मंगलवार को क्रूड ऑयल मार्केट में एक बार फिर उथल-पुथल देखने को मिली। यह डोनाल्ड ट्रंप के उन बयानों के विपरीत था जो उन्होंने ईरान से युद्ध समाप्ति की बातचीत के संकेत दिए थे। क्योंकि ईरान ने ऐसी कोई भी बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया है।
इस सब बयानबाजी के बाद मंगलवार को ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया और WTI करीब 4 फीसदी उछला। इससे पहले सोमवार को क्रूड की कीमत में 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। इसेक साथ ही भारत में MCX पर क्रूड 3.57 फीसदी उछलकर 8,645 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गया।
एक दिन में 10% गिरा, अगले दिन 4% चढ़ा, आखिर क्यों?
सोमवार को ट्रंप ने कहा कि ईरान के पावर प्लांट पर हमला 5 दिन के लिए टाल दिया गया है और बातचीत productive रही है। बस इतने में क्रूड 10 फीसदी से ज्यादा गिर गया। लेकिन मंगलवार को ईरान ने साफ कह दिया कि कोई बातचीत नहीं हुई और होर्मुज सामान्य नहीं होगा। बस इतने में क्रूड फिर 4 फीसदी चढ़ गया।
यह सिर्फ 24 घंटे की कहानी है और यह उतार-चढ़ाव बताता है कि इस वक्त क्रूड मार्केट पूरी तरह बयानों पर चल रहा है। कोई फंडामेंटल नहीं, कोई डेटा नहीं, बस एक बयान और बाजार पलट जाता है। कोटक सिक्योरिटीज के अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक अभी ब्रेंट 95 से 110 डॉलर के दायरे में रहने की संभावना है।
होर्मुज अप्रैल तक बंद रहा तो क्या?
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म मैक्वेरी ने रॉयटर्स को दिए बयान में एक डरावना अनुमान पेश किया है। अगर होर्मुज की खाड़ी अप्रैल के अंत तक बंद रही तो ब्रेंट क्रूड 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। अगर तनाव कुछ कम भी हुआ तो मैक्वेरी का कहना है कि 85 से 90 डॉलर के नीचे जाना मुश्किल है और होर्मुज खुलने तक 110 डॉलर की कीमत जारी रह सकती है।
सऊदी अरब भी जंग में कूदेगा?
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट ने इस पूरे संकट में एक नया और बेहद खतरनाक आयाम जोड़ दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक खाड़ी में अमेरिका के सहयोगी देश धीरे-धीरे इस जंग में शामिल होने की तरफ बढ़ रहे हैं। सबसे अहम सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान यानी MBS इस जंग में भाग लेने के फैसले के करीब हैं। अगर सऊदी अरब सीधे इस जंग में आया तो ईरान का जवाब और भीषण होगा और ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर इसका असर अभी से कहीं ज्यादा गहरा होगा।
डीजल और जेट फ्यूल में भी जबरदस्त महंगाई
क्रूड की 60 फीसदी की उछाल तो सुर्खियों में है लेकिन इसी बीच एक और चीज महंगी हो रही है वह है डीजल और जेट फ्यूल। ये क्रूड से भी तेज रफ्तार से चढ़े हैं। इसका सीधा असर हर उस चीज पर पड़ता है जो ट्रक, बस या हवाई जहाज से चलती है।
डीजल महंगा हुआ तो ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ेगी और ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ी तो हर चीज महंगी होगी। जेट फ्यूल महंगा हुआ तो एयरलाइंस का खर्च बढ़ेगा और टिकट महंगे होंगे। यह असर सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है यह सीधे आम आदमी की थाली और जेब तक पहुंचता है।


