाब बनाए गए हैं, जिनमें दो किलोमीटर लंबी पाइप लाइन के माध्यम से सीधे गंगा नदी के पानी को तालाब में भेजा जा रहा है। इससे गंगा भी प्रदूषित नहीं होगी और लोगों को गंगा में अस्थी विसर्जन का पुण्य भी मिलेगा। इसमें से एक तालाब 45 मीटर और दूसरा 65 मीटर का है। वहीं, पूरे परिसर में करीब 12 हजार पेड़-पौधे लगाए गए हैं, जिन्हें आंध्र प्रदेश से मंगाया गया है। दो तालाबों के बीच शिव की प्रतिमा स्थापित दूसरी ओर इस श्मशान घाट के परिसर में दो तालाबों के बीच 12 फुट ऊंची शिव की प्रतिमा स्थापित की गई है। इस प्रतिमा को तमिलनाडु के आदियोगी के तर्ज पर तैयार किया गया है। इसे बनाने के लिए जालंधर से कारीगर आए थे। इसे फाइबर मटेरियल से बनाया गया है। इस 15 फीट ऊंचे त्रिशूल के साथ स्थापित प्रतिमा में शिव की जटाओं से गंगा निकलती दिखाई देंगी और साथ ही आसपास लाइटिंग भी की गई है। वहीं, आगे की तरफ रास्तों पर ग्रीन एरिया को डेवलप गया है। श्मशान घाट की दीवारों पर बनाई गई पेंटिंग इस श्मशान घाट के दीवारों पर पेंटिंग बनाई गई है, जहां इंसान के जन्म से लेकर मृत्यु तक की जीवन यात्रा और कर्मों के आधार पर स्वर्ग-नरक के मार्ग को बेहद खूबसूरती से उकेरा गया है। वहीं, शांति मिलने के लिए स्लोगन को भी लिखा गया है। इसके अलावा राजा हरिश्चंद्र की तस्वीर के साथ उनकी कहानी को उकेरी गई है। राजा हरिश्चंद्र की कहानी यहां आए शोकाकुल लोगों को किसी भी परिस्थिति में सच्चाई और कर्तव्यों के पालन के लिए प्रेरित करेगी। चहारदीवारी में ओम लिखे आकर्षक स्टील फ्रेम लगाये जा रहे इस पूरे परिसर के पीछे वाले एरिया में जेपी गंगा पथ (मरीन ड्राइव) का इलाका है, जहां से रोज हजारों की संख्या में गाड़ियां गुजरती है। जलते शव खुले में दिखायी नहीं दे, इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है। परिसर की दीवारों पर त्रिशूल बना आकर्षक फ्रेम लगाए गए हैं, जिसे मोक्ष धाम और वैकुंठ धाम नाम दिया गया है। यह एक HPL (हाई प्रेशर लैमिनेट) शीट है। इस व्यू कटर को गुजरात से मंगाया गया है। वेबसाइट पर ऑनलाइन स्लॉट कर सकते बुक इसने शवदाह गृह में ऑनलाइन बुकिंग की भी सुविधा होगी। इससे परिजनों को लंबी कतारों और अफरातफरी से मुक्ति मिलेगी। लोग इसके लिए स्लाॅट भी बुक कर सकते हैं। वह पटना नगर निगम के वेबसाइट पर जाकर टिकट आईडी जेनरेट कर सकते हैं या फिर व्हाट्सएप चैटबोट 9264447449 के माध्यम से भी बुकिंग कर सकते हैं। वहीं, पिकअप सर्विस के लिए मुक्ति रथ को भी बुक कर सकते हैं। इसके साथ ही डेथ सर्टिफिकेट के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। हेल्प डेस्क की टीम लोगों को रजिस्टर करने में मदद भी करेगी। हालांकि, अभी तक दाह संस्कार की तरह तय नहीं की गई है। बिहार में अत्याधुनिक तकनीक से 40 शवदाह गृह बनाए जा रहे बिहार में अत्याधुनिक तकनीक से 40 शवदाह गृह बनाए जा रहे हैं। इसमें से 20 शवदाह गृह का निर्माण पूरा हो चुका है।उत्तर बिहार के 12 और दक्षिण बिहार के 8 जिलों में आधुनिक शवदाह गृहों का निर्माण हो चुका है। इन तैयार किए गए 20 शवदाह गृहों के सौंदर्यीकरण का काम अंतिम चरण में है, जिसके बाद इन्हें जल्द ही चालू कर दिया जाएगा। ये शवदाह गृह में इलेक्ट्रिकल और पारंपरिक दोनों प्रकार की सुविधा उपलब्ध होगी।  

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