बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह और बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (BSRDCL) के प्रबंध निदेशक शीर्षत कपिल अशोक ने शनिवार शाम जितवारपुर गांव का दौरा किया। यह दौरा क्राफ्ट विलेज प्रोग्राम के कार्यारंभ के बाद किया गया, जहाँ उन्होंने कलाकारों से मिलकर फीडबैक लिया। इस दौरान, वरिष्ठ अधिकारियों ने जितवारपुर गांव का भ्रमण किया और पद्मश्री बौआ देवी, पद्मश्री शिवन पासवान, पद्मश्री शांति देवी सहित अन्य कलाकारों की कलाकृतियों का अवलोकन किया। उन्होंने जितवारपुर में स्थित तालाबों का भी निरीक्षण किया और क्राफ्ट विलेज के सफल क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक जानकारी व फीडबैक प्राप्त किया। अधिकारियों ने इसके बाद रांटी गांव का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय कलाकारों से मुलाकात कर उनसे विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर, वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मिथिला पेंटिंग में प्राकृतिक रंगों का उपयोग करने की अपील की। BSRDCL के प्रबंध निदेशक श्री शीर्षत कपिल अशोक ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व जब वे मधुबनी के जिलाधिकारी थे, तब उन्होंने कई विकास कार्यों की पहल की थी, जिनमें से कई सफलतापूर्वक पूरे भी हुए। उन्होंने कहा कि इस बार उन्हें बिहार संग्रहालय की ओर से जितवारपुर क्राफ्ट विलेज के निर्माण की जिम्मेदारी मिली है, और इस परियोजना को भी अन्य सफल परियोजनाओं की तरह ही पूरा किया जाएगा, ताकि जितवारपुर के लोगों को इसका लाभ मिल सके। बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक, जो क्राफ्ट विलेज के नोडल पदाधिकारी भी हैं, ने परियोजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मधुबनी से लगभग डेढ़-दो किलोमीटर दूर स्थित जितवारपुर देश का एकमात्र ऐसा गांव है, जहाँ चार सौ घर हैं और जिसने सर्वाधिक तीन पद्मश्री पुरस्कार दिए हैं। यदि बढ़ती जनसंख्या के कारण जितवारपुर से सटे लहेरियागंज गांव को भी शामिल कर लिया जाए, तो पद्मश्री की संख्या पाँच हो जाती है। शिवन पासवान और उनकी पत्नी शांति देवी को वर्ष 2024 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। जितवारपुर का इतिहास चित्रों और शिल्पों में अपनी अमिट छाप छोड़ गया है। बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह और बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (BSRDCL) के प्रबंध निदेशक शीर्षत कपिल अशोक ने शनिवार शाम जितवारपुर गांव का दौरा किया। यह दौरा क्राफ्ट विलेज प्रोग्राम के कार्यारंभ के बाद किया गया, जहाँ उन्होंने कलाकारों से मिलकर फीडबैक लिया। इस दौरान, वरिष्ठ अधिकारियों ने जितवारपुर गांव का भ्रमण किया और पद्मश्री बौआ देवी, पद्मश्री शिवन पासवान, पद्मश्री शांति देवी सहित अन्य कलाकारों की कलाकृतियों का अवलोकन किया। उन्होंने जितवारपुर में स्थित तालाबों का भी निरीक्षण किया और क्राफ्ट विलेज के सफल क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक जानकारी व फीडबैक प्राप्त किया। अधिकारियों ने इसके बाद रांटी गांव का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय कलाकारों से मुलाकात कर उनसे विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर, वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मिथिला पेंटिंग में प्राकृतिक रंगों का उपयोग करने की अपील की। BSRDCL के प्रबंध निदेशक श्री शीर्षत कपिल अशोक ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व जब वे मधुबनी के जिलाधिकारी थे, तब उन्होंने कई विकास कार्यों की पहल की थी, जिनमें से कई सफलतापूर्वक पूरे भी हुए। उन्होंने कहा कि इस बार उन्हें बिहार संग्रहालय की ओर से जितवारपुर क्राफ्ट विलेज के निर्माण की जिम्मेदारी मिली है, और इस परियोजना को भी अन्य सफल परियोजनाओं की तरह ही पूरा किया जाएगा, ताकि जितवारपुर के लोगों को इसका लाभ मिल सके। बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक, जो क्राफ्ट विलेज के नोडल पदाधिकारी भी हैं, ने परियोजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मधुबनी से लगभग डेढ़-दो किलोमीटर दूर स्थित जितवारपुर देश का एकमात्र ऐसा गांव है, जहाँ चार सौ घर हैं और जिसने सर्वाधिक तीन पद्मश्री पुरस्कार दिए हैं। यदि बढ़ती जनसंख्या के कारण जितवारपुर से सटे लहेरियागंज गांव को भी शामिल कर लिया जाए, तो पद्मश्री की संख्या पाँच हो जाती है। शिवन पासवान और उनकी पत्नी शांति देवी को वर्ष 2024 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। जितवारपुर का इतिहास चित्रों और शिल्पों में अपनी अमिट छाप छोड़ गया है।


