इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उज्बेकिस्तान में दवा निर्यात करने वाली शिपिंग कंपनी के निदेशक को बड़ी राहत दी है। धोखाधड़ी व आपराधिक न्यास भंग के आरोप में दर्ज मुकदमे की कार्यवाही पर रोक लगा दी। कोर्ट ने राज्य सरकार सहित विपक्षियों से चार हफ्ते में जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति नंद प्रभा शुक्ला की एकलपीठ ने मुकेश कुमार झा की याचिका पर दिया है। उज्बेकिस्तान दवा पहुंचाने का मामला याची का कहना है कि वह एक शिपिंग कंपनी का निदेशक हैं। दवा बनाने वाली कंपनी के कर्मचारी विकास शर्मा ने गौतमबुद्ध नगर के बीटा-2 थाने में याची के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। आरोप है कि याची की कंपनी के साथ दवाइयां उज्बेकिस्तान पहुंचाने के लिए अनुबंध हुआ था। पैसे का भुगतान कर दिया था। इसके बाद भी समय पर दवाइयां नहीं भेजी गईं जिसके कारण दवाइयां खराब हो गईं।
ट्रायल कोर्ट ने आरोप पत्र का संज्ञान लेकर समन आदेश जारी किया है। याची ने समन आदेश सहित मुकदमे की पूरी कार्यवाही को रद्द करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट केस का हवाला दिया याची अधिवक्ता ने तर्क दिया कि याची पर एक ही घटना के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 406 (नए कानून बीएनएस के तहत धारा 318(4) और 316(2)) के तहत आरोप लगाए गए हैं। कानून के स्थापित सिद्धांतों और सुप्रीम कोर्ट के ”दिल्ली रेस क्लब बनाम उत्तर प्रदेश राज्य” के अनुसार धोखाधड़ी (धारा 420) और आपराधिक न्यास भंग (धारा 406) के आरोप एक ही तथ्यों के आधार पर एक साथ नहीं लगाए जा सकते। कोर्ट ने शिकायतकर्ता विपक्षी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही ट्रायल कोर्ट में लंबित मुकदमे की पूरी कार्यवाही पर रोक लगा दी है। अगली सुनवाई 17 अप्रैल 2026 को होगी ।


