अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच चीन के मिलिट्री एक्शन को लेकर बड़ा खुलासा

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच चीन के मिलिट्री एक्शन को लेकर बड़ा खुलासा

Middle East Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब चीन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन की रणनीति साफ-साफ दिखती है। पिछले एक दशक से चीन ने मिडिल ईस्ट में व्यापार, निवेश और ऊर्जा साझेदारी के जरिए अपनी पकड़ मजबूत की, लेकिन जब बात सुरक्षा और सैन्य जिम्मेदारी की आती है, तो वह पीछे हटता नजर आता है। वह मिलिट्री एक्शन से हमेशा कतराता रहा।

जबकि यूएस ने इसके उलट काम किया। उसने मिलिट्री एक्शन पर ज्यादा भरोसा किया। दरअसल, चीन का तरीका इकोनॉमिक इन्वेस्टमेंट, एनर्जी एग्रीमेंट और चुनिंदा डिप्लोमैटिक मीडिएशन को जोड़ता है। यह एक ऐसी स्ट्रैटेजी है जो कुछ मायनों में सन त्ज़ू की स्ट्रैटेजिक शिक्षाओं में पाए जाने वाले इनडायरेक्ट पावर के कॉन्सेप्ट से मिलती-जुलती है जो ‘सीधे टकराव के बिना भी असर बढ़ाए जाने की बात कहता है।’

रिपोर्ट में दावा:

‘ब्रसेल्स-बेस्ड EU रिपोर्ट’ के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाया जा रहा सैन्य अभियान पूरे इलाके का संतुलन बिगाड़ सकता है। रिपोर्ट कहती है कि यह टकराव सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे वैश्विक राजनीति पर भी असर पड़ सकता है और एक बार फिर सैन्य ताकत की अहमियत सामने आ रही है।

रिपोर्ट में यह भी सवाल उठाया गया है कि क्या इस युद्ध में चीन की एंट्री से माहौल बदल जाएगा, मिडिल ईस्ट में उसके बढ़ते प्रभाव को देखते हुए।

बता दें पिछले कुछ सालों में चीन ने इस क्षेत्र में व्यापार, निवेश और कूटनीति के जरिए अपनी पकड़ मजबूत की है, जबकि अमेरिका का फोकस हमेशा सैन्य गठबंधनों पर रहा है। चीन की मौजूदगी का बड़ा कारण उसकी ऊर्जा जरूरतें हैं, क्योंकि वह खाड़ी देशों से तेल पर काफी निर्भर है।

इसके अलावा, मिडिल ईस्ट चीन की बेल्ट एंड रोड योजना का भी अहम हिस्सा है, जिसके जरिए वह एशिया, यूरोप और अफ्रीका को जोड़ना चाहता है। हालांकि, चीन अब तक सीधे सैन्य हस्तक्षेप से बचता रहा है और ज्यादा ध्यान आर्थिक रिश्तों पर देता है।

चीन को टक्कर देने के ल‍िए अमेरिका ने किया ये काम

अमेरिका अब चीन के बढ़ते असर का मुकाबला करने के लिए नई रणनीति बना रहा है। इसके तहत वह दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।

अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में दुनिया में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए ये दोनों क्षेत्र काफी अहम होंगे। इसलिए वॉशिंगटन इन इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगा, ताकि चीन के आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव को संतुलित किया जा सके।

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