जयपुर। शहर में एलपीजी पंपों की मनमानी को लेकर पत्रिका में प्रकाशित खबरों का असर देखने को मिला है। रसद विभाग ने सोमवार को ट्रांसपोर्ट नगर स्थित एक प्राइवेट पंप को सीज कर दिया है। खास बात यह रही कि डीएसओ प्रथम प्रियव्रत सिंह चारण खुद ऑटो में बैठकर मौके पर पहुंचे। उन्होंने आम उपभोक्ता की तरह लाइन में लगकर करीब एक घंटे तक अपनी बारी का इंतजार किया। जब डीएसओ की बारी आई और उन्होंने देखा कि पंप पर एलपीजी गैस 99.95 रुपए यानी करीब 100 रुपए प्रति लीटर से बेची जा रही है तो वे भड़क उठे। मौके पर ही उन्होंने पंप को सीज कर दिया।
पंप वालों की दलील: ‘निजी कंपनी है, मनचाहे रेट पर बेचेंगे’
डीएसओ ने बताया कि कार्रवाई के दौरान जब उन्होंने रेट को लेकर सवाल किए तो पंप वालों ने अजीबोगरीब तर्क दिया। उन्होंने कहा कि उनका पंप निजी कंपनी का है और उन्हें सरकार से कोई सब्सिडी नहीं मिलती। कंपनी खुद रेट तय करती है और वे किसी भी कीमत पर गैस बेचने के लिए स्वतंत्र हैं। इस पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कोई भी इस तरह आम जनता को लूट नहीं सकता।
रेटों की जांच शुरू, कालाबाजारी पर कसेगा शिकंजा
डीएसओ ने कहा कि फिलहाल पंप को बंद कराकर सीज कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि “यह तर्क गले नहीं उतरता कि कोई भी प्राइवेट पंप मनमाने दाम वसूलेगा। हम इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि इन पंपों को किस रेट पर गैस मिल रही है और ये कितना मुनाफा कमा रहे हैं। कालाबाजारी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” विभाग अब अन्य निजी पंपों के रेट कार्ड भी खंगाल रहा है।
ऑटो यूनियन ने भी उठाई आवाज, पहुंचे कलक्ट्रेट
इधर, एलपीजी पंपों की मनमानी के खिलाफ ऑटो यूनियन भी सक्रिय हो गई है। यूनियन के पदाधिकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर के नाम डीएसओ को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि सभी पंपों पर गैस की दरें सरकारी नियमों के अनुसार तय की जाएं और 250 रुपए तक गैस भरने की मनमानी पर रोक लगाई जाए। यूनियन ने एलपीजी पंपों की संख्या बढ़ाने और दोषी संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।


