Kejriwal vs Modi Iran: केजरीवाल का यह हमला प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हुई हालिया फोन वार्ता के तुरंत बाद आया है। गुरुवार रात हुई इस बातचीत में पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात पर गहरी चिंता जताई थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से राष्ट्रपति पेजेशकियन के सामने भारत की दो बड़ी प्राथमिकताएं रखीं। पहली भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, और दूसर ऊर्जा एवं व्यापारिक माल की बेरोकटोक आवाजाही।
केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक्स पर पूछा तीखा सवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तीखा सवाल पूछा है। उन्होंने ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के संदर्भ में पूछा कि क्या ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने का कोई ठोस आश्वासन दिया है? केजरीवाल ने हिंदी में किए अपने पोस्ट में चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री से स्पष्टता मांगी कि क्या पश्चिम एशिया के इस गंभीर संकट से भारतीय नागरिकों और व्यापार को जल्द राहत मिल पाएगी।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं
गौरतलब है कि ईरान ने रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य Strait of Hormuz को बंद कर दिया है, जो भारत के ऊर्जा आयात का मुख्य लाइफलाइन माना जाता है। तनाव तब और बढ़ गया जब तीन दिन पहले भारत आ रहे एक तेल टैंकर पर ईरानी सेना ने उस वक्त फायरिंग कर दी, जब वह इस समुद्री मार्ग से गुजरने का प्रयास कर रहा था। इस घटना ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
ट्रंप के आगे नतमस्तक क्यों?
इससे पहले भी अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर कड़े सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि ऐसी क्या मजबूरी है कि प्रधानमंत्री को डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकना पड़ रहा है? केजरीवाल ने विदेश मंत्रालय के एक ट्वीट का हवाला देते हुए दावा किया कि देशभर में अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को छोड़कर बाकी सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए एलपीजी LPG सप्लाई रोक दी गई है और अब केवल घरेलू इस्तेमाल के लिए ही गैस उपलब्ध है।
गैस और तेल की स्थिति और गंभीर हो सकती है
प्रधानमंत्री की कूटनीति पर सवाल उठाते हुए केजरीवाल ने पूछा कि आखिर किन कारणों से भारत को डोनाल्ड ट्रंप की शर्तों के आगे झुकना पड़ा? उन्होंने आशंका जताई कि अंतरराष्ट्रीय दबाव में लिए गए फैसलों का खामियाजा अब आम जनता को तेल और गैस की किल्लत के रूप में भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या आने वाले दिनों में यह स्थिति और भी बदतर होने वाली है?


