महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिला परिषद में भाजपा (BJP) ने अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पदों पर शानदार जीत दर्ज की है। लेकिन इस जीत के बाद सहयोगी शिवसेना ने कड़ा ऐतराज जताते हुए भाजपा पर विश्वासघात का आरोप लगाया है।
जानकारी के मुताबिक, जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में बुधवार को आयोजित चुनाव प्रक्रिया के दौरान भाजपा के अविनाश गलांडे को निर्विरोध जिला परिषद का अध्यक्ष चुना गया, वहीं जितेंद्र जायसवाल उपाध्यक्ष चुने गए। चूंकि किसी भी अन्य राजनीतिक दल ने इन पदों के लिए अपने उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारे थे, इसलिए चुनाव अधिकारी ने भाजपा के दोनों प्रत्याशियों को विजेता घोषित कर दिया।
ऐसे बदल गए सियासी समीकरण
63 सीटों वाली छत्रपति संभाजीनगर जिला परिषद में पिछले महीने हुए चुनाव में भाजपा ने सर्वाधिक 23 सीटें जीती थीं। भाजपा के बाद एकनाथ शिंदे की शिवसेना के पास 21 सीटें थीं, जबकि शिवसेना (उद्धव गुट) को 9 और एनसीपी (सुनेत्रा पवार) को 4 सीटें मिली थीं। हालांकि किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं था, इस वजह से भाजपा-शिवसेना के बीच गठबंधन की बातचीत चल रही थी। संख्या बल के लिहाज से भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) मिलकर आसानी से सत्ता बना सकते थे, लेकिन घटनाक्रम ने अलग ही दिशा ले ली। बहुमत से दूर होने के बावजूद भाजपा निर्विरोध जीत गई।
विपक्ष के साथ शिंदे गुट भी रहा नदारद
बताया जा रहा है कि अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव के दौरान दोनों शिवसेना गुट अनुपस्थित रहे। कुल 63 सदस्यों में से सिर्फ 31 सदस्य ही प्रक्रिया के दौरान मौजूद थे। इस अनुपस्थिति ने चुनाव को पूरी तरह एकतरफा बना दिया, जिससे भाजपा को बिना किसी मुकाबले जीत मिल गई। शिवसेना विधायक और पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिवसेना के कद्दावर नेता और विधायक अब्दुल सत्तार ने भाजपा पर पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाते हुए नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा, “हमारे पार्टी के नेता उदय सामंत और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत चल रही थी, हमने ऐसा विश्वासघात पहली बार देखा है।”


