CAG Report: कैग ने प्रदेश की इकलौती मेडिकल यूनिवर्सिटी (एमयू) जबलपुर की कई गंभीर अनियमितताएं पकड़ीं। इसका खामियाजा मेडिकल कॉलेजों और हजारों विद्यार्थियों को भुगतना पड़ा। एमयू ने नर्सिंग व पैरामेडिकल कॉलेजों, संस्थानों से जुड़े डेटा वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया। इससे यह पता नहीं चला कि किस संस्थान को किस कोर्स के लिए संबद्धता है और कितने विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। नतीजा, कई छात्र छले गए।
मापदंडों के अनुसार संसाधन व इन्फ्रास्ट्रक्चर न होने के बाद भी कॉलेजों को संबद्धता दी गई। कैग की टीम ने 76 संस्थानों का निरीक्षण किया तो 32 में कमियां मिलीं। इतना ही नहीं, एमयू ने स्वीकृत पदों पर भर्ती नहीं की, लेकिन तय संख्या से ज्यादा आउटसोर्स कर्मी नियुक्त कर कंपनी को 84 लाख रुपए का भुगतान कर दिया। एमयू की 2020 से 2022-23 तक की ऑडिट पर विधानसभा में पेश कैग रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ। (MP News)
दो मेडिकल कॉलेजों को नियम तोड़कर दिए 55 करोड़
- यूनिवर्सिटी निधि से संबद्ध संस्थानों को ही मेंटेनेंस का भुगतान संभव है। लेकिन एमयू ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर को नेत्र विज्ञान के उत्कृष्ट विद्यालय बनाने के लिए 39.69 करोड़ और जबलपुर मेडिकल कॉलेज को न्यूरो सर्जरी के उन्नयन के लिए 15.83 करोड़ ( कुल 55.52 करोड़) दिए।
- एमयू ने जवाब दिया, कार्यपरिषद के फैसले के बाद खर्च किया। कैग ने इसे अस्वीकार कर राशि सरकार से लेने को कहा है।
- एमयू में रोकड़/खाता बही का रिकार्ड नहीं। वार्षिक लेखा नहीं। 551 संस्थानों से 98.60 करोड़ एंडोमेंट निधि जमा नहीं कराई। ऐसे में संबद्ध कॉलेज के बंद होने पर छात्र हितों की रक्षा नहीं हुई।
ऐसी गड़बड़ी…
- चिकित्सा शिक्षा विभाग से एमयू में 275 पद स्वीकृत किए, पर 11 साल बाद 2023 में भी 184 पद खाली थे।
- यूनिवर्सिटी बनने के बाद से रेक्टर, प्रशासनिक व वित्त अधिकारी, सहायक रजिस्ट्रार के 16 पद नहीं भरे। इससे परीक्षा, रिजल्ट, अंकसूची, डिग्री वितरण, संबद्धता नामांकन के काम में देरी हुई।
- आउटसोर्स पर स्वीकृत पदों से 4-23 कर्मचारी ज्यादा नियुक्त किए। दिसंबर 2021 से मार्च 2023 तक कर्मचारी उपलब्ध कराने वाली एचआइटीईएस कंपनी को 84.19 लाख भुगतान किया।
- सहायक गेड-3 सह डीईओ के पद पर भी आउटसोर्स से नियुक्ति की। इस पद पर सीधी भर्ती होनी थी। (MP News)


